मुश्किल परिस्थितियों में बचाव करने की क्षमता प्रज्ञानानंदा की प्रतिभा की पहचान है: कोच

प्रज्ञाननंदा की सफलता का पूरा श्रेय उनकी मां को मिलना चाहिये: पिता रमेश बाबू

चेन्नई. राष्ट्रीय कोच ग्रैंडमास्टर एम श्याम सुंदर ने मंगलवार को कहा कि आर प्रज्ञानानंदा का दबाव की स्थिति में सहजता से बचाव करना और अपने प्रतिद्वंद्वी की कमजोरी को तुरंत भांपने की क्षमता एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी की पहचान है. भारत के प्रज्ञानानंदा फिडे विश्व कप के फाइनल में अब नॉर्वे के सुपर स्टार मैग्नस कार्लसन से भिड़ेंगे. बाकू में मौजूद ग्रैंडमास्टर श्याम सुंदर ने कहा कि प्रज्ञानानंदा के पास ऑलराउंड खेल है.

उन्होंने कहा, ”उनकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ भी मुश्किल स्थिति में बचाव करने की उनकी क्षमता है. उनकी गणना करने की क्षमता उत्कृष्ट है और वह आत्मविश्वास के साथ बेहतर स्थिति को जीत में बदल सकता है.” उनका कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि प्रज्ञानानंदा सभी प्रारूप में अच्छा है.

कोच ने कहा कि कई युवा खिलाड़ियों के सामने आने और उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से खिलाड़ी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं.
श्याम सुंदर ने कहा, ”डी गुकेश, प्रज्ञानानंदा, अर्जुन एरिगेसी, निहाल सरीन जैसे खिलाड़ियों की प्रगति देखकर खुशी होती है. उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है और वे उत्कृष्ट प्रदर्शन करते रहते हैं.”

उन्होंने कहा, ”उम्मीद है कि ये सितारे लगातार अच्छा प्रदर्शन करेंगे और कई अन्य लोगों को खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे.” प्रज्ञानानंदा की प्रगति को शानदार करार देते हुए ग्रैंडमास्टर सुंदराजन किदांबी ने कहा कि उनक प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारत में शतरंज कैसे तेजी से बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा, ”प्रज्ञानानंदा की प्रगति शानदार है. मैंने उसके बचपन के दिनों से ही उसे देखा है, कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मास्टर बनना और फिर शीर्ष तक जाना. वह विश्व जूनियर चैंपियनशिप जीतकर सबसे कम उम्र का ग्रैंडमास्टर भी बन सकता था लेकिन मामूली अंतर से चूक गया.” किदांबी ने कहा, ”उन्होंने कार्लसन को ऑनलाइन ब्लिट्ज/रेपिड बाजी में हराया है जिससे सनसनी फैल गई थी और एक साल के भीतर उसने विश्व कप फाइनल में उनसे मुकाबला करने के लिए क्वालीफाई कर लिया. यह प्रगति आश्चर्यजनक है.” खिलाड़ी से कोच बने अंतरराष्ट्रीय मास्टर वी सरवनन ने कहा कि पिछले दो साल में प्रज्ञानानंदा ने शानदार प्रगति की है और साथ ही अर्जुन और गुकेश ने भी.

विश्व कप फाइनल के बारे में उन्होंने कहा, ”प्रज्ञानानंदा के लिए कार्लसन के खिलाफ मुकाबला बहुत मुश्किल होगा. मुझे लगता है कि कार्लसन का पलड़ा भारी है, वह प्रबल दावेदार हैं. हालांकि शतरंज में हमेशा एक मौका होता है कि प्रज्ञानानंदा जैसा विलक्षण खिलाड़ी पारंपरिक अनुमान को बदल दे (और जीत सकता है).”

प्रज्ञाननंदा की सफलता का पूरा श्रेय उनकी मां को मिलना चाहिये: पिता रमेश बाबू
भारतीय शतरंज के नये सितारे आर प्रज्ञाननंदा बाकू में खेल जा रहे विश्व कप में जब इस खेल में नया इतिहास रच रहे थे तब एक कोने में खड़ी उनकी मां नागलक्ष्मी की आंखों में चमक और चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान देखी जा सकती थी. टूर्नामेंट के दौरान प्रज्ञाननंदा की मां की मौजूदगी ने पूर्व महान खिलाड़ी गैरी कास्पारोव को अपने खेल के दिनों की याद दिला दी. कास्परोव ने कहा कि जब वह खेलते थे तब उनकी मां भी उनके साथ मौजूद रहती थी और इसने उनके खेल में काफी मदद की.

भारतीय खेल जगत में ऐसे कई उदाहरण है जहां बच्चों के करियर को आकार देने में माता-पिता का व्यापक प्रभाव रहा है. विश्वनाथन आनंद की लगभग साढ़े तीन दशक पुरानी तस्वीर आज भी प्रशंसकों के जेहन में है जिसमें वह 64 खानों के इस खेल को अपनी मां सुशीला के साथ खेल रहे हैं.

विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में प्रज्ञाननंदा जब अर्जुन एरिगैसी को हराकर मीडिया से बातचीत कर रहे तब नागलक्ष्मी चेहरे पर मुस्कान और आत्मसंतुष्टि के साथ अपने बेटे को निहार रही थी. यह तस्वीर जल्दी ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी.

प्रज्ञानानंद के पिता रमेश बाबू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ” मुझे अपनी पत्नी को श्रेय देना चाहिए, जो टूर्नामेंट में उनके साथ जाती है और उसका पूरा समर्थन करती है. वह (दोनों बच्चों का) बहुत ख्याल रखती है.” बैंक कर्मचारी रमेशबाबू को शतरंज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. उन्होंने अपने बच्चों को टेलीविजन के सामने से हटाने के लिये इस खेल का सहारा लिया.

रमेशबाबू ने कहा, ”हमने वैशाली को शतरंज से परिचित कराया था ताकि बचपन में उसकी टीवी देखने की आदत कम हो सके. इसके बाद दोनों बच्चों को यह खेल पसंद आया और उन्होंने इसे जारी रखने का फैसला किया.” उन्होंने कहा, ”हमें खुशी है कि दोनों शतरंज खेलने का आनंद ले रहे हैं और शतरंज के प्रति अपने जुनून के कारण अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं.” वैशाली महिला ग्रैंडमास्टर है और अंतरराष्ट्रीय र्सिकट में सबसे बेहतरीन युवा खिलाड़ियों में से एक है.

उन्होंने कहा, ” मुझे इस खेल के बारे में ज्यादा नहीं पता लेकिन मैं हर टूर्नामेंट पर नजर रखता हूं. उन्होंने कहा, ” मैं नागलक्ष्मी और प्रज्ञाननंदा से लगभग रोजाना बात करता हूं लेकिन सेमीफाइनल में फैबियानो कारुआना के खिलाफ जीत दर्ज करने के बाद अपने बेटे से बात नहीं कर पाया हूं.”

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