
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान द्वारा किये गये खुलासे के मद्देनजर सैन्य एवं विदेश नीति से संबंधित रणनीति पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र तत्काल बुलाने की रविवार को मांग की. कांग्रेस ने यह भी मांग की कि सरकार सभी दलों और पूरे देश को विश्वास में ले तथा ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीति पर चर्चा करे. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री को सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं को वह बताना चाहिए था कि जो जनरल चौहान ने सिंगापुर में कहा है.
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर पर कुछ महत्वपूर्ण बयान सिंगापुर में दिए हैं. बेहतर होता कि प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री ने पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं को इस बारे में जानकारी दी होती.” रमेश ने कहा, ”जनरल चौहान के बयानों से ऑपरेशन सिंदूर के बाद के दौर में व्यापक रणनीतिक विदेश नीति और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद की तत्काल बैठक बुलाने के मामले को बल मिलता है.” शनिवार को सिंगापुर में जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान के साथ हाल ही में हुए सैन्य संघर्ष में विमान के नुकसान के बाद भारत ने अपनी रणनीति में सुधार किया और पाकिस्तानी क्षेत्र में काफी अंदर तक हमला किया. उन्होंने छह भारतीय विमानों को मार गिराने के इस्लामाबाद के दावे को भी “बिल्कुल गलत” बताया.
जनरल चौहान ने ‘ब्लूमबर्ग टीवी’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि भारत ने शुरुआती नुकसान के कारणों का पता लगाने के बाद पाकिस्तान पर पलटवार करने के लिए अपने सभी लड़ाकू विमान उड़ाये और सटीक हमले किए. रमेश ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि इस तरह के बयान सीडीएस की ओर से सिंगापुर से आ रहे हैं. जनरल चौहान के बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया, ”प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं को जानकारी क्यों नहीं दे सकते थे?” उन्होंने कहा, ”’हम इसी उद्देश्य के लिए सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं.”’ रमेश ने भारत की रक्षा तैयारियों पर करगिल युद्ध के बाद गठित समिति की तर्ज पर एक विशेष समीक्षा समिति गठित करने की अपनी मांग भी दोहरायी.
उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध समाप्त होने के तीन दिन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पिता की अध्यक्षता में एक करगिल समीक्षा समिति गठित की थी और रिपोर्ट को बाद में संसद में पेश किया गया था तथा उस पर चर्चा की गई थी. रमेश ने सवाल किया कि क्या अब विशेष रूप से प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के “नुकसान” से संबंधित बयान के मद्देनजर अब ऐसी समिति गठित की जा रही है.
सीडीएस ने अपने साक्षात्कार में नुकसान का ब्योरा देने से इनकार कर दिया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानी क्षेत्र में काफी अंदर तक हमला किया. भारत ने कहा कि इन सटीक हमलों के बाद पाकिस्तान सैन्य संघर्ष रोकने की गुहार लगाने के लिए मजबूर हुआ. सीडीएस की यह टिप्पणी पड़ोसी देश के साथ चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष में हुए नुकसान के बारे में भारतीय सेना की पहली स्पष्ट स्वीकारोक्ति है.
कांग्रेस मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, “इन मुद्दों पर विशेष सत्र बुलाकर सभी को विश्वास में लेकर चर्चा की जानी चाहिए….” उन्होंने कहा, ”जब अमेरिका ने एक संघर्ष विराम की घोषणा की, तो नेता ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करने के लिए विदेश चले गए. सवालों का जवाब कौन देगा? जवाब सशस्त्र बलों से नहीं, बल्कि सरकार से आना चाहिए.” खेड़ा ने कहा कि सशस्त्र बल मजबूत हैं और उन्होंने वही किया जो जरूरी था, लेकिन ‘संघर्ष विराम’ किस दबाव में किया गया.
खेड़ा ने सरकार से कई सवाल करते हुए कहा, ”पहलगाम हमले के आतंकवादी कहां हैं? संघर्ष विराम के लिए क्या शर्तें थीं? सीडीएस ने जो कहा वह चौंकाने वाला है. अब स्पष्टता होनी चाहिए. उन्हें एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए और सवालों के जवाब देने चाहिए.” राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने भी कहा कि जनता को ताजा सशस्त्र संघर्ष पर एक सुसंगत जवाब मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा, ”पूरा देश पूछ रहा है, नेता अलग-अलग बात बोल रहे हैं, दूसरी तरफ सीडीएस ने विदेश में कुछ और कहा, यह स्वीकार किया कि हमारा जेट गिराया गया था. सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए.”
उन्होंने कहा, ”इसलिए हम बातचीत के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं और एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है. दूसरी ओर, प्रधानमंत्री चार दिन में सशस्त्र बलों द्वारा दिखाए गए पराक्रम का राजनीतिकरण करने पर तुले हुए हैं.” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को सरकार पर भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर राष्ट्र को गुमराह करने का आरोप लगाया था. खरगे ने यह भी कहा था कि उनकी पार्टी एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा भारत की रक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा की मांग करती है.



