एपी-एनआरओसी सर्वेक्षण: अर्थव्यवस्था संभालने में ट्रंप की लोकप्रियता में आई कमी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 11 Dec 2025 09:23 PM
एपी-एनआरओसी सर्वेक्षण: अर्थव्यवस्था संभालने में ट्रंप की लोकप्रियता में आई कमी
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वाशिंगटन/न्यूयॉर्क. अर्थव्यवस्था और आव्रजन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में इस साल काफी गिरावट आई है. ‘एपी-एनओआरसी’ के एक नये सर्वेक्षण से यह बात सामने आयी है. यह इस बात का ताजा संकेत है कि जिन दो अहम मुद्दों के आधार पर ट्रंप लगभग एक साल पहले चुनाव जीते थे, वो अब उनके लिए परेशानी बन सकते हैं. उनकी पार्टी 2026 के मध्यावधि चुनावों की तैयारी शुरू कर रही है.

द एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च के सर्वेक्षण में पाया गया है कि अब सिर्फ 31 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क ही ट्रंप के अर्थव्यवस्था संभालने के तरीके से सहमत हैं. मार्च में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था और अब इसमें कमी आ गई है.
यह ट्रंप के पहले या दूसरे कार्यकाल में एपी-एनओआरसी सर्वेक्षण में दर्ज की गई सबसे कम आर्थिक स्वीकृति रेंिटग है.

ट्रंप ने अगर रुख नहीं बदला तो वह भारत को खो देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे: अमेरिकी सांसद
अमेरिका की एक सांसद ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के प्रति नीतियां रणनीतिक भरोसे और पारस्परिक समझ को “वास्तविक व स्थायी नुकसान” पहुंचा रही हैं. उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को हुए नुकसान को कम करने के लिए वॉंिशगटन को ‘अविश्वसनीय तत्परता’ के साथ कदम उठाने होंगे.

कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद सिडनी कैमलेजर-डॉव ने कहा “…अगर ट्रंप अपनी नीति में बदलाव नहीं करते, तो वह भारत को खो देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे. और ज्यादा साफतौर पर कहा जाए तो उन्होंने भारत को दूर कर दिया जबकि रूसी साम्राज्य को सशक्त किया. उन्होंने ट्रांसअटलांटिक गठबंधन को तोड़ा है और लातिन अमेरिका को खतरे में डाला है. यह वह विरासत नहीं है जिसपर किसी राष्ट्रपति को गर्व होना चाहिए.” उन्होंने कहा, “जब इतिहास की किताबें लिखी जाएंगी और बताया जाएगा कि भारत के प्रति ट्रंप की शत्रुता कहां से शुरू हुई, तो वे किसी ऐसी चीज की ओर इशारा करेंगी जिसका हमारे दीर्घकालिक रणनीतिक हितों से कोई लेना-देना नहीं है. यह चीज है उनका नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर व्यक्तिगत जुनून. यह भले ही हास्यास्पद हो, लेकिन इसका जो नुकसान होगा, उसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जा सकता.”

ट्रंप ने कहा है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने दुनिया भर में संघर्षों को समाप्त किया, जिसमें मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ संघर्ष भी शामिल है. कैमलेजर-डॉव संसद की दक्षिण और मध्य एशिया विदेश मामलों की उप समिति की बैठक में ‘यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: सिक्योंिरग अ फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ विषय पर संबोधन दे रही थीं.

कैमलेजर-डॉव ने भारत के प्रति ट्रंप की नीतियों की आलोचना की. इन नीतियों में भारत पर दुनिया में सबसे अधिक 50 प्रतिशत शुल्क लगाना, एच1बी वीज़ा पर 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाना शामिल है. बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिका में रहने और काम करने के लिए एच1बी वीजा का उपयोग करते हैं.

सांसद ने कहा, “ट्रंप की नीतियों को ‘अपनी ही नाक काटना’ के तौर पर र्विणत किया जा सकता है. इनसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसे और पारस्परिक समझ को वास्तविक व स्थायी नुकसान पहुंच रहा है.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तस्वीर दिखाते हुए उन्होंने कहा, ”स्पष्ट तौर पर कहूं तो दबाव बनाने वाला साथी होने की अपनी कीमत होती है और यह पोस्टर हज़ार शब्दों के बराबर है.” इस तस्वीर में दोनों नेता नयी दिल्ली में एक कार में साथ यात्रा करते दिख रहे हैं और यह रूस के राष्ट्रपति पुतिन के दिल्ली आगमन पर पालम हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निजी तौर पर उनका स्वागत करने के बाद की थी. पिछले हफ्ते, पुतिन भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत की यात्रा पर थे.

कैमलेजर-डॉव ने कहा, “आप अमेरिकी रणनीतिक साझेदारों को हमारे दुश्मनों की बाहों में धकेलकर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं जीत सकते. प्रशासन को अमेरिका-भारत साझेदारी को हुए नुकसान को कम करने के लिए अत्यधिक तत्परता के साथ कदम उठाने की आवश्यकता है और उस सहयोग की ओर वापसी करने की आवश्यकता है जो अमेरिका की समृद्धि, सुरक्षा व वैश्विक नेतृत्व के लिए आवश्यक है. संसद के दोनों प्रमुख दल इस रिश्ते की अहमियत को समझते हैं.” कैमलेजर-डॉव ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि उसने भारत-अमेरिकी साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए किए गए वर्षों के प्रयासों पर पानी फेर दिया.

उन्होंने कहा, “दोनों राजनीतिक दलों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी) के शासनकाल में दोनों देशों (भारत-अमेरिका) के बीच विश्वास बरकरार रखने और सहयोग को प्रगाढ़ बनाने के लिए वर्षों तक कठिन परिश्रम किया गया. जब ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में पद संभाला तब द्विपक्षीय संबंध चरम पर थे. क्वॉड सक्रिय था, उभरती रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी कायम थी और एक विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला भागीदारी बनी हुई थी.” उन्होंने कहा, “ये कड़ी मेहनत से हासिल की गईं उपलब्धियां थीं और दोनों देशों के रणनीतिक अनुशासन का परिणाम थीं. और फिर क्या हुआ? दशकों में अमेरिका द्वारा संचित पूंजी को केवल ट्रंप की व्यक्तिगत शिकायतों की खातिर और हमारे राष्ट्रीय हितों की कीमत पर टॉयलेट में बहा दिया गया.” सांसद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अमेरिका और भारत का रणनीतिक गठजोड़ टिकाऊ है, लेकिन ”निश्चित रूप से इसे हल्के में लेना” सही नहीं होगा.

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