ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते से जर्मनी-भारत कारोबार को नयी गति मिलेगी: महावाणिज्यदूत

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Fri, 12 Jun 2026 12:45 PM
ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते से जर्मनी-भारत कारोबार को नयी गति मिलेगी: महावाणिज्यदूत
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इंदौर: मुंबई में जर्मनी के महावाणिज्यदूत क्रिस्टोफ हॉलियर ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के अमल में आने से द्विपक्षीय कारोबार को नयी गति मिलेगी और जर्मनी की कंपनियों के लिए भारत में नये क्षेत्रों में विस्तार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुणे और बेंगलुरु जैसे पारंपरिक औद्योगिक गढ़ों के अलावा भारत के अन्य स्थानों पर भी जर्मनी की कंपनियों के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं।

इंदौर में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में हॉलियर ने कहा, ” मुझे पूरा भरोसा है कि ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते के अमल में आने पर हमारे द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को और बढ़ावा मिलेगा। ” जर्मनी, ईयू के संस्थापक सदस्यों में से एक है। ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते से सबसे ज्यादा लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ” मुझे लगता है कि इस समझौते में लगभग सभी क्षेत्र शामिल हैं। जर्मनी के दृष्टिकोण से विनिर्माण क्षेत्र हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

मेरी राय में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं।” हॉलियर ने कहा, ” अब तक जर्मनी की कंपनियों ने आईटी के मामले में बेंगलुरु पर ज्यादा ध्यान दिया है, लेकिन अब वे अन्य स्थानों पर विस्तार करने में भी दिलचस्पी दिखा रही हैं।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ईयू की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 16वें भारत-ईयू सम्मेलन में 27 जनवरी को भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता संपन्न होने की संयुक्त रूप से घोषणा की थी।

हॉलियर ने कहा कि जर्मनी और भारत के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। महावाणिज्यदूत ने कहा, ” पिछले साल हमारे द्विपक्षीय व्यापार में छह प्रतिशत की और बढ़ोतरी हुई। इसलिए मुझे लगता है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और हमारे कारोबारी संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में जर्मनी की करीब 2,000 कंपनियां मौजूद हैं।

हॉलियर ने बताया कि इन कंपनियों का सबसे बड़ा समूह पुणे में है जहां मोटर वाहन क्षेत्र मजबूत होने के कारण जर्मनी के कुछ मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) और उनके कई आपूर्तिकर्ता कार्यरत हैं। पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग का उल्लेख करते हुए महावाणिज्यदूत ने कहा, ” हमारे बीच ‘इंडो-जर्मन ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप’ पहले से मौजूद है। यह भागीदारी नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा के क्षेत्रों में परियोजनाओं का आधार है।”

मध्यप्रदेश और जर्मनी के बीच आपसी सहयोग को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में स्थित भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) ने जर्मनी के अकादमिक संस्थानों के साथ कई क्षेत्रों में हाथ मिला रखा है।

हॉलियर ने कहा कि इन संबंधों से भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि मध्यप्रदेश ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय रुचि और सफलता दिखाई है। हॉलियर ने कहा, ” मुझे लगता है कि राज्य में जर्मनी की कंपनियों के इस क्षेत्र में भी आने की संभावना है।” उन्होंने कहा कि पुणे की तुलना में इंदौर क्षेत्र में जर्मनी की कंपनियों की मौजूदगी अभी काफी कम है, लेकिन यह स्थिति भविष्य में निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को दर्शाती है।

अधिकारियों ने बताया कि अपने मध्यप्रदेश दौरे में हॉलियर ने 10 और 11 जून को इंदौर और इससे सटे पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया और आईटी, पर्यटन और अन्य उद्योगों में संभावनाओं का जायजा लिया। इससे पहले, उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से नौ जून को राजधानी भोपाल में मुलाकात की थी।

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