
भुवनेश्वर. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक टीम ने ओडिशा के कोणार्क में 13वीं सदी के सूर्य मंदिर से रेत हटाने के कार्य का निरीक्षण किया. एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक जान्हवीज शर्मा के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम ने मंदिर के मंडप से रेत हटाने के कार्य में हुई प्रगति का निरीक्षण किया. आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, 1903 में तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासन ने ढहने से बचाने के लिए इस ढांचे को रेत से भरकर सील कर दिया था.
शर्मा ने कहा, ”कोणार्क मंदिर एक विश्व धरोहर स्थल है और हम समय-समय पर निरीक्षण करते हैं. आज नियमित निरीक्षण किया गया.” उन्होंने बताया कि संरचनात्मक क्षति की जांच के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) द्वारा किए गए ‘एंडोस्कोपी’ अध्ययन से पता चला है कि रेत का भराव लगभग 12.5 फीट नीचे बैठ गया है और कुछ पत्थर उखड़ गए हैं. इसके बाद एएसआई ने एक निर्माण कंपनी को काम पर लगाया, जिसने थोड़े समय के विराम के बाद अगस्त 2023 में काम फिर से शुरू किया और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा.



