असम के मुख्यमंत्री ने साधा राहुल और जयराम पर निशाना

गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने कांग्रेस के संवाददाता सम्मेलन के दौरान बृहस्पतिवार को राहुल गांधी की जुबान फिसलने और फिर पार्टी नेता जयराम रमेश द्वारा उसमें सुधार करने को लेकर दोनों विपक्षी नेताओं पर तंज कसा. शर्मा ने एक तरफ जहां उन लोगों का भी मजाक उड़ाया जो मानते हैं कि राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देने वाले नेता के रूप में उभरेंगे, वहीं दूसरी ओर रमेश को कांग्रेस का ‘‘मुख्य विध्वंसक’’ करार दिया.

मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘मुझे तथाकथित सेक्यूलरों (धर्मनिरपेक्ष -वादियों) और वामपंथियों के लिए खेद है, जो बहुत विश्वास करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह आदमी (राहुल गांधी) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हराएगा और प्रधानमंत्री बनेगा.’’ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और फिर असम के मुख्यमंत्री बने शर्मा ने 26 सेकेंड का एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि जयराम मुख्य विध्वंसक की भूमिका निभा रहे हैं. माइक के सामने ज्ञान दे रहे हैं … अजीब है.’’

शर्मा द्वारा साझा की गई क्लिप में, गांधी को शुरू में यह कहते हुए दिखाया गया है कि ‘‘दुर्भाग्य से मैं संसद का सदस्य हूं’’. इस पर राहुल के बायीं ओर बैठे रमेश उन्हें टोकते हैं और कथित तौर पर गांधी से कहते हैं कि ‘‘वे इसका मजाक बना सकते हैं’’. इसके बाद राहुल गांधी ने कहा,‘‘दुर्भाग्य से मैं आपके सवालों का जवाब नहीं दे सकता.’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के चार मंत्रियों ने मेरे ऊपर आरोप लगाये हैं तो मेरा हक है कि मैं सदन में अपनी बात रखूं. अगर भारत का लोकतंत्र बरकरार है तो मैं अपनी बात संसद में रख पाऊंगा.’’

ब्रिटेन में भारत में लोकतंत्र के संबंध में की गई राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता उनसे माफी की मांग कर रहे हैं. राहुल ने इस सिलसिले में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ब्रिटेन में दिए अपने एक बयान को लेकर संसद में जारी गतिरोध पर कहा कि देश में अगर लोकतंत्र बरकरार है तो उन्हें संसद में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए क्योंकि उनके खिलाफ सरकार के चार मंत्रियों ने सदन के भीतर आरोप लगाए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि यह भारतीय जनतंत्र के लिए एक इम्तहान भी होगा कि उन्हें भी चार मंत्रियों की तरह ही सदन में बोलने का पूरा अवसर मिलता है या फिर चुप होने के लिए कहा जाता है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अडाणी समूह से जुड़े मामले से ध्यान भटकाने के लिए सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से संसद में पूरा तमाशा खड़ा किया गया है.

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