बंगाल में ‘बाबरी’ मस्जिद निर्माण: मप्र में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने हुमायूं कबीर के खिलाफ किया प्रदर्शन

अशोकनगर/भोपाल. मध्य प्रदेश पुलिस ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ जैसी एक मस्जिद की नींव रखे जाने के विरोध में कुछ हिंदूवादी कार्यकर्ताओं द्वारा भोपाल के सार्वजनिक शौचालयों पर कुछ पोस्टर चस्पा करने की कोशिश को नाकाम कर दिया.

तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा छह दिसंबर को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में मस्जिद की नींव रखे जाने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. मध्यप्रदेश के अशोकनगर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय नेता के नेतृत्व में एक सामुदायिक शौचालय के बाहर ‘बाबर शौचालय’ नाम का एक पोस्टर चस्पा कर दिया. राजधानी भोपाल में हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक शौचालय का नाम बदलकर ‘‘बाबर शौचालय’’ रखने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस र्किमयों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा, ‘‘अगर आप मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो अब्दुल कलाम और बिस्मिल्लाह खान के नाम पर बनाइए. हमें उन आक्रमणकारियों का महिमामंडन क्यों करना चाहिए जिन्होंने भारतीय मंदिरों को नष्ट किया और हजारों लोगों की हत्या की? ’’ अशोकनगर में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष बबलू यादव ने कहा कि जिस प्रकार 1992 में बाबरी ढांचा तोड़ा गया था, यदि वहां मस्जिद बनाई गई तो उसे भी तोड़ा जाएगा.

यादव ने कहा, ”देश का नाम रोशन करने वाले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसे लोगों के नाम पर मस्जिद बनाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाबर, अकबर और हुमायूं के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी और इसका विरोध किया जाएगा.” उन्होंने चंदेरी का उदाहरण देते हुए कहा कि बाबर के कारण रानी मणिमाला और 1600 रानियों को ‘जौहर’ करना पड़ा था. इतिहासकारों के मुताबिक बाबर ने जनवरी 1528 में चंदेरी रियासत पर हमला कर दिया था, जिसमें राजा मेदिनी राय वीर गति को प्राप्त हो गए. इसके बाद रानी मणिमाला ने 1600 से अधिक वीरांगनाओं के साथ जौहर कर लिया था.

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