बिहार एसआईआर: न्यायालय ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के खिलाफ सुनवाई शुरू की

Author: navabharat digital
UPDATED: Tue, 12 Aug 2025 02:09 PM
बिहार एसआईआर: न्यायालय ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के खिलाफ सुनवाई शुरू की
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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई शुरू की। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता मनोज झा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को सुना जिन्होंने दलील दी कि एक निर्वाचन क्षेत्र में आयोग ने 12 लोगों के मृत होने का दावा किया है जबकि वे जीवित पाए गए हैं, वहीं एक अन्य घटना में भी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया है।

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया में ‘‘कहीं कहीं कुछ त्रुटियां होना स्वाभाविक है’’ और यह दावा कि मृत व्यक्तियों को जीवित और जीवित को मृत घोषित कर दिया गया, हमेशा सही किया जा सकता है क्योंकि यह केवल एक मसौदा सूची है।

पीठ ने निर्वाचन आयोग से कहा कि वह तथ्यों और आंकड़ों के साथ ‘‘तैयार’’ रहे क्योंकि प्रक्रिया शुरू होने से पहले की मतदाताओं की संख्या, पहले के मृतकों की संख्या और अब की संख्या तथा अन्य प्रासंगिक विवरणों पर सवाल उठेंगे।

निर्वाचन आयोग को एक संवैधानिक प्राधिकरण करार देते हुए 29 जुलाई को शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर बिहार में मतदाता सूची की एसआईआर में ‘‘बड़े पैमाने पर मतदाताओं को हटाया गया है’’ तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगी।

मसौदा मतदाता सूची एक अगस्त को प्रकाशित की गई थी और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली है, जबकि विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया करोड़ों पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर देगी।
शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई को निर्वाचन आयोग से आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज मानने को कहा था और निर्वाचन आयोग को बिहार में अपनी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी थी।

निर्वाचन आयोग के हलफनामे में बिहार में मतदाता सूचियों की जारी एसआईआर को यह कहते हुए उचित ठहराया गया है कि यह मतदाता सूची से ‘‘अयोग्य व्यक्तियों को हटाकर’’ चुनाव की शुचिता को बढ़ाता है। राजद सांसद झा और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के अलावा, कांग्रेस के के. सी. वेणुगोपाल, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-एसपी) से सुप्रिया सुले, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से डी. राजा, समाजवादी पार्टी (सपा) से हरेंद्र ंिसह मलिक, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) से अरंिवद सावंत, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से सरफराज अहमद और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) के दीपांकर भट्टाचार्य ने संयुक्त रूप से निर्वाचन आयोग के 24 जून के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। पीयूसीएल, एनजीओ एसोसिएशन आॅफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स जैसी कई अन्य नागरिक संस्थाओं और योगेंद्र यादव जैसे कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।

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