भाजपा आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर रही है: अखिलेश यादव

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Wed, 20 May 2026 02:59 PM
भाजपा आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर रही है: अखिलेश यादव
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए,’आरक्षण की लूट’ से संबंधित ‘पीडीए आॅडिट’ नामक एक दस्तावेज जारी किया और कहा कि रिपोर्ट को अधिक डेटा और तथ्यों के साथ अद्यतन किया जाता रहेगा। उन्होंने कहा, ”पीडीए आॅडिट और आरक्षण की लूट पर इस दस्तावेज में सुधार जारी रहेगा और इसमें अधिक डेटा शामिल किया जाएगा।”

यादव ने जून 2023 में ‘पीडीए’ शब्द गढ़ा था जिसका उनके अनुसार अभिप्राय है ”पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक”। सपा प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर छात्रों और अर्भ्यिथयों को संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो “यह समझा जाना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है।”

उन्होंने आरोप लगाया, ”अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका अभिप्राय है कि सरकार पक्षपाती है। और जो पक्षपाती है वह बेवफा भी है। पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है।” सपा अध्यक्ष ने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का जरिया बताया। उन्होंने कहा, ”आरक्षण सुरक्षा है। आरक्षण सामाजिक समन्वय का एक उपकरण और माध्यम भी है।”

भाजपा सरकार की बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ”अगर भाजपा सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है, तो उन्हें असमानता की असमान जमीन को समतल करने और सभी को उनका उचित आरक्षण प्रदान करने के लिए उपयोग करना चाहिए।” सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ‘पार्श्व प्रवेश’ (लेटरल एंट्री) नियुक्तियों जैसे तंत्रों के माध्यम से आरक्षण को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया, ”पार्श्व प्रवेश के जरिए अपनी पसंद के लोगों को पिछले दरवाजे से समायोजित किया जा रहा है ताकि आरक्षण की मांग धीरे-धीरे कमजोर हो जाए।”

‘लेटरल एंट्री’ से तात्पर्य सरकार के बाहर से व्यक्तियों को सीधे मध्य-स्तर और वरिष्ठ स्तर के पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया से है। यादव ने भाजपा पर संवैधानिक आरक्षण को लेकर ”बेईमानी” में शामिल होने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल समाज के वंचित वर्गों के लिए समान अवसर नहीं चाहता है। सपा प्रमुख ने कहा, ”आरक्षण दान नहीं है, यह एक अधिकार है।” उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आरक्षण आवश्यक है।

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