नयी दिल्ली/मुंबई/कोच्चि/इंदौर/बेंगलुरु. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं एवं केंद्रीय मंत्रियों ने ‘‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’’ (पीएफआई) व उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय की बुधवार को सराहना की. भाजपा नेताओं ने दावा किया कि इस कार्रवाई के जरिए केंद्र सरकार ने ‘‘उचित समय पर ठोस कदम’’ उठाया है. उन्होंने कांग्रेस पर इस संगठन को संरक्षण देन का आरोप भी लगाया.
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों से ‘‘संबंध’’ होने के कारण बुधवार को पीएफआई व उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर पांच वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया. विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं. पीएफआई पर प्रतिबंध इस तथ्य को दोहराता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार उन ताकतों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करती है, जिनका उद्देश्य देश में शांति व स्थिरता को बाधित करना होता है.’’
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है. उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश इस निर्णय का स्वागत करता है.’’ केरल में पीएफआई की सक्रियता और उसकी गतिविधियों के खिलाफ मुरलीधरन प्राय: आवाज उठाते रहे हैं. पीएफआई पर प्रतिबंध को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार देर रात जारी एक अधिसूचना में कहा गया इस संगठन के कुछ संस्थापक सदस्य ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ (सिमी) के नेता हैं और पीएफआई के जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से भी जुड़े हैं. जेएमबी और सिमी दोनों ही प्रतिबंधित संगठन हैं.
अधिसूचना में कहा गया कि पीएफआई के ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ (आईएसआईएस) जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंधों के भी कई मामले सामने आए हैं. अधिसूचना में दावा किया गया कि पीएफआई और उसके सहयोगी या मोर्चे देश में असुरक्षा होने की भावना फैलाकर एक समुदाय में कट्टरता को बढ़ाने के वास्ते गुप्त रूप से काम कर रहे हैं, जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि पीएफआई के कुछ कार्यकर्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं.
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने पीएफआई पर प्रतिबंध का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘यह नया भारत है. अब नरेंद्र मोदी की सरकार है. जो देश के खिलाफ काम करेगा उसका फन कुचला जाएगा.’’ उन्होंने कहा कि देश विरोधी काम करने वाले संगठनों को अब सुधर जाना चाहिए.
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘देश में आतंकी और राष्ट्र की एकता व अखंडता तथा सुरक्षा के लिए खतरा बने संगठन एवं व्यक्ति स्वीकार्य नहीं हैं. उन पर इसी तरह का र्सिजकल स्ट्राइक जारी रहेगा.’’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पीएफआई और उसके अनुषांगिक संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध सराहनीय एवं स्वागत योग्य है.
उन्होंने कहा, ‘‘यह ‘नया भारत’ है, यहां आतंकी, आपराधिक और राष्ट्र की एकता व अखंडता तथा सुरक्षा के लिए खतरा बने संगठन एवं व्यक्ति स्वीकार्य नहीं.’’ भाजपा महासचिव सी टी रवि ने इस कदम के लिए अमित शाह को धन्यवाद देते हुए कहा कि ‘‘पीएफआई को कांग्रेस ने पोषित किया.’’ उन्होंने कहा कि पीएफआई और कुछ नहीं बल्कि सिमी का ‘‘एक अवतार’’ है और इसके कई आतंकवादी संगठनों से संबंध हैं ताकि देश में सामाजिक अशांति फैले.
पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने प्रतिबंध लगाए जाने को देशहित में की गई कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल ऐसे हैं जो इस कार्रवाई को लेकर भी सियासी नफा-नुकसान का गुणा-भाग कर रहे हैं. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘लोकतंत्र के खिलाफ हिंसक साजिश के तहत गतिविधियां चला रहे कुछ संगठनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. देश की सुरक्षा हमारी ताकत है… यह कार्रवाई देश की सुरक्षा और देशहित में है.’’
नकवी ने कहा, ‘‘अफसोस की बात है कि पहले कुछ राजनीतिक दल ऐसे लोगों को प्रश्रय दे रहे थे. ऐसे ही लोग अब भी उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. यही लोग कभी र्सिजकल स्ट्राइक पर सवाल करेंगे. जब इस तरह के संगठनों (पीएफआई) पर कार्रवाई होती है तो ये लोग इनके साथ खड़े होते हैं.’’
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस कदम की तुलना जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने से की और कहा, ‘‘यह केंद्र सरकार द्वारा उचित समय पर लिया गया मजबूत निर्णय है. आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की मोदी सरकार की नीति को यह दर्शाता है.’’ उन्होंने भी कांग्रेस पर पीएफआई को संरक्षण देने का आरोप लगाया और दावा किया कि राजस्थान में उसके शासन काल में पीफएआई को बढ़ावा दिया गया जबकि कर्नाटक में उसके राज में पीएफआई से संबंधित मामले वापस लिए गए.
महाराष्ट्र में ‘कुछ गंभीर’ करने की साजिश रच रहा था पीएफआई : मुख्यमंत्री शिंदे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हिंसा के कई मामलों में कथित तौर पर शामिल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को प्रतिबंधित करने के केंद्र सरकार के फैसले का बुधवार को स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रकाश में आया है कि संगठन राज्य में ‘‘कुछ गंभीर’’ करने की साजिश रच रहा था.
शिंदे ने नासिक में संवाददाताओं को बताया कि संगठन के सदस्यों ने पुणे में भी शांतिभंग करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया. उन्होंने पीएफआई और उसके कुछ सहयोगी संगठनों को पांच साल के लिये प्रतिबंधित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया.
पुणे में पीएफआई के एक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसे लोगों को देश में रहने का अधिकार नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय उनका ध्यान रखेगा. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए गए. संगठन हाल में आतंकी वित्त पोषण, हत्याओं, संविधान का अपमान करने, सामाजिक सद्भाव और देश की एकता को भंग करने में सक्रिय हुआ. यह भी सामने आया है कि संगठन महाराष्ट्र में भी कुछ गंभीर साजिश रच रहा था.’’
उन्होंने कहा, ‘‘असमाजिक तत्वों की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने और समाज को विभाजित करने की साजिश कभी कामयाब नहीं होगी.’’ शिंदे ने कहा कि यह देशभक्तों का राष्ट्र है और देश के खिलाफ बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और ‘‘बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’’.
वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज कहा कि यह साबित करने के लिये पर्याप्त साक्ष्य हैं कि केंद्र द्वारा पांच साल के लिये प्रतिबंधित पीएफआई समाज में हिंसा के बीज बो रहा था. फडणवीस के पास गृह मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस संगठन का उद्देश्य अफवाह फैलाना और हिंसा भड़काना था.
फडणवीस ने कहा, ‘‘सरकार और जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं कि पीएफआई हिंसा के बीज बो रहा था. अफवाह फैलाना, धन जुटाना और हिंसा भड़काना उनका लक्ष्य था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर के एक राज्य में एक मस्जिद को गिराए जाने का एक फर्जी वीडियो हिंसा भड़काने के इरादे से प्रसारित किया गया था. अमरावती में ऐसी घटना हम पहले भी देख चुके हैं. बाद में पता चला कि वीडियो बांग्लादेश का है.’’ फडणवीस ने कहा कि केरल पहला राज्य है जिसने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. इसी तरह की मांग बाद में देश के अन्य राज्यों द्वारा भी की गई.
केरल में पीएफआई की ‘बर्बरता’ का शिकार हुए प्रोफेसर ने कहा, कभी-कभी मौन रहना बेहतर होता है
करीब 12 साल पहले ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के कार्यकर्ताओं की ‘‘बर्बरता’’ का शिकार हुए प्रोफेसर टी.जे. जोसेफ ने बुधवार को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पर केंद्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. जोसेफ ने कहा कि हमेशा बोलने के बजाय कभी-कभी मौन रहना बेहतर होता है. गौरतलब है कि कथित ईशनिंदा के लिए करीब 12 साल पहले पीएफआई कार्यकर्ताओं ने जोसेफ का हाथ काट डाला था.
पीएफआई पर प्रतिबंध लगाए जाने से जुड़े संवाददाताओं के सवालों पर प्रोफेसर ने कहा कि वह देश के एक नागरिक के रूप में केंद्र सरकार के कदम के बारे में स्पष्ट राय रखते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता क्योंकि वह इस मामले में ‘‘पीड़ित’’ हैं. जोसेफ ने कहा कि पीएफआई पर प्रतिबंध एक राजनीतिक निर्णय और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है और इस घटनाक्रम पर राजनेताओं, संगठनात्मक प्रतिनिधियों और ऐसे अन्य तटस्थ लोगों को प्रतिक्रिया देनी चाहिए.
खरगोन में रामनवमी के दंगे के बाद पीएफआई ने वसूला था 55 लाख का चंदा : पुलिस
केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने खरगोन में 10 अप्रैल को रामनवमी की शोभायात्रा के बाद हुए दंगे को लेकर एक समुदाय के लोगों को कथित रूप से भड़काने की कोशिश की थी और दंगा प्रभावितों की मदद के नाम पर उनसे करीब 55 लाख रुपये का चंदा भी वसूला था. पुलिस के एक आला अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी.
इंदौर में पुलिस की खुफिया शाखा के उपायुक्त रजत सकलेचा ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ को बताया,‘‘हमें जांच में पता चला है कि खरगोन दंगे के बाद स्थानीय स्तर पर तेजी से हरकत में आए पीएफआई ने एक समुदाय के लोगों को भड़काने की कोशिश की थी और उनसे करीब 55 लाख रुपये का चंदा भी वसूला था. दंगा प्रभावितों की मदद के नाम पर यह चंदा वसूला गया था.”
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर में पीएफआई की गतिविधियों की शुरुआत हालांकि 2008 से हुई थी, लेकिन 2020 के दौरान संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) तथा राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के खिलाफ शहर में हुए विरोध प्रदर्शनों की कमान संभालने के चलते यह संगठन लोगों के बीच अचानक चर्चा में आ गया था.
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि इन विरोध प्रदर्शनों के बाद इंदौर में अलग-अलग संगठनों की आड़ में पीएफआई की विद्वेषपूर्ण गतिविधियां तेज हुई थीं और संगठन समूचे पश्चिमी मध्यप्रदेश, खासकर राजस्थान की सीमा से सटे जिलों में अपना जाल फैलाने की कोशिश कर रहा था. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के चूड़ी विक्रेता तस्लीम अली (25) की इंदौर में 22 अगस्त 2021 को भीड़ में शामिल लोगों द्वारा पिटाई के बाद भी पीएफआई ने एक समुदाय के लोगों को कथित रूप से भड़काने की कोशिश की थी.
सकलेचा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने से पहले, इंदौर में पीएफआई के साथ औपचारिक रूप से जुड़े लोगों की तादाद 70 से 75 के बीच थी और यह संगठन सोशल मीडिया के दुरुपयोग से खासकर कम पढ़े-लिखे लोगों और दिहाड़ी पर छोटे-मोटे काम करने वाले लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करता था.
राष्ट्र विरोधी समूहों के लिए एक संदेश है पीएफआई पर प्रतिबंध: बोम्मई
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार को पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि इस कदम से सभी ‘‘राष्ट्र विरोधी तत्वों’’ को यह संदेश जाएगा कि इस देश में उनके लिए कोई जगह नहीं है. पीएफआई पर आतंकी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है. बोम्मई ने कहा कि राज्य में पीएफआई की गतिविधियों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा.
मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा, ‘‘इस देश के लोगों और विपक्षी दलों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही थी. पीएफआई, सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आॅफ इंडिया) और केएफडी (कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी) का अवतार है. ये राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और ंिहसा में लिप्त थे.’’ बोम्मई ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पीएफआई के आका देश के बाहर हैं और उसके कुछ पदाधिकारी प्रशिक्षण लेने के लिए सीमापार तक जा चुके हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएफआई सभी तरह की असामाजिक गतिविधियों में शामिल रहने वाला संगठन है और इस पर प्रतिबंध लगाने का समय आ गया था.
उन्होंने कहा, ‘‘इसकी पृष्ठभूमि को लेकर बहुत काम किया गया, सूचनाएं एकत्र की गईं और मामला बनाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत सरकार ने सही निर्णय लिया है.’’ बोम्मई ने कहा, ‘‘यह सभी राष्ट्र विरोधी समूहों के लिए एक संदेश है कि इस देश में उनके लिए कोई जगह नहीं है. मैं लोगों से भी आग्रह करता हूं कि वे ऐसे संगठनों से ना जुड़ें.’’ कर्नाटक में पीएफआई के मजबूत होने और उसके लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में बोम्मई ने कहा, ‘‘जो कुछ भी जरूरी होगा वह किया जाएगा.’’ केंद्र सरकार ने एक कड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया और उसके कई सहयोगी संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया. उन पर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी समूहों के साथ “संबंध” होने का आरोप है.
पीएफआई पर प्रतिबंध को लेकर भी कुछ लोग सियासी नफा-नुकसान का गुणा-भाग कर रहे : नकवी
पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ‘पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया’ (पीएफआई) और उसके कुछ अन्य सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जाने को देशहित में की गई कार्रवाई करार देते हुए बुधवार को कहा कि कुछ राजनीतिक दल ऐसे हैं जो इस कार्रवाई को लेकर भी सियासी नफा-नुकसान का गुणा-भाग कर रहे हैं.
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘लोकतंत्र के खिलाफ ंिहसक साजिश के तहत गतिविधियां चला रहे कुछ संगठनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. देश की सुरक्षा हमारी ताकत है… यह कार्रवाई देश की सुरक्षा और देशहित में है.’’ नकवी ने कहा, ‘‘अफसोस की बात है कि पहले कुछ राजनीतिक दल ऐसे लोगों को प्रश्रय दे रहे थे. ऐसे ही लोग अब भी उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. यही लोग कभी र्सिजकल स्ट्राइक पर सवाल करेंगे. जब इस तरह के संगठनों (पीएफआई) पर कार्रवाई होती है तो ये लोग इनके साथ खड़े होते हैं.’’
उन्होंने कहा, ‘‘ अगर सरकार ने शैतानी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की है तो देश की सुरक्षा के लिए की है. अफसोस की बात है कि कुछ लोग इसमें भी सियासी नफा-नुकसान का गुणा-भाग कर रहे हैं.’’ सरकार ने आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण ‘पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया’ (पीएफआई) और उससे संबद्ध अन्य संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है.
आतंकवाद रोधी कानून ‘यूएपीए’ के तहत ‘रिहैब इंडिया फाउंडेशन’ (आरआईएफ), ‘कैंपस फ्रंट आॅफ इंडिया’ (सीएफआई), ‘आॅल इंडिया इमाम काउंसिल’ (एआईआईसी), ‘नेशनल कॉन्फेडरेशन आॅफ ह्यूमन राइट्स आॅर्गेनाइजेशन’ (एनसीएचआरओ), ‘नेशनल विमेंस फ्रंट’, ‘जूनियर फ्रंट’, ‘एम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन’ और ‘रिहैब फाउंडेशन’(केरल) को भी प्रतिबंधित किया गया है.