काली पोस्टर विवाद: न्यायालय ने फिल्मकार मणिमेकलाई का संरक्षण बढ़ाया

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई के आगामी वृत्तचित्र में देवी काली को धूम्रपान करते दिखाये जाने वाले विवादित पोस्टर को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज कई प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें कठोर कार्रवाई के खिलाफ प्रदान की गई राहत सोमवार को बढ़ा दी.

शीर्ष न्यायालय ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उनके खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों को आपस में जोड़ दिया और उन्हें जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा तथा न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने प्राथमिकयों को रद्द करने से इनकार कर दिया, लेकिन फिल्मकार की वकील इंदिरा उन्नियार को इन्हें रद्द कराने के लिए दिल्ली की एक अदालत का रुख करने की छूट दे दी.

अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भार्टी ने केंद्र की ओर से न्यायालय में पेश होते हुए कहा कि फिल्मकार किसी भी संबद्ध अदालत में पेश नहीं हुई और यह न्यायालय प्राथमिकियों के सिलसिले में अदालत में पेश होने का उन्हें निर्देश दे सकता है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह एक फिल्म के बारे में है और कहीं ना कहीं वह एक अमेरिकी नागरिक हैं तथा जरूरत पड़ने पर वह डिजिटल माध्यम से अदालत में पेश हो सकती हैं.’’ उल्लेखनीय है कि शीर्ष न्यायालय ने मणिमेकलाई को विवादित पोस्टर को लेकर विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों के सिलसिले में 20 जनवरी को अंतरिम राहत प्रदान की थी.

न्यायालय ने केंद्र के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों को उनकी याचिका पर नोटिस भी जारी किये थे.
मणिमेकलाई की वकील ने दलील दी कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं था और फिल्म का उद्देश्य देवी को एक समावेशी रूप में चित्रित करना था. मणिमेकलाई ने अपनी वकील उन्नियार के मार्फत दायर याचिका में कहा है कि एक रचनात्मक फिल्मकार के तौर पर उनकी कोशिश किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं, बल्कि समावेशी देवी की छवि को चित्रित करना था.

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