ब्रिक्स को महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा पर काम करना चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी

रियो डी जिनेरियो. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स समूह के वार्षिक शिखर सम्मेलन में कहा कि समूह के देशों को महत्वपूर्ण खनिजों और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी देश इन संसाधनों का उपयोग अपने “स्वार्थी लाभ” के लिए या दूसरों के खिलाफ “हथियार” के रूप में न करे.

बहुपक्षवाद, वित्तीय मामलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आयोजित सत्र में रविवार को अपने संबोधन में मोदी ने पारर्दिशता बनाए रखने और दुरुपयोग को रोकने के वास्ते एआई के उपयोग के लिए वैश्विक मानक बनाने का भी आ”ान किया. महत्वपूर्ण खनिजों पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी, इन महत्वपूर्ण संसाधनों के निर्यात पर चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों तथा इस क्षेत्र में उसकी अपारदर्शी नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर जताई जा रही चिंता के बीच आई है.

मोदी ने कहा, “हमें महत्वपूर्ण खनिजों और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है. यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि कोई भी देश इन संसाधनों का उपयोग अपने स्वार्थ के लिए या दूसरों के खिलाफ हथियार के रूप में न करे.” लिथियम, निकल और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को इले्ट्रिरक वाहनों (ईवी), ड्रोन और बैटरी भंडारण सहित उच्च-स्तरीय प्रौद्योगिकी उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. चीन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में मोदी ने कहा कि इससे रोजमर्रा की जिंदगी में काफी सुधार आ सकता है, लेकिन दूसरी ओर इससे जोखिम, नैतिकता और पूर्वाग्रह के बारे में चिंताएं भी पैदा हुई हैं. प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत अगले साल “एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन” का आयोजन करेगा.

मोदी ने कहा, “हमारा मानना ??है कि चिंताओं के समाधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने को एआई शासन में समान महत्व दिया जाना चाहिए. हमें जिम्मेदार एआई के लिए मिलकर काम करना चाहिए.” उन्होंने कहा, “ऐसे वैश्विक मानक बनाए जाने चाहिए, जो डिजिटल सामग्री की प्रामाणिकता को सत्यापित कर सकें, ताकि हम सामग्री के स्रोत की पहचान कर सकें और पारर्दिशता बनाए रख सकें तथा दुरुपयोग को रोक सकें.” समुद्र तटीय ब्राजील के इस शहर में आयोजित शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के शीर्ष नेताओं ने विश्व के समक्ष उपस्थित विभिन्न चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया.

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लिया. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल-फतह अल-सिसी भी सम्मेलन में शामिल नहीं हुए. ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है, क्योंकि यह विश्व की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘ग्लोबल साउथ’ की मदद के लिए ब्रिक्स द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी चर्चा की.

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संर्दिभत करने के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा, “ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के रूप में, हमने ग्लोबल साउथ के देशों की विकास आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प पेश किया है.” साथ ही उन्होंने कहा कि एनडीबी को मांग-संचालित दृष्टिकोण, दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और स्वस्थ क्रेडिट रेटिंग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”हमारी आंतरिक प्रणालियों को मजबूत करने से सुधारित बहुपक्षवाद के लिए हमारे आ”ान की विश्वसनीयता और बढ़ेगी.” मोदी ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की ब्रिक्स से कुछ विशेष अपेक्षाएं और आकांक्षाएं हैं और इन्हें पूरा करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, भारत में स्थापित ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच, कृषि अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने के लिए एक मूल्यवान पहल है.” प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान भंडार के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा, जो ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम कर सकता है.

उन्होंने कहा, “ग्लोबल साउथ को हमसे बहुत उम्मीदें हैं. उन्हें पूरा करने के लिए हमें “उदाहरण के द्वारा नेतृत्व’ के सिद्धांत का पालन करना होगा.” उन्होंने कहा, “भारत अपने साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने सभी साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.” मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का 2024 में विस्तार किया गया, जिसके तहत मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को समूह में शामिल किया गया. इंडोनेशिया 2025 में ब्रिक्स में शामिल हुआ. इसके 17वें शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों, भागीदारों और विशेष आमंत्रित देशों ने भाग लिया.

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