सीमा सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक और पारंपरिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर रही बीएसएफ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 08 Jan 2025 10:41 PM
सीमा सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक और पारंपरिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर रही बीएसएफ

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पेट्रापोल/कोलकाता. भारत और बांग्लादेश के बीच अंतराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करते हुए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने मादक पदार्थ और मानव तस्करी को रोकने के लिए पारंपरिक तरीकों और अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच 913 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा करने वाले बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर ने सुरक्षा चौकियों और पैदल गश्त जैसे पारंपरिक तरीकों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का व्यापक रूप से उपयोग किया है.

उन्होंने कहा कि दक्षिण बंगाल फ्रंटियर द्वारा संरक्षित 913 किलोमीटर लंबी सीमा के लगभग आधे हिस्से पर अभी बाड़ लगाया जाना बाकी है. अधिकारी ने कहा कि दुर्गम इलाकों और नदी क्षेत्रों में मादक पदार्थ और मानव तस्करी को रोकने के लिए बल द्वारा कई तरीके अपनाए गए हैं.

वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि जहां बाड़ लगाने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, वहां हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए स्थायी कैमरों के अलावा ‘पैन, टिल्ट और जूम’ (पीटीजेड) कैमरे भी बड़ी संख्या में लगाए गए हैं. ‘नाइट विजन’ सुविधाओं से लैस इन कैमरों में सेंसर लगे हैं, जो सीमा पर किसी भी मानवीय गतिविधि का पता लगा सकते हैं.

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के पेट्रापोल में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने बताया कि नियंत्रण कक्षों के माध्यम से जानकारी प्रहरी तक पहुंचाई जाती है. पेट्रापोल कोलकाता से लगभग 110 किलोमीटर दूर है. उन्होंने कहा कि पेट्रापोल भूमि सीमा शुल्क स्टेशन के पास बीएसएफ के एक बटालियन कमान क्षेत्र में 32 किलोमीटर लंबी सीमा में से केवल 11 किलोमीटर क्षेत्र पर बाड़ लगाई गई है जबकि शेष क्षेत्र की सुरक्षा पारंपरिक व अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाती है. अधिकारी ने कहा, ” मादक पदार्थ और मानव तस्करी को रोकने के लिए सुरक्षार्किमयों, प्रौद्योगिकी और संसाधनों का उचित तरीके से उपयोग किया जाता है.”

बीएसएफ को ‘फ्लैग मीटिंग’ में बीजीबी के साथ मतभेद सुलझने की उम्मीद: अधिकारी

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बुधवार को भारत-बांग्लादेश सीमा पर वर्चस्व बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और कहा कि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के साथ हाल के मतभेदों को ‘फ्लैग मीटिंग’ के जरिये सुलझाया जाएगा. बीएसएफ के अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ लगाने का काम बीजीबी की आपत्ति पर अस्थायी रूप से रोक दिया गया था और इसके बाद यह कार्य शांतिपूर्ण ढंग से फिर से शुरू हो गया है.

बीएसएफ की पूर्वी कमान के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) रवि गांधी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”क्षेत्रीय वर्चस्व कायम है और बीएसएफ मुस्तैदी से सीमाओं की रक्षा कर रही है. समय-समय पर जमीनी स्तर पर मतभेद होते हैं, लेकिन उन मुद्दों को ‘फ्लैग मीटिंग’ में सुलझा लिया जाएगा.” मालदा के कालियाचक-तृतीय ब्लॉक के सुकदेवपुर इलाके में बाड़ लगाने का काम सोमवार को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था, क्योंकि बीजीबी ने दावा किया था कि यह काम बांग्लादेशी क्षेत्र में किया जा रहा है. हालांकि, इस मुद्दे को बातचीत के जरिये सुलझा लिया गया और मंगलवार को बिना किसी रुकावट के काम फिर से शुरू हो गया.

एडीजी गांधी ने मंगलवार को कहा, ”बाड़ लगाने का काम अब बिना किसी समस्या के जारी है. बीजीबी जवानों और कमांडरों के बीच जमीनी स्तर पर गलतफहमी दूर हो गई है.” बीएसएफ ने बांग्लादेशी मीडिया में आई उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि बीजीबी ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर भारतीय भूमि के पांच किलोमीटर के हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है.

बीएसएफ के एक बयान में कहा गया है, ”संबंधित क्षेत्र भारतीय सीमा में उत्तर 24 परगना जिले के बागदा ब्लॉक के रणघाट गांव में है.” बीएसएफ ने कहा, ”अंतरराष्ट्रीय सीमा कोडालिया नदी के किनारे है, जिसे दोनों ओर संदर्भ स्तंभों द्वारा सीमांकित किया गया है. बीएसएफ का ड्यूटी पैटर्न दशकों से अपरिर्वितत रहा है.” बीएसएफ ने उन दावों का भी खंडन किया कि बीजीबी र्किमयों ने मोटर चालित नौकाओं और एटीवी का उपयोग करके क्षेत्र में 24 घंटे गश्त शुरू कर दी है.

By Yogesh Kumar Sahu