
अमृतसर/रिशड़ा/लाहौर. भारत और पाकिस्तान ने बुधवार को क्रमश: सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा बंधक बनाए गए एक-एक जवान को दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक दूसरे के सुपुर्द किया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. पाकिस्तान ने बीएसएफ के जवान पूर्णम कुमार शॉ को पंजाब में अटारी-वाघा सीमा पर भारत को सौंप दिया. उन्हें पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद 23 अप्रैल को पाकिस्तान रेंजर्स ने पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से पकड़ लिया था.
अधिकारियों ने कहा कि वहीं, पाकिस्तान के एक रेंजर को उसके हवाले कर दिया गया जिसे बीएसएफ ने तीन मई को राजस्थान में सीमा क्षेत्र से पकड़ा था. बीएसएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान रेंजर्स ने सुबह 10.30 बजे कांस्टेबल शॉ को अमृतसर जिले में अटारी स्थित संयुक्त जांच चौकी पर (पाकिस्तान में वाघा सीमा के सामने) उसके हवाले कर दिया. बीएसएफ ने शॉ की एक तस्वीर जारी की जिसमें उन्हें दाढ़ी, मूंछ और बिखरे बालों के साथ देखा जा सकता है. वह गोल गले की हरे रंग की टीशर्ट पहने हुए हैं.
बीएसएफ प्रवक्ता ने कहा, ”आज सुबह 10.30 बजे कांस्टेबल पूर्णम कुमार शॉ को अटारी-वाघा सीमा पर पाकिस्तान द्वारा बीएसएफ के सुपुर्द कर दिया गया है.” प्रवक्ता ने कहा कि शॉ 23 अप्रैल को फिरोजपुर सेक्टर में अभियान संबंधी ड्यूटी करते हुए पूर्वाह्न करीब 11.50 बजे अनजाने में पाकिस्तान के क्षेत्र में चले गए थे और पाक रेंजर्स ने उन्हें पकड़ लिया.
अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि जवान की पूरे शरीर की जांच और मेडिकल परीक्षण किया जाएगा जिसके बाद उनकी काउंसलिंग होगी और ‘डीब्रीफिंग’ सत्र में बीएसएफ के अधिकारी उन्हें रेंजर्स द्वारा 21 दिन तक पकड़कर रखने के बारे में ‘प्रासंगिक प्रश्न’ पूछेंगे. उन्होंने कहा कि 24वीं बीएसएफ बटालियन के इस जवान को सक्रिय ड्यूटी में शामिल नहीं किया जाएगा और वह बीएसएफ के पंजाब फ्रंटियर की आधिकारिक जांच में भी शामिल होंगे, जिसमें रेंजर्स द्वारा उन्हें पकड़े जाने के घटनाक्रम की जांच की जाएगी और खामियों का पता लगाया जाएगा. प्रवक्ता ने कहा कि स्थापित प्रोटोकॉल के तहत शांतिपूर्ण तरीके से सीमा पर जवान को बल के सुपुर्द किया गया.
उन्होंने कहा, ”पाकिस्तान रेंजर्स के साथ नियमित फ्लैग बैठकों और अन्य संचार चैनलों के माध्यम से बीएसएफ के सतत प्रयासों के कारण बीएसएफ कांस्टेबल की वापसी संभव हुई है.” अधिकारियों ने बताया कि जवान ‘किसान गार्ड’ का हिस्सा थे, जिसे सीमा पर बाड़ के पास अपनी जमीन जोतने वाले भारतीय किसानों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, जवान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर ‘गलत अनुमान’ लगाया और पास के एक पेड़ के नीचे आराम करने चले गए, जहां से उन्हें रेंजर्स ने पकड़ लिया.
शॉ पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिसड़ा के रहने वाले हैं और उनकी पत्नी पिछले कुछ दिन से बीएसएफ अधिकारियों और प्रेस से अपने पति के ठिकाने का पता लगाने और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य हमले के मद्देनजर उनकी जल्द रिहाई की मांग कर रही थीं.
बंगाल: पाकिस्तान की हिरासत से रिहाई के बाद बीएसएफ जवान के गृहनगर में खुशी का माहौल
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कांस्टेबल पूर्णम कुमार शॉ को पाकिस्तानी प्राधिकारियों द्वारा रिहा करने की सूचना मिलने के बाद पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिशड़ा के लोगों में खुशी का माहौल है. पाकिस्तान के अधिकारियों द्वारा सुबह करीब 10.30 बजे अटारी-वाघा सीमा पर बीएसएफ कांस्टेबल को भारतीय अधिकारियों को सौंपने की घोषणा के बाद शॉ के घर और पड़ोस में जश्न का माहौल बन गया.
शॉ के घर पर प्रार्थनाओं और मिठाइयों के वितरण के बीच जवान के परिवार के सदस्य अपनी खुशी के आंसू नहीं रोक पाए.
पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद 23 अप्रैल को शॉ फिरोजपुर सेक्टर में अभियान संबंधी ड्यूटी करते हुए अनजाने में पाकिस्तान के क्षेत्र में चले गए थे और पाक रेंजर्स ने उन्हें पकड़ लिया था. उसके बाद के दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ने के बाद उनके परिवार और पड़ोसियों की चिंता और बढ़ गई.
शॉ की गर्भवती पत्नी रजनी अपने पति की रिहायी के लिए व्यक्तिगत रूप से अपील करने के लिए पठानकोट और फिरोजपुर भी गई थीं. उन्होंने देशवासियों और नेताओं को धन्यवाद दिया, जो कठिन समय में उनके साथ खड़े रहे. रजनी ने कहा, “स्थानीय पार्षद, सांसद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार मेरे संपर्क में थे और मुश्किल दिनों में मुझे भरोसा दिलाते रहे. मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देती हूं जो हमारे परिवार के साथ खड़े रहे.” जवान के पिता भोलानाथ शॉ ने कहा, ”आज हम जश्न मना रहे हैं. हम कई दिनों से चैन से सो नहीं पाए हैं, लेकिन अब हमने आखिरकार राहत की सांस ली है. वह (पूर्णम) सुरक्षित है, वह भारत वापस आ गया है और यही सबसे बड़ी बात है.”
भोलानाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा, ”कल रात हमें सूचना मिली कि उसे (पूर्णम) आज रिहा किया जा सकता है. आज सुबह बीएसएफ मुख्यालय ने हमें बताया कि उसे सुबह करीब 10:30 बजे भारत को सौंप दिया गया है. हमें बताया गया है कि हम बाद में उससे फोन पर बात कर पाएंगे.” जवान के पिता ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्र सरकार और बीएसएफ अधिकारियों को मेरे बेटे को वापस घर लाने के लिए उनके अथक प्रयासों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. मैं अब बस अपने बेटे को गले लगाना चाहता हूं.” इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पाकिस्तान की हिरासत से 21 दिन बाद बीएसएफ कांस्टेबल की रिहायी का स्वागत किया और कहा कि जवान की वापसी सुनिश्चित करने के प्रयासों के दौरान वह लगातार उसके परिवार के संपर्क में रहीं.
पाकिस्तान और भारत ने वाघा-अटारी सीमा पर एक-एक कैदी की अदला-बदली की
पाकिस्तान और भारत ने बुधवार को वाघा-अटारी सीमा पर एक-एक कैदी की अदला-बदली की और ये दोनों ही सुरक्षाकर्मी हैं. अधिकारियों ने यहां यह जानकारी दी.उन्होंने बताया कि पाकिस्तान रेंजर्स के मुहम्मदुल्ला को आज सुबह सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया. सरकारी मीडिया के अनुसार, मुहम्मदुल्ला अनजाने में भारत के क्षेत्र में पहुंच गया था और उसे बीएसएफ ने हिरासत में ले लिया.
अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल के अंत में कसूर जिले में सीमा पार करने के बाद हिरासत में लिए गए बीएसएफ कर्मी कांस्टेबल पूर्णम कुमार शॉ को वाघा सीमा पर भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया. उन्होंने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह अदला-बदली हुई.



