जातिगत गणना: कांग्रेस ने कहा, ‘सरकार ने खबर की सुर्खी तो दे दी लेकिन समय सीमा नहीं बताई’

केंद्र ने बिहार चुनाव को ध्यान में रखकर जाति जनगणना का फैसला लिया है: सिद्धरमैया

नयी दिल्ली/बेंगलुरु/मुंबई. कांग्रेस ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के फैसले की घोषणा के बाद बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ”बिना समय सीमा के सुर्खियां बनाने में माहिर हैं”. कांग्रेस ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग के मद्देनजर जाति आधारित गणना पर सरकार के फैसले को ”ध्यान भटकाने का हथकंडा” बताया. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस फैसले को लेकर कई सवाल उठते हैं, खासकर सरकार की मंशा पर. उन्होंने पूछा कि जनगणना कराने की ”समय सीमा क्यों नहीं बताई गई.” पार्टी के 24, अकबर रोड स्थित कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए रमेश ने कहा कि वह ”बिना समय सीमा के सुर्खियां बनाने में माहिर हैं.” रमेश ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा जाति आधारित गणना पर सहमति जताना उसकी ”नैतिक और राजनीतिक हार” को दर्शाता है.

उन्होंने कहा, ”मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पहले दिन से ही जाति आधारित गणना के सख्त खिलाफ रहे हैं. यही कारण है कि कल राहुल गांधी ने कहा कि यह अचानक हुआ घटनाक्रम है.” रमेश ने कहा, ”प्रधानमंत्री ने अपना सबसे बड़ा ‘यू-टर्न (रुख बदलना)’ ले लिया है, उन्होंने जीएसटी, आधार, मनरेगा, खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर ‘यू-टर्न’ लिया था और अब उन्होंने जाति आधारित गणना पर भी ‘यू-टर्न’ ले लिया है. अब हमें पता चला कि (बिहार के मुख्यमंत्री) नीतीश कुमार को ‘यू-टर्न’ लेने की आदत कहां से लगी, ‘यू-टर्न’ की जुगलबंदी है. ‘यू-टर्न’ लेने में प्रधानमंत्री जैसा कोई दूसरा नहीं है.” उन्होंने कहा कि देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा पहलगाम हमला है.

रमेश ने कहा, ”सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि हम आतंकवाद से कैसे निपटें और आतंकवादी हमले के षडयंत्रकर्ता को क्या जवाब दिया जाए. केवल यही मुद्दा है, बाकी सभी चीजें महत्वपूर्ण हैं और उनका समय आएगा लेकिन मुख्य मुद्दा यह है… आप पाकिस्तान को क्या जवाब देंगे, पीड़ित परिवारों को क्या न्याय देंगे.” उन्होंने कहा, ”मैं सोच रहा था कि मोहन भागवत (आरएसएस प्रमुख) की उनसे मुलाकात, सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) और राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) की बैठक का आयोजन पहलगाम हमले के संदर्भ में है. मैं इससे (जाति आधारित गणना के निर्णय से) पूरी तरह आश्चर्यचकित हूं. मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था कि वह ऐसा करेंगे और इसी के कारण मुझे संदेह है कि यह सुर्खियों में जगह बनाने के लिए है और ध्यान भटकाने का हथकंडा है.” आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने की मांग करते हुए रमेश ने पूछा कि मोदी सरकार को ऐसा करने से कौन रोक रहा है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए और आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना तभी सार्थक होगी जब ऐसा किया जाएगा. उन्होंने सरकार से अनुच्छेद 15(5) को लागू करने का भी आग्रह किया, जो निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण से संबंधित है. रमेश ने दिसंबर 2019 की एक मंत्रिमंडल बैठक की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8,254 करोड़ रुपये की लागत से 2021 में भारत की जनगणना कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि उस प्रेस विज्ञप्ति में जाति आधारित गणना का कोई उल्लेख नहीं था.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”हर कोई जानता है कि जनगणना नहीं हुई है और छह साल बीत चुके हैं. हैरानी की बात है कि सरकार ने कल इसकी घोषणा की.” रमेश ने सरकार से जातिगत जनगणना के लिए देश के सामने एक रूपरेखा प्रस्तुत करने का आग्रह किया.
उन्होंने दावा किया कि 2025-26 के बजट में जनगणना आयुक्त के कार्यालय को केवल 575 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. कांग्रेस नेता ने कहा, ”तो वे 575 करोड़ रुपये में किस तरह की जनगणना कराने की योजना बना रहे हैं? तो इरादा क्या है- क्या यह सिर्फ खबर का शीर्षक देने के लिए है? उनका इरादा क्या है? इरादे पर कई सवाल उठते हैं.” रमेश ने कहा, ”आपको 2021 में जनगणना करवानी चाहिए थी. वे कोविड महामारी का हवाला देते हैं, लेकिन 50 से ज्यादा देशों ने कोविड के दौरान जनगणना की. 2023, 2024 में महामारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने इसे नहीं कराया.” उन्होंने कहा कि जब पिछले साल प्रधानमंत्री टीवी चैनलों को साक्षात्कार दे रहे थे, तो उन्होंने जातिगत जनगणना की बात करने वालों को ‘शहरी नक्सली’ कहा था.

रमेश ने कहा, ”वह कब से शहरी नक्सली बन गए? गृह मंत्री अमित शाह कब से शहरी नक्सली बन गए?” उनकी टिप्पणी केंद्र द्वारा यह घोषणा किए जाने के एक दिन बाद आई है कि जातिगत गणना अगली जनगणना का हिस्सा होगी, जिसमें आजादी के बाद पहली बार जाति विवरण शामिल किया जाएगा. कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि 2011 में ग्रामीण और शहरी भारत में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत गणना की गई थी, जिसमें लगभग 25 करोड़ परिवारों से जानकारी एकत्र की गई थी.

रमेश ने कहा, ”यह सच है कि इस सर्वेक्षण में जाति के बारे में जानकारी प्रकाशित नहीं की गई, क्योंकि इसमें कई खामियां पाई गई थीं. मैं खुद मंत्री था और मैंने राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश की थी कि हम प्रत्येक राज्य में पाई गई कमियों को कैसे सुधार सकते हैं. लेकिन बाद में चुनाव आ गए, आचार संहिता लागू हो गई और हम जानकारी प्रकाशित नहीं कर सके.” उन्होंने इस बात को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की कि उस सर्वेक्षण से प्राप्त सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जानकारी का इस्तेमाल मोदी सरकार आज भी कर रही है.

केंद्र ने बिहार चुनाव को ध्यान में रखकर जाति जनगणना का फैसला लिया है: सिद्धरमैया

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जाति जनगणना कराने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने कांग्रेस खासकर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष द्वारा बनाए गए दबाव के कारण भी यह फैसला लिया है.

सिद्धरमैया ने संवाददाता में कहा, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने बुधवार को जिस जल्दबाजी में जाति जनगणना के बारे में फैसला लिया, उससे मुझे विश्वास हो गया कि यह बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनजर किया गया है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा में ढील दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि एससी/एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति का विश्लेषण किया जाना चाहिए और उसके अनुसार उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए. सिद्धरमैया के अनुसार, 50 प्रतिशत की सीमा तय करने का फैसला 1992 में इंद्रा साहनी मामले में दिया गया था. उन्होंने कहा कि मंडल आयोग के बारे में सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ ने आरक्षण पर सीमा तय की थी.

मुख्यमंत्री ने कहा, “आरक्षण की अधिकतम सीमा तय करने के पीछे कोई वैज्ञानिक या संवैधानिक कारण नहीं थे, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत की तय कर दी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आरक्षण की अधिकतम सीमा में संशोधन नहीं कर सकती क्योंकि यह केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल केंद्र सरकार को सिफारिश कर सकती है.

जातिगत गणना के लिए पर्याप्त धन आवंटित करके समय सीमा तय करे केंद्र: खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित अगली जनगणना में जातिगत गणना के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित करने और समय सीमा तय करने का बृहस्पतिवार को सरकार से आग्रह किया. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने जातिगत गणना की मांग की थी और इसके लिए पूरे देश में आंदोलन किया था तथा अब वे खुश हैं कि उन्होंने जो चाहा था वह हासिल कर लिया है.

खरगे ने कहा, ”मैंने दो साल पहले जनगणना के साथ जातिगत गणना कराने को लेकर एक पत्र लिखा था, पर तब वे सहमत नहीं हुए, लेकिन अब सरकार ने जनगणना के साथ जातिगत गणना कराने का निर्णय लिया है. यह अच्छी बात है और हम पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन उन्हें (भाजपा) जवाहरलाल नेहरू पर अनावश्यक रूप से टिप्पणी नहीं करनी चाहिए कि वह (नेहरू) इसके विरोध में थे… आदि-आदि.” यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जन्म से ही आरक्षण के खिलाफ हैं और ऐसे लोग कांग्रेस पर जाति जनगणना के पक्ष में नहीं होने की बात कर रहे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”अगर हम जातिगत गणना के खिलाफ होते तो क्या मैंने दो साल पहले पत्र लिखा होता या फिर हम इसके लिए कई आंदोलन किए होते? वे (भाजपा) लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश करते हैं और यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि केवल वे ही देश का कल्याण चाहते हैं. राजनीतिक उद्देश्यों के लिए वे हमेशा ऐसी चीजें करते हैं….” केंद्र सरकार ने बुधवार को एक अहम फैसला लेते हुए आगामी जनगणना में जातिगत गणना को पारदर्शी तरीके से शामिल करने का फैसला किया.

जाति जनगणना का श्रेय राहुल गांधी को, लेकिन केंद्र के फैसले का समय संदिग्ध : संजय राउत

शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने अगली जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के केंद्र के फैसले का श्रेय कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिया है. राउत ने साथ ही दावा किया कि यह निर्णय पहलगाम आतंकवादी हमले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए लिया गया है.

राउत ने यहां संवाददाताओं से कहा कि जातिगत गणना कराने के केंद्र सरकार के फैसले का समय संदिग्ध है, क्योंकि यह दक्षिणी कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के ठीक एक सप्ताह बाद लिया गया है. राज्यसभा सदस्य ने दावा किया कि यह निर्णय लोगों का ध्यान भटकाने के लिए लिया गया है, जबकि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत सरकार 22 अप्रैल के हमले को लेकर सवालों का सामना कर रही है.

सरकार ने बुधवार को फैसला किया कि आगामी जनगणना में जातिगत गणना को ”पारदर्शी” तरीके से शामिल किया जाएगा. केंद्र सरकार ने, साथ ही जाति आधारित सर्वेक्षण को ”राजनीतिक हथियार” के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया. आजादी के बाद पहली बार जाति विवरण को शामिल करने के इस प्रस्तावित कदम को भाजपा और उसके सहयोगियों ने ‘वास्तव में न्यायसंगत और केंद्रित’ नीतियों को डिजाइन करने में मदद करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सराहा है. यह निर्णय राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) द्वारा लिया गया. राउत ने इस बात पर जोर दिया कि जातिगत गणना सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा, ”बहुजन आबादी के लिहाज से यह फैसला महत्वपूर्ण है. भले ही कैबिनेट ने (जातिगत गणना पर) फैसला लिया हो, लेकिन जनता, देश, दलित, शोषित और वंचित समाज इसका श्रेय राहुल गांधी को दे रहा है.”

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