
नयी दिल्ली. केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने काफी उंचाई पर स्थित इस क्षेत्र को राज्य का दर्जा देने, दो लोकसभा सीट के सृजन और पूरे क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लाने सहित अपनी अन्य मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए सोमवार को यहां सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की.
शीर्ष निकाय लेह (एबीएल) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में लद्दाख के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) से मुलाकात की. विचार-विमर्श से जुड़े एक सूत्र ने अधिक जानकारी दिए बिना कहा, ”बैठक में लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर चर्चा हुई.” प्रतिनिधिमंडल की मांगों में लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, दो लोकसभा सीट (एक कारगिल के लिए और एक लेह के लिए) का सृजन, केंद्र शासित प्रदेश के निवासियों के लिए रोजगार के अवसर और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा शामिल है. लद्दाख में फिलहाल केवल एक लोकसभा क्षेत्र है.
लद्दाख में कोई विधानसभा क्षेत्र नहीं है और पहले यह पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था. जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को पांच अगस्त, 2019 को निरस्त कर दिया गया था और तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है.
पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर विधानसभा में लद्दाख से चार प्रतिनिधि थे. भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र ने पिछले साल दिसंबर में लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था कि वह केंद्रशासित प्रदेश के तेजी से विकास और क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
यह आश्वासन लद्दाख के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के साथ हुई बैठक में दिया गया. गृह मंत्रालय ने राय की अध्यक्षता में लद्दाख के लिए एचपीसी का गठन किया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र की अनूठी संस्कृति और भाषा की रक्षा के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा करना है.



