CG Rent Control: छत्तीसगढ़ में मकान और दुकान किराए पर देने या लेने से पहले जान लें नए नियम….

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 13 Oct 2026 02:06 PM
CG Rent Control: छत्तीसगढ़ में मकान और दुकान किराए पर देने या लेने से पहले जान लें नए नियम….
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नया किराया नियंत्रण कानून, राज्यपाल ने दी मंजूरी; जानिए क्या हैं प्रावधान

छत्तीसगढ़ में मकान और दुकान किराए पर देने तथा लेने के नियमों में बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम को अपनी मंजूरी दे दी है, जिससे नए प्रावधानों को प्रदेश में लागू करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। इस नए कानून के लागू होने से प्रदेश में सालाना 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के किराए कारोबार को अब एक पारदर्शी और कानूनी दायरे में लाया गया है। राज्य सरकार ने मकान मालिकों और किराएदारों, दोनों के अधिकारों की रक्षा करने तथा दोनों पक्षों के बीच किराए, सुरक्षा निधि और मकान खाली कराने को लेकर होने वाले विवादों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

सुरक्षा निधि और किराया वृद्धि के नियम
नए अधिनियम में सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है। अब मकान मालिक किसी भी किराएदार से अधिकतम तीन महीने के किराए के बराबर ही सुरक्षा निधि ले सकेगा। कानून इससे अधिक राशि मांगने पर पूरी तरह रोक लगाता है। इसके अलावा, किराएदार को लिखित किरायानामे की प्रति प्राप्त करने तथा अपने द्वारा किए गए प्रत्येक भुगतान की लिखित रसीद पाने का पूरा अधिकार होगा।
अधिनियम के तहत किराए में होने वाली वार्षिक बढ़ोतरी की सीमा भी तय की गई है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार समझौते में तय वार्षिक वृद्धि 2,000 रुपये तक के मासिक किराए पर अधिकतम पांच प्रतिशत हो सकती है। यदि मासिक किराया 2,000 रुपये से अधिक है, तो वार्षिक वृद्धि अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। किराएदार को तय तारीख पर किराया चुकाना होगा और उपयोग की गई सेवाओं का भुगतान करना होगा।
आवश्यक सेवाएं और बेदखली के प्रावधान
नया कानून किराएदार पर मकान खाली करने का अनुचित दबाव बनाने के लिए बिजली या पानी जैसी अनिवार्य सुविधाएं बंद करने पर सख्त रोक लगाता है। मकान मालिक खुद से ताला बदलकर या बुनियादी कनेक्शन काटकर कब्जा वापस नहीं ले सकता। दूसरी ओर, यदि किराएदार तय समय पर किराया नहीं देता, संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या समझौते में तय उद्देश्य से अलग किसी काम के लिए परिसर का उपयोग करता है, तो मकान मालिक रेंट कंट्रोलर के समक्ष कानूनी बेदखली की मांग कर सकता है।

मकान मालिक पूर्व सहमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए दिन के समय मकान का निरीक्षण कर सकता है। इसके अलावा, खुद के उपयोग के लिए मकान की आवश्यकता होने पर निर्धारित परिस्थितियों में नोटिस अवधि और कानूनी प्रक्रिया का पालन करके संपत्ति वापस मांगी जा सकती है। वहीं किराएदार भी समझौता समाप्त होने या वैध आदेश के बाद अनिश्चितकाल तक कब्जा बनाए नहीं रख सकता।

विवाद निपटारा और जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं
मकान मालिक और किराएदार के बीच कोई विवाद होने पर पीड़ित पक्ष संबंधित रेंट कंट्रोलर के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। रेंट कंट्रोलर के आदेश से असंतुष्ट होने की स्थिति में प्रभावित पक्ष नियमानुसार रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर सकता है। कानूनी विवादों से बचने के लिए दोनों पक्षों को लिखित किरायानामा बनवाने की सलाह दी गई है। इसमें मासिक किराया, सुरक्षा निधि, भुगतान की तारीख, रखरखाव की जिम्मेदारी और मकान खाली करने की शर्तें स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। इसके अलावा, किराएदार की जानकारी स्थानीय पुलिस को देने के लिए संबंधित थाने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण, स्टाम्प ड्यूटी और पुराने किरायानामों पर नए संशोधनों के प्रभाव की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से की जा सकती है।

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