छत्तीसगढ़ 2022 : ईडी की कार्रवाई, कोयला खनन का विरोध, उपचुनाव में कांग्रेस की जीत रही सुर्खियों में

रायपुर. कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में एक प्रभावशाली नौकरशाह की गिरफ्तारी, हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन का विरोध और आदिवासी आरक्षण के लिए मचा घमासान सुर्खियों में रहा. इस वर्ष सत्ताधारी दल को उपचुनावों में जीत भी हासिल हुई.

इसके अलावा इस वर्ष राज्य के असंतुष्ट मंत्री टीएस सिंहदेव ने एक विभाग से त्यागपत्र देकर सबको चौंकाया. वहीं जांजगीर—चांपा जिले में 80 फुट गहरे बोरवेल में फंसे 11 वर्षीय बालक को 104 घंटे चले अभियान के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया. राज्य में गोबर खरीद कर सुर्खियों में आई भूपेश बघेल सरकार ने इस वर्ष गौपालकों से गौमूत्र खरीद और भूमिहीन मजदूरों के लिए वित्तीय सहायता की शुरुआत की.

नक्सल प्रभावित इस राज्य में इस वर्ष कोई भी बड़ी नक्सली घटना नहीं हुई. राज्य के अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा बल नए शिविर स्थापित करने में कामयाब रहे. छत्तीसगढ़ के उत्तर में स्थापित हसदेव अरण्य क्षेत्र में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन लिमिटेड को आवंटित कोयला ब्लॉकों में खनन में आ रही बाधा दूर करने के लिए इस वर्ष मार्च में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद राज्य सरकार ने अप्रैल में इस क्षेत्र में परसा खदान (सरगुजा और सूरजपुर जिले) के लिए 841.538 हेक्टेयर वन भूमि और परसा ईस्ट केंटे बासन फेज-2 (सरगुजा) के लिए 1,136.328 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग की अनुमति दी.

राज्य सरकार के इस फैसले से जैव विविधता से भरपूर इस क्षेत्र के निवासी नाराज हो गए और आदिवासियों समेत स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. वन विभाग ने क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शुरू की थी, लेकिन विरोध के कारण उसका यह प्रयास विफल रहा.
यह मामला तब और उलझ गया जब अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आ गए.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन परियोजनाओं का विरोध कर रहे लोगों को चुनौती दी कि वे पहले अपने घरों की बिजली बंद करें.
राज्य में इस वर्ष के आखिरी महीनों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित कोयला लेवी घोटाले के सिलसिले में लगातार कार्रवाई कर राज्य सरकार को मुश्किल में डाल दिया. ईडी ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में कोयले की ढुलाई में बड़ा घोटाला हो रहा है, जिसमें वरिष्ठ नौकरशाह, कारोबारी, नेता और बिचौलियों के गिरोह कथित तौर पर शामिल हैं.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में अभी तक एक आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई और मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव सौम्या चौरसिया समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी चौरसिया को मौजूदा सरकार में एक प्रभावशाली नौकरशाह माना जाता है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी की कार्रवाई को बदले की राजनीति करार दिया.

राज्य में इस वर्ष आदिवासी आरक्षण का मुद्दा भी छाया रहा. सितंबर में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार का 2012 का वह आदेश खारिज कर दिया जिसमें सरकारी नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण का कोटा बढ़ाकर 58 फीसदी कर दिया गया था.

उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद राज्य में आदिवासियों का कोटा 32 फीसदी से घट कर 20 फीसदी हो गया जिससे नाराज आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तथा दिसंबर में विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित कर आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयकों को पारित किया. राज्य में अब आरक्षण का कोटा 76 प्रतिशत हो गया है.

इधर आरक्षण विधेयकों की मंजूरी को लेकर राजभवन और सरकार के बीच दूरियां बढ़ गईं. राजभवन के अधिकारियों के मुताबिक, राज्यपाल अनुसुईया उइके विधेयकों पर अपनी सहमति तब देंगी जब सरकार यह स्पष्ट करेगी कि यदि इन्हें अदालत में चुनौती दी जाती है तब वह 76 प्रतिशत कोटे का बचाव कैसे करेगी.

राज्य में इस वर्ष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच कथित अनबन एक बार फिर सामने आई जब सिंहदेव ने जुलाई में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया. हालांकि चार अन्य विभाग अभी भी सिंहदेव के पास हैं.
मंत्री सिंहदेव ने हाल ही में कहा था कि वह अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपने भविष्य के बारे में फैसला करेंगे.
राज्य में इस वर्ष रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी खबरों में रही.

अगस्त में झारखंड के संप्रग विधायकों को भाजपा की कथित अवैध खरीद फरोख्त से बचाने के लिए रायपुर के एक रिजॉर्ट में ठहराया गया. लाभ के पद मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विधानसभा से अयोग्य ठहराने की भाजपा की याचिका पर चुनाव आयोग के फैसले के बाद झारखंड में राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सत्ताधारी संप्रग के विधायक रायपुर पहुंचे थे.

इससे पहले जून में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोंिटग की आशंका के बीच हरियाणा के विधायकों को रायपुर भेजा गया था. राज्य में इस वर्ष दो विधानसभा क्षेत्रों खैरागढ़ में अप्रैल में और भानुप्रतापपुर में दिसंबर में उपचुनाव हुए और दोनों में सत्ताधारी दल कांग्रेस को विजय मिली. राज्य में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने लगातार पांच उपचुनावों में जीत हासिल की है. साल की शुरुआत में कोविड महामारी की वजह से रात में कर्फ्यू समेत कई पाबंदियां लगाई गई. बाद में संक्रमण के मामलों में कमी आ गई.

राज्य में वर्ष 2023 में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इसे ध्यान में रखते हुए, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बदलाव करते हुए राजस्थान से ओम माथुर को डी पुरंदेश्वरी की जगह राज्य इकाई का नया प्रभारी नियुक्त किया है. वहीं पार्टी के सांसद अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. भाजपा ने धरमलाल कौशिक की जगह वरिष्ठ विधायक नारायण चंदेल को विपक्ष का नेता बनाया है. राज्य में इस वर्ष मई में रायपुर विमानतल पर अगस्ता वेस्टलैंड का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे दो पायलटों की मौत हो गई थी.

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