मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, शिवकुमार ने सोनिया, राहुल के खिलाफ प्राथमिकी को लेकर भाजपा पर हमला बोला

अपराध नहीं होने पर भी मामला बना देने के लिए ईडी, भाजपा को नोबेल मिलना चाहिए: सिंघवी

बेंगलुरु/नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस द्वारा नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी तथा अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ”सियासी बदला” लेने का आरोप लगाया.

उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने दिल्ली पुलिस के कदम को “अनुचित” करार दिया और कहा, “उत्पीड़न की भी एक हद होती है.” दिल्ली पुलिस ने नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. यह प्राथमिकी एजेंसी की धन शोधन जांच का हिस्सा है. इस मामले में आरोप लगाया गया है कि गांधी परिवार ने निजी लाभ के लिए अपने पद का “दुरुपयोग” किया.

सिद्धरमैया ने एक सवाल पर पत्रकारों से कहा, “ऐसा राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है. भाजपा सियासी बदला लेने की कोशिश कर रही है.” शिवकुमार ने केंद्र पर “प्रतिशोध की राजनीति” करने का आरोप लगाया. शिवकुमार ने कहा, “उन्हें परेशान करने की कोई जरूरत नहीं है. यह (नेशनल हेराल्ड) सोनिया गांधी या राहुल गांधी की संपत्ति नहीं है. वे पार्टी अध्यक्ष के तौर पर शेयरों के संरक्षक मात्र थे…जवाहरलाल नेहरू के समय से यह वहां है. यह उनकी निजी संपत्ति नहीं है, वे पहले ही घोषित कर चुके हैं. यंग इंडिया या नेशनल हेराल्ड एक राजनीतिक पार्टी से संबंधित है.”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि गांधी परिवार कांग्रेस पार्टी का संरक्षक है. उन्होंने कहा, “वोरा जी (मोतीलाल वोरा) और अहमद पटेल जी के समय में कांग्रेस पार्टी के हितों की रक्षा के लिए निर्णय लिए गए. केसरी जी (सीताराम केसरी) के समय जब पार्टी खत्म हो रही थी, तब हम सभी ने मैडम (सोनिया गांधी) से (कांग्रेस की) जिम्मेदारी संभालने की विनती की थी. उनके नेतृत्व में हमने 10 साल तक इस देश पर शासन किया, जिसमें एक अर्थशास्त्री (मनमोहन सिंह) प्रधानमंत्री थे. कांग्रेस पार्टी आगे ब­ढ़ रही है.”

मामले को लेकर केंद्र सरकार पर “राजनीतिक प्रताड़ना” का आरोप लगाते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “ईष्र्या के कारण ऐसा किया जा रहा. राहुल गांधी ऐसी बातों की कभी परवाह नहीं करते. अगर उन्हें जेल भी भेज दें तो उन्हें कोई परवाह नहीं होगी.” उन्होंने कहा, “यह ठीक नहीं है. मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं. इस प्रतिशोधी रवैये से कोई फ.ायदा नहीं होगा. यह सिफ.र् आपके नैतिक मूल्यों को उजागर करेगा. सड़कों पर, जनता के बीच और चुनावों में राजनीतिक रूप से इसका सामना करें. परेशान करके, विभिन्न संस्थाओं का दुरुपयोग करके नहीं.”

अपराध नहीं होने पर भी मामला बना देने के लिए ईडी, भाजपा को नोबेल मिलना चाहिए: सिंघवी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने सोमवार को कहा कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ‘नेशनल हेराल्ड’ के मामले को फिर से उछाला गया है, जबकि इस मामले में कोई दम नहीं है क्योंकि पैसे या संपत्ति का कोई लेन-देन नहीं हुआ. उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय और भाजपा को इस बात के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए कि जहां कोई अपराध ही नहीं हुआ हो वहां कैसे अपराध का मामला पैदा किया जाता है.

वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा, ”मोदी सरकार सोनिया गांधी जी, राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने के लिए धमकी की राजनीति कर रही है. अर्थव्यवस्था की बर्बादी, देश में फैलती नफरत, बेरोजगारी, विफल विदेश नीति, अमेरिका और चीन की धमकी से देश का ध्यान भटकाने के लिए सरकार नेशनल हेराल्ड का मुद्दा उछाल रही है.” उनका कहना था, ”नेशनल हेराल्ड का मामला इकलौता ऐसा उदाहरण है, जहां एक भी पैसे की लेनदेन या फायदे के बिना धनशोधन का मामला बनाया जा रहा है. इसे तो दुनिया के अजूबों में गिना जाना चाहिए.” सिंघवी के अनुसार, ‘नेशनल हेराल्ड’ की स्वामित्व कंपनी ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) बहुत पुरानी कंपनी है तथा यह ब्रिटिश काल में अंग्रेजों के ख.लिाफ. भी खड़ी थी.

उन्होंने कहा, ”कई बार देखा गया है कि आदर्शवाद पर स्थापित संस्थाएं आर्थिक रूप से बेहतर प्रदर्शन नहीं करतीं. यहीं एजेएल के साथ हुआ. अपने इन्हीं आदर्शों को बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने अलग-अलग समय पर एजेएल को कर्ज दिया, जो एक वक्त 90 करोड़ रुपये हो गया था.” सिंघवी ने कहा, ”ऐसे में फैसला लिया गया कि कैसे इस कंपनी को मज.बूत किया जाए. इसलिए लिए जरूरी था कि कंपनी को कर्ज मुक्त किया जाए. इसीलिए उसके कर्जे को हिस्सेदारी में बदल दिया गया. ये काम देश में हर कंपनी करती है.” वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि एजेएल की शेयर होल्डिंग ‘यंग इंडियन’ नामक इकाई के हाथ में आ गई तथा इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई पैसे लेनदेन हुआ और न ही किसी संपत्ति ली-दी गई.

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