चीन ने ताईवान पर जयशंकर की टिप्पणियों को लेकर भारत के स्पष्टीकरण पर जताई हैरानी

ओवैसी ने चीन को लेकर मोदी सरकार की 'ढुलमुल' नीति पर उठाए सवाल

बीजिंग/हैदराबाद. चीन ने बृहस्पतिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर की इस सप्ताह चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत के दौरान ‘एक-चीन’ नीति से संबंधित कथित टिप्पणियों पर भारत द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर ‘आश्चर्य’ व्यक्त किया. भारत ने मंगलवार को कहा था कि ताईवान पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और उसके साथ नयी दिल्ली के संबंध आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक पहलुओं पर केंद्रित हैं.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ”हम भारत के स्पष्टीकरण से हैरान हैं.” वह जयशंकर की टिप्पणियों पर भारत के स्पष्टीकरण की खबरों पर चीन के आधिकारिक मीडिया के एक सवाल का जवाब दे रही थीं. यह स्पष्टीकरण तब आया जब चीनी विदेश मंत्रालय ने वांग के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर के बयान को गलत तरीके से उद्धृत  करते हुए कहा था कि ताईवान चीन का हिस्सा है. चीनी प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि बीजिंग इस स्पष्टीकरण को ‘तथ्यों के साथ असंगत’ पाता है.

माओ ने कहा, ”ऐसा लगता है कि भारत में कुछ लोगों ने ताईवान के मुद्दे पर चीन की संप्रभुता को कमज.ोर करने और चीन-भारत संबंधों में सुधार को बाधित करने की कोशिश की है. चीन इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है और इसका कड़ा विरोध करता है.” उन्होंने दावा किया, ”मैं इस बात पर ज.ोर देना चाहती हूं कि दुनिया में सिफ.र् एक ही चीन है और ताईवान चीन के भूभाग का एक अविभाज्य हिस्सा है. भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस पर व्यापक सहमति है.” चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन को उम्मीद है कि भारत ‘एक-चीन’ के सिद्धांत का गंभीरता से पालन करेगा, संवेदनशील मुद्दों को उचित ढंग से संभालेगा और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा देगा.

सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचे वांग ने 18 अगस्त को जयशंकर के साथ बातचीत की. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीनी पक्ष ने ताईवान का मुद्दा उठाया था. उसने कहा, ”भारतीय पक्ष ने इस बात पर ज.ोर दिया कि इस मुद्दे पर उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. उसने इस बात पर ज.ोर दिया कि दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, भारत का ताईवान के साथ आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक संबंधों पर केंद्रित रिश्ता है और यह आगे भी जारी रहेगा. भारतीय पक्ष ने कहा कि चीन भी इन क्षेत्रों में ताइवान के साथ सहयोग करता है.” अतीत में, भारत ने ‘एक-चीन’ नीति का समर्थन किया था, लेकिन 2011 के बाद से किसी भी द्विपक्षीय दस्तावेज. में इस नीति को शामिल नहीं किया गया है.

चीन ने अक्सर भारत से ‘एक-चीन’ नीति का पालन करने का आग्रह किया है. भारत और ताईवान के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, फिर भी उनके द्विपक्षीय व्यापार संबंध लगातार बढ़ रहे हैं. ताईवान एक स्वशासी द्वीप है जिसकी आबादी 2.3 करोड़ से अधिक है. यह दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत सेमीकंडक्टर का उत्पादन करता है, जिसमें सबसे उन्नत चिप्स शामिल हैं जो लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, कार के पुर्जे, डेटा सेंटर, लड़ाकू विमान और एआई तकनीकों के लिए आवश्यक हैं.

ओवैसी ने चीन को लेकर मोदी सरकार की ‘ढुलमुल’ नीति पर उठाए सवाल

चीन के विदेश मंत्री वांग यी की दो दिवसीय भारत यात्रा को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बृहस्पतिवार को सवाल उठाया कि क्या भारत-चीन सीमा पर स्थिति 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों से पहले वाली ‘यथास्थिति’ पर लौट आई है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की चीन नीति ‘ढुलमुल’ रही है, जिससे भारत कमजोर हुआ है और 11 साल बाद खराब स्थिति में आ गया है.

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में दावा किया, “क्या सीमा पर स्थिति अप्रैल 2020 वाली यथास्थिति पर लौट आई है? अगर नहीं, तो चीन के साथ इतनी गहरी दोस्ती का ऐलान करते हुए हम अब इसे कैसे हासिल करेंगे?” ओवैसी ने पूछा कि चीन, भारत के साथ जलविद्युत बांधों को पानी देने वाली नदियों से वास्तविक समय के आंकड़े साझा करने पर सहमत क्यों नहीं हुआ और मानवीय आधार पर जानकारी केवल आपात स्थितियों तक ही सीमित क्यों है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या चीन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने से परहेज करने का वादा किया है, जैसा कि हालिया झड़पों के दौरान आरोप लगाया गया था.

ओवैसी ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार ने बीजिंग पर इस बात के लिए जोर नहीं दिया कि अगर वह (चीन) पाकिस्तान के जरिए भारत को नुकसान पहुंचाता रहा तो दोनों देश दोस्त नहीं रह सकते. एआईएमआईएम अध्यक्ष ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि चीन भारत को डीएपी उर्वरक, दुर्लभ मिट्टी और बोरिंग मशीनों की आपूर्ति के लिए आधिकारिक तौर पर सहमत क्यों नहीं हुआ है.

उन्होंने पूछा कि क्या चीन ने भारी व्यापार घाटे को कम करने के लिए अपनी ओर से कदम उठाने का वादा किया है? ओवैसी ने पूछा, “या फिर हम द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ावा देंगे जिससे व्यापार घाटा और बढ़ेगा?” उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को भूभाग से लेकर व्यापार तक कई क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ा है. ओवैसी ने दावा किया कि सरकार के पास जवाब न होना उसकी विफलताओं को दर्शाता है.

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