
नयी दिल्ली/वडोदरा. विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बुधवार को मीडिया को जानकारी देने वालीं कर्नल सोफिया कुरैशी ने कम उम्र में ही देश की सेवा करने की भावना को आत्मसात कर लिया था. उनके परिवार का सेना से जुड़ाव का लंबा इतिहास रहा है.
भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जाने के कुछ ही घंटों बाद ‘प्रेस ब्रीफिंग’ में विदेश सचिव मिसरी के साथ दो महिला अधिकारी-विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार की ओर से शुरुआती बयान दिया. कुरैशी और सिंह ने छह-सात मई की रात को एक बजे से डेढ़ बजे तक निशाना बनाए गए स्थानों के नाम और विवरण साझा किए.
सिग्नल कोर की अधिकारी कुरैशी ने हिंदी में बात की, जबकि भारतीय वायुसेना की हेलीकॉप्टर पायलट सिंह ने अंग्रेजी में विवरण साझा किया. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के लगभग दो सप्ताह बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सैन्य हमले किए गए. वर्ष 2017 में आयोजित एक सामूहिक परिचर्चा में, कुरैशी ने सशस्त्र बलों में अपने सफर के बारे में बताया कि कैसे वह सेना में जाने के लिए प्रेरित हुईं.
कुरैशी ने कहा था, ”एक फौजी के बच्चे के रूप में, मैं सेना के माहौल से वाकिफ थी. मेरी मां चाहती थी कि हम दोनों बहनें सेना में शामिल हों. मैंने इसके लिए आवेदन किया और मैं इसमें शामिल हो गई. मेरे दादा भी सेना में थे, और वह कहते थे ‘यह हमारी, हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि हम सतर्क रहें और अपने देश के लिए खड़े हों और राष्ट्र की रक्षा करें.’ यह गरिमापूर्ण और सम्मानजनक पेशा है.” कुरैशी ने यह भी कहा कि जब वह ”(सैन्य) अकादमी में शामिल हुईं, तो करगिल युद्ध चल रहा था.” उन्होंने 2016 में बहुराष्ट्रीय क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास में सेना के प्रशिक्षण दल का नेतृत्व भी किया था.
रक्षा मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर महिला दिवस पर एक पोस्ट में कुरैशी की तस्वीर साझा करते हुए कहा था, ”2016 में फोर्स18-आसियान प्लस बहुराष्ट्रीय क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास में सेना प्रशिक्षण टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी. वह सभी आसियान प्लस टुकड़ियों में एकमात्र महिला अधिकारी टुकड़ी कमांडर थीं.”
कर्नल सोफिया ने सेना में जाने के लिए पीएचडी और शिक्षण करियर छोड़ दिया था: परिवार
विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ कर्नल सोफिया कुरैशी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में बुधवार सुबह ‘ब्रीफिंग’ की तो गुजरात में उनका परिवार गर्व से झूम उठा. उनके परिवार के अनुसार वडोदरा शहर की कर्नल सोफिया ने सेना में अधिकारी बनने के लिए पीएचडी और शिक्षण कार्य छोड़ दिया था. उनके माता-पिता और भाई मोहम्मद संजय कुरैशी शहर के तंदलजा इलाके में रहते हैं.
संजय ने कहा कि उनकी बहन को दादा और पिता से प्रेरणा मिली जो सेना में थे. संजय ने संवाददाताओं से कहा, ”आप कह सकते हैं कि देशभक्ति हमारे खून में है. स्कूल खत्म करने के बाद सोफिया ने वडोदरा में एम एस यूनिर्विसटी से बायोकेमिस्ट्री में बीएससी और फिर एमएससी किया, क्योंकि वह प्रोफेसर बनना चाहती थी.” संजय के साथ उनके पिता ताजुद्दीन कुरैशी, मां हनीमा और बेटी जारा भी थे.
संजय ने कहा, ”मेरी बहन सहायक व्याख्याता के रूप में विश्वविद्यालय से जुड़ी और साथ ही उसी विषय में पीएचडी भी की, क्योंकि वह प्रोफेसर बनना चाहती थी. इस बीच, उसका चयन शॉर्ट र्सिवस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से भारतीय सेना में हो गया और उसने सेना में शामिल होने के लिए अपनी पीएचडी और शिक्षण करियर छोड़ने का फैसला किया.” उन्होंने कहा कि पूरे परिवार को सोफिया की उपलब्धि पर गर्व है. संजय की बेटी जारा ने भी उनको रोल मॉडल बताते हुए सेना में शामिल होने का मन बनाया है.
कर्नल सोफिया के पिता ताजुद्दीन कुरैशी ने कहा कि उनके परिवार को केवल देश की फिक्र है.
ताजुद्दीन ने कहा, ”मुझे अपनी बेटी पर गर्व है. मेरा परिवार हमेशा ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ (हम राष्ट्र को जीवंत और जागृत बनाए रखेंगे) के सिद्धांत का पालन करता आया है. हम पहले भारतीय हैं और बाद में मुसलमान. हमें सिफ.र् अपने देश की फिक्र है.” भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जाने के कुछ ही घंटों बाद ‘प्रेस ब्रीफिंग’ में विदेश सचिव मिसरी के साथ दो महिला अधिकारी-विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार की ओर से शुरुआती बयान दिया.
कुरैशी और सिंह ने छह-सात मई की रात को एक बजे से डेढ़ बजे तक निशाना बनाए गए स्थानों के नाम और विवरण साझा किए.
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के लगभग दो सप्ताह बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सैन्य हमले किए गए. बाद में, गुजरात सरकार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि कर्नल सोफिया ने 1997 में मास्टर्स किया और फिर सेना की सिग्नल कोर में शामिल हो गईं. सोफिया के पति भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में अधिकारी हैं.
विज्ञप्ति में कहा गया, ”वर्ष 2016 में कर्नल सोफिया ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब वह विदेश में भारतीय सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं. वह ‘फोर्स 18’ में भाग लेने वाले 18 देशों में एकमात्र महिला कमांडर बनीं, जो आसियान प्लस देशों का एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास है.” इसमें कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के तहत छह वर्ष के कार्यकाल के दौरान 2006 में उन्हें कांगो में तैनात किया गया था.
नाम के अनुरूप पायलट बनने की ठान ली थी विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने
विदेश सचिव विक्रम मिसरी और कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बुधवार को संवाददाताओं को जानकारी देने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह एक कुशल हेलीकॉप्टर पायलट हैं, जिन्होंने कई तरह के विमान उड़ाए हैं और जटिल परिस्थितियों में नागरिकों को सुरक्षित निकालने के अभियानों में भाग लिया है. उन्होंने एक बार एक चैनल के कार्यक्रम में बताया था कि किस तरह उनका नाम व्योमिका उनके पायलट बनने की यात्रा में मददगार रहा.
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के सशस्त्र बलों ने मंगलवार देर रात पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा मुरीदके शामिल हैं.
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की हत्या के दो सप्ताह बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सैन्य हमले किए गए. प्रेस ब्रीफिंग में विदेश सचिव मिसरी के साथ दो महिला अधिकारी – विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया मंच पर बैठी थीं जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार की ओर से शुरुआती बयान दिया.
दोनों महिला अधिकारियों ने भारतीय सेना द्वारा निशाना बनाए गए स्थलों के बारे में जानकारी मीडिया से साझा की. व्योमिका के पति भी भारतीय वायु सेना में पायलट हैं. उन्होंने 2023 में एक निजी चैनल द्वारा आयोजित पैनल चर्चा के दौरान साझा किया था कि कैसे उनका नाम-व्योमिका, पायलट बनने की उनकी नियति में सहयोगी रहा.
व्योमिका ने बताया, ”मैं कक्षा-6 में थी तभी एक ‘यूरेका’ क्षण आया. मुझे लगा कि मैं पायलट बनना चाहती हूं और आसमान में उड़ान भरना चाहती हूं. हम नामों के अर्थ को लेकर कक्षा में चर्चा कर रहे थे. तभी कोई चिल्लाया कि ‘तुम व्योमिका हो, जिसका अर्थ है व्योम (आकाश) तुम्हारा है’. उसी दिन से मैं पायलट बनना चाहती थी. यह 1990 के दशक की शुरुआत की बात है.” ‘नारी शक्ति’ के विषय पर हुई उस चर्चा में व्योमिका ने वायु सेना में शामिल होने और पायलट बनने की अपनी यात्रा के बारे में भी बताया.
पायलट बनने का सपना देखने से लेकर 2,500 से अधिक उड़ान घंटे पूरे करने तक, व्योमिका ने देश के कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में कई हेलीकॉप्टरों का परिचालन किया है. इनमें जम्मू कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से लेकर पूर्वोत्तर के दूरदराज के इलाके शामिल हैं.
साल 2020 में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में एक बचाव अभियान का नेतृत्व किया और नागरिकों को बचाने के लिए अत्यंत कठिन परिस्थितियों में उड़ान भरी. वायु सेना अधिकारी ने निजी चैनल को बताया था, ”यह (वायु सेना में) एक शानदार अनुभव रहा है और मुझे यह बहुत पसंद है.”
‘जय हिंद’, ‘नारी शक्ति’: पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए लोगों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की
भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों पर मंगलवार देर रात किये गये हवाई हमलों के बाद लोगों ने बुधवार को सोशल मीडिया पर सुरक्षा बलों की सराहना की और ज्यादातर सोशल मीडिया मंच ‘जय हिंद’ के नारे से पटे दिखाई दिये.
‘एक्स’ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘आतंकवाद’, ‘कर्नल सोफिया कुरैशी’ और ‘नारीशक्ति’ जैसे हैशटैग तेजी से लोकप्रिय हुए. वहीं ‘व्हाट्सएप’ पर लोगों की बातचीत में ‘मॉक ड्रिल’ से लेकर पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकवादी ठिकानों पर भारत के लक्षित हमलों को उजागर करने वाले संदेशों की बाढ़ देखी गयी .
एक व्यक्ति ने ‘एक्स’ पर लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से लेकर हमलों की सटीकता तक. दो महिलाओं द्वारा इसकी जानकारी देना. अब तक का बेहतरीन काम.” एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “यह रोंगटे खड़े कर देने वाला है. भारतीय सशस्त्र बल जय हो, जय हिंद.” ‘न्याय हुआ’, ‘जय हिंद’ से लेकर ‘भारतीय सेना ने कर दिखाया’ जैसे पोस्ट सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर भरे पड़े हैं.
एक अन्य व्यक्ति ने ‘एक्स’ पर कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत का वज्र था, जिसने सटीकता से आतंक के दिल पर प्रहार किया, पहलगाम के घावों का बदला लिया और हमारे देश को लहूलुहान करने की हिम्मत करने वालों के खिलाफ एक सख्त लाल रेखा खींची. जैश-ए-मोहम्मद के चार, लश्कर-ए-तैयबा के तीन और हिजबुल के दो शिविरों पर हमला किया गया. जय हिंद.” सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अभियान का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखने में निहित गहरे प्रतीकात्मकता को उजागर किया.



