प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी : न्यायालय ने थरूर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगायी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 10 Sep 2024 07:58 PM
प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी : न्यायालय ने थरूर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगायी
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को राहत देते हुए उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए की गई एक कथित टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ दर्ज मानहानि के मुकदमे में एक निचली अदालत में कार्यवाही पर मंगलवार को रोक लगा दी. न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति आर माधवन की पीठ ने मामले में दिल्ली सरकार और शिकायतकर्ता एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राजीव बब्बर को नोटिस जारी किया.

थरूर को दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के अनुसार मंगलवार को यहां एक निचली अदालत में पेश होना था. पीठ ने कहा, ”नोटिस जारी किया जाता है और चार सप्ताह में जवाब देने को कहा जाता है. इस बीच, आगे की कार्यवाही पर रोक लगायी जाती है.” थरूर ने उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही निरस्त करने से इनकार करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ 29 अगस्त को शीर्ष न्यायालय का रुख किया था.

सुनवाई के दौरान थरूर की ओर से पेश वकील मोहम्मद अली खान ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता को पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता और राजनीतिक दल के सदस्यों को भी पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता. खान ने कहा कि थरूर की टिप्पणी मानहानि कानून के प्रतिरक्षा खंड के तहत संरक्षित है, जो यह निर्धारित करता है कि अच्छी सोच के साथ दिया गया बयान आपराधिक नहीं है. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने अस्वीकार्य सीमाओं तक मानहानि के किसी मामले में ”पीड़ित व्यक्ति” की परिभाषा का विस्तार किया है.

वकील ने कहा कि थरूर ने टिप्पणी करने से छह साल पहले कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का संदर्भ दिया था. शीर्ष न्यायालय ने हैरानी जतायी कि 2012 में यह बयान अपमानजनक नहीं था जब लेख मूल रूप से प्रकाशित हुआ था. न्यायमूर्ति रॉय ने सुनवाई के दौरान कहा, ”आखिरकार यह एक रूपक है. मैंने समझने की कोशिश की है. यह उस व्यक्ति (मोदी) की अजेयता को दर्शाता है. मुझे नहीं पता कि यहां किसी ने आपत्ति क्यों जताई है.” उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ थरूर के याचिका पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को राजी हो गया था.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानि की शिकायत में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर 16 अक्टूबर 2020 को रोक लगा दी थी और पक्षकारों को 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था. थरूर के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, प्रधानमंत्री के खिलाफ ”शिवलिंग पर बिच्छू” जैसे आरोप ”घृणित एवं निंदनीय” हैं. उसने कहा था कि प्रथम दृष्टया, टिप्पणी से प्रधानमंत्री, सत्तारूढ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ-साथ इसके पदाधिकारियों और सदस्यों की मानहानि हुई है.

निचली अदालत में लंबित मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने का अनुरोध करने वाली थरूर की याचिका को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि के लिए दंड) के तहत उन्हें तलब करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है.

थरूर ने निचली अदालत के 27 अप्रैल, 2019 के आदेश को निरस्त किए जाने का अनुरोध किया था. निचली अदालत ने थरूर को राजीव बब्बर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि शिकायत पर आरोपी के रूप में तलब किया था. उन्होंने दो नवंबर, 2018 को दायर की गई शिकायत को भी रद्द करने का अनुरोध किया था.

बब्बर ने थरूर के खिलाफ निचली अदालत में आपराधिक शिकायत दायर की थी और दावा किया था कि कांग्रेस नेता के बयान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. अक्टूबर 2018 में, थरूर ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक अनाम नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना ”शिवलिंग पर बैठे बिच्छू” से की थी.

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