सेना के खिलाफ टिप्पणी : न्यायालय ने राहुल गांधी को फटकारा लेकिन उनके खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 04 Aug 2025 09:50 PM
सेना के खिलाफ टिप्पणी : न्यायालय ने राहुल गांधी को फटकारा लेकिन उनके खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सोमवार को उनकी आलोचना करते हुए कहा, ”अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बात नहीं कहेंगे.” हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले में लखनऊ की एक अदालत में गांधी के खिलाफ जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया.

पीठ ने कहा, ”आप विपक्ष के नेता हैं. आप संसद में बातें क्यों नहीं कहते हैं, आप सोशल मीडिया पर क्यों कहते हैं?” पीठ ने पूछा, ”आपको कैसे पता चला कि 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन चीनियों ने कब्जा कर ली है? क्या आप वहां थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है?” पीठ ने पूछा, ”बिना किसी सबूत के आप ये बयान क्यों दे रहे हैं? अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो आप ऐसी बात नहीं कहेंगे.” गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अगर विपक्ष के नेता मुद्दे नहीं उठा सकते, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी.

उन्होंने दलील देते हुए कहा, ”अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते, तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते.” पीठ की ”सच्चे भारतीय” टिप्पणी पर सिंघवी ने कहा, ”यह भी संभव है कि एक सच्चा भारतीय कहे कि हमारे 20 भारतीय सैनिकों को पीटा गया और मार डाला गया. यह भी चिंता का विषय है.” इस पर शीर्ष अदालत ने कहा, ”जब सीमा पार संघर्ष होता है, तो क्या दोनों पक्षों में हताहत होना असामान्य बात है?” सिंघवी ने कहा कि गांधी केवल उचित खुलासे और सूचना के दमन पर चिंता जताने की बात कर रहे थे.
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि विपक्ष के एक जिम्मेदार नेता होने के नाते गांधी को ऐसा नहीं कहना चाहिए था क्योंकि ऐसे सवाल उठाने के लिए एक उचित मंच मौजूद है.

सिंघवी ने इस बात से सहमति जताई कि गांधी इस मामले में बेहतर तरीके से टिप्पणी कर सकते थे. उन्होंने कहा कि यह शिकायत याचिकाकर्ता को परेशान करने के प्रयास के अलावा और कुछ नहीं है. सिंघवी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 का हवाला दिया और कहा कि अदालत द्वारा आपराधिक शिकायत का संज्ञान लेने से पहले अभियुक्त की पूर्व सुनवाई अनिवार्य है, जो वर्तमान मामले में नहीं की गई. इसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा और लखनऊ अधीनस्थ अदालत में कार्यवाही पर रोक लगा दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 29 मई को गांधी की याचिका खारिज कर दी थी. गांधी ने समन आदेश और शिकायत को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि यह दुर्भावना से प्रेरित था.

यहां की एक अदालत में दायर अपनी याचिका में शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2022 की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गांधी ने चीन के साथ सीमा गतिरोध के संदर्भ में भारतीय सेना के बारे में कई अपमानजनक टिप्पणियां कीं.
इसके बाद अधीनस्थ अदालत ने गांधी को मुकदमे का सामना करने के लिए अभियुक्त के रूप में तलब किया. गांधी के वकील प्रांशु अग्रवाल ने दलील दी थी कि शिकायत को पढ़ने से ही आरोप मनगढ़ंत प्रतीत होते हैं. उन्होंने यह भी दलील दी थी कि गांधी लखनऊ के निवासी नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस शिकायत पर समन करने से पहले अधीनस्थ अदालत को आरोपों की सत्यता की जांच करनी चाहिए थी और उन्हें तभी समन किया जाना चाहिए था जब आरोप प्रथम दृष्टया मुकदमे के योग्य पाए जाते.

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