कांग्रेस ने कई पूर्व निर्वाचन आयुक्तों को राज्यपाल और मंत्री बनाया : निशिकांत दुबे

नयी दिल्ली. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने कई पूर्व निर्वाचन आयुक्तों को राज्यपाल और मंत्री बनाया, लेकिन अब वह निर्वाचन आयोग की पारर्दिशता की बात कर रही है. उन्होंने कांग्रेस पर संस्थाओं को खत्म करने का आरोप लगाते हुए कहा कि संविधान में 121 बार राष्ट्रपति का उल्लेख है लेकिन ‘‘आश्चर्य है कि एक संशोधन के माध्यम से राष्ट्रपति के सारे अधिकारों को कांग्रेस ने खत्म कर दिया…और रबर स्टांप बना दिया.’’ दुबे ने चुनाव सुधार पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संस्था में कांग्रेस का एक कार्यकर्ता 10 साल तक अध्यक्ष रहा.

उन्होंने कहा कि कई निर्वाचन आयुक्तों को राज्यपाल और मंत्री बनाया गया. उन्होंने कहा, ‘‘टी एन शेषन जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए तो उन्हें अहमदाबाद में भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार बनाया गया और एम एस गिल के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें मंत्री बना दिया जाता है. मदर टेरेसा पर किताब लिखने वाले नवीन चावला को मुख्य निर्वाचन आयुक्त बना दिया गया.’’ भाजपा सांसद ने परिवारवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘‘भाजपा में अध्यक्ष को (अधिकतम) दो कार्यकाल मिलते हैं और अध्यक्ष का एक कार्यकाल तीन साल के लिए होता है. नड्डा जी 2020 में अध्यक्ष बने हैं. उनका कार्यकाल 2026 तक है.’’ दुबे ने तृणमूल कांग्रेस सदस्यों के लिए कहा कि आप अपने यहां देखिये कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री जब से पार्टी की अध्यक्ष बनी हैं, कोई दूसरा व्यक्ति अध्यक्ष नहीं बना और द्रमुक में करूणानिधि के परिवार के अलावा कोई अध्यक्ष नहीं बना है.

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, शरद पवार अपवाद हो सकते हैं क्योंकि उनकी पार्टी में अध्यक्ष उनके परिवार के लोग नहीं हैं. लेकिन आप कांग्रेस को देख लीजिए, गांधी परिवार को छोड़कर कोई दूसरा व्यक्ति अध्यक्ष नहीं बनता और यदि बनता है तो उसकी स्थिति सीताराम केसरी की तरह हो जाती है….’’ उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोंिटग मशीन) 1987 में पायलट परियोजना के नाते तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता राजीव गांधी लेकर आए थे और 1991 में जब नरसिम्हा राव की सरकार बनी तो तय किया गया कि ईवीएम का उपयोग किया जाएगा. दुबे ने कहा कि ‘‘कांग्रेस मोहम्मद अली जिन्ना से लेकर सलमान रुश्दी तक वोट बैंक के तुष्टीकरण में फंसी हुई है और जिस कांग्रेस ने सोमनाथ मंदिर का विरोध किया, उसी ने अयोध्या का विरोध किया. उन्होंने कहा कि आज तक सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी अयोध्या नहीं गए.

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