
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने ‘अग्निपथ’ योजना और कुछ अन्य विषयों का हवाला देते हुए दावा किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भरोसा नहीं किया जा सकता. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 10 साल के शासनकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कई विफलताएं देखने को मिलीं.
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”पिछले 10 वर्षों में यह स्पष्ट रूप से दिखा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भाजपा पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.” रमेश ने कहा, ” अग्निवीर से सेना कमज.ोर हुई, सेना में जवानों की गंभीर कमी है, रक्षा पर खर्च घटा, चीन को क्लीन चिट दी गई, ‘मोदानी’ का रक्षा उद्योग पर कब्ज़ा हो गया.
कांग्रेस ने इस चुनाव में विमर्श खड़ा किया, प्रधानमंत्री ‘बैकफुट’ पर चले गए: रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी ने किसी ‘अगर-मगर या किन्तु-परंतु’ के बिना विमर्श खड़ा किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बैकफुट पर चले गए. लोकसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार के आखिरी दिन रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में यह भी कहा कि इस चुनाव में ‘इंडिया’ गठबंधन को स्पष्ट एवं निर्णायक जनादेश मिलेगा. उन्होंने कहा, ”पहले दो चरणों के बाद यह मेरे लिए स्पष्ट हो गया था कि परिवर्तन की बयार बह रही है.” उनका कहना था कि दक्षिण में भाजपा साफ और उत्तर, पूर्व एवं पश्चिम भारत में ‘हाफ’ है.
रमेश ने कहा कि इस लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के अभियान को राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ ने एक मजबूत आधार प्रदान किया क्योंकि इस यात्रा के दौरान ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ‘पांच न्याय’ और ’25 गारंटी’ की घोषणा की. यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस 2014 और 2019 के चुनावों की तुलना में अधिक सफलतापूर्वक लोगों तक पहुंचने में सक्षम रही, उन्होंने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ परिवर्तनकारी थी और इसने राहुल गांधी के लिए संपर्क और संगठन के लिए सामूहिकता प्रदान की.
करीब दो साल पहले कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने वाले रमेश ने कहा, ”शुरुआत में ही मैंने कहा था कि जहां तक संचार का सवाल है हमारी नीति ‘एसीटी’ होनी चाहिए. ‘ए’ का मतलब ‘एग्रेशन’ (आक्रामकता), सी का मतलब ‘कोहेसिव’ (सामंजस्य) और ‘टी’ का मतलब ‘टाइमली’ (समयबद्धता) है. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में कांग्रेस ने संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा का एक विमर्श खड़ा किया. रमेश ने कहा कि इस बार बिना किसी अगर-मगर या किंतु-परंतु के विमर्श खड़ा किया गया और प्रधानमंत्री ‘बैकफुट’ पर चले गए.
‘इंडिया’ गठबंधन 48 घंटे के भीतर करेगा प्रधानमंत्री का चयन: जयराम रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस लोकसभा चुनाव में ‘इंडिया’ गठबंधन ”स्पष्ट एवं निर्णायक जनादेश” हासिल करेगा और नतीजों के 48 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री का चयन कर लिया जाएगा. लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण के मतदान से पहले, प्रचार के आखिरी दिन ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षत्कार में रमेश ने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन में जिस पार्टी को सबसे अधिक सीट मिलेंगी, वही पार्टी अगली सरकार के नेतृत्व के लिए ‘स्वाभाविक दावेदार’ होगी.
उनका यह भी कहना था कि ‘इंडिया जनबंधन’ के घटक दलों को जनादेश मिलने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कुछ घटक भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं, हालांकि कांग्रेस आलाकमान को यह तय करना होगा कि उन्हें गठबंधन में शामिल किया जाए या नहीं. रमेश ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन स्थिर, पारदर्शी और जिम्मेदार सरकार देने को प्रतिबद्ध है.
यह पूछे जाने पर कि क्या चुनाव के बाद जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार और तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू जैसे भाजपा के सहयोगियों के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन के दरवाजे खुले रहेंगे, कांग्रेस नेता ने कहा, ”नीतीश कुमार पलटी के उस्ताद हैं. चंद्रबाबू नायडू 2019 में कांग्रेस के साथ थे. मैं बस इतना ही कहूंगा कि जब ‘इंडिया जनबंधन’ के घटक दलों को जनादेश मिलेगा, तो ‘इंडिया’ में राजग के कुछ घटक भी शामिल हो सकते हैं.”
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ” कांग्रेस आलाकमान खरगे, सोनिया और राहुल को फैसला करना होगा.” उन्होंने कहा, ”इंडिया गठबंधन और एनडीए (राजग) में सिर्फ दो शब्दों का फर्क है. ‘इंडिया’ से दो ‘आई’ निकाल देने पर एनडीए बचेगा. इन दो आई का मतलब ‘इंसानियत’ और ‘ईमानदारी’ है. जिन पार्टियों में इंसानियत और ईमानदारी है वो इंडिया गठबंधन में शामिल हैं.” उन्होंने कहा कि लोगों से जनादेश मिलने के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार ‘अधिनायकवादी’ नहीं, बल्कि ‘शासनवादी’ होगी. लोकसभा चुनाव के छह चरणों के मतदान के बाद जमीनी स्थिति से जुड़े सवाल पर रमेश ने कहा कि इस चुनाव में भाजपा के पक्ष में कोई लहर नहीं, सिर्फ ‘निवर्तमान प्रधानमंत्री का जहर’ रहा है.



