
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने रद्द हो चुकी चुनावी बॉण्ड योजना से जुड़ी एक शिकायत पर निर्मला सीतारमण और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद, रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला और केंद्रीय वित्त मंत्री के इस्तीफे तथा अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की.
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश के साथ यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उनकी पार्टी को उम्मीद है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से इस ”भ्रष्टाचार” में शामिल लोगों के खिलाफ समन जारी किया जाएगा, उनके बयान दर्ज किए जाएंगे और उसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.
सिंघवी ने कहा, ”सभी एजेंसियां बहुत अच्छी तरह जानती हैं कि कैसे आगे बढ़ना है, क्योंकि वे पिछले 11 वर्षों में बड़ी संख्या में (भाजपा के) राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ कार्यवाही कर रही हैं. उन्हें यह बताने की जरूरत नहीं है कि कैसे आगे बढ़ना है…हम निश्चित रूप से अदालतों के नियंत्रण में एक निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतत? इसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय या उच्चतम न्यायालय की एसआईटी(विशेष जांच दल) द्वारा की जाए.” उन्होंने कहा, ”समय की मांग यह है कि अदालती आदेश द्वारा शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया अपना काम करे और इसकी निगरानी उच्च न्यायालय और अंतत? उच्चतम न्यायालय दोनों द्वारा की जाए, ताकि किसी भी तरह के हस्तक्षेप, विसंगति को रोका जा सके.” विपक्षी दल ने पूरे चुनावी बॉण्ड योजना की एसआईटी के माध्यम से उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की अपनी मांग दोहराई.
रमेश ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉण्ड की साजिश के जरिये पैसे ऐंठने के लिए चार तरीकों का इस्तेमाल किया गया. इसके तहत ”प्रीपेड रिश्वत, पोस्टपेड रिश्वत, छापे के बाद रिश्वत और फर्जी कंपनियों के माध्यम से वसूली” की गई. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि वह राजनीतिक, कानूनी और नैतिक रूप से ”दोषी” हैं. रमेश ने कहा कि प्राथमिकी अदालत के आदेश पर दर्ज की गई और कांग्रेस का प्राथमिकी से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी बॉण्ड योजना की एसआईटी के माध्यम से उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग कर रही है और वह इस मांग को दोहराती है. सिंघवी ने भाजपा पर ”लोकतंत्र को कमजोर करने” का भी आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, ”वित्त मंत्री खुद से ऐसा नहीं कर सकतीं. हम जानते हैं कि नंबर 1 और नंबर 2 कौन है और यह किसके निर्देश पर किया गया.” सिंघवी ने इसे ”ईबीएस” (इक्सटॉर्शनिस्ट बीजेपी स्कीम) करार देते हुए कहा, ”बड़ा मुद्दा समान अवसर उपलब्ध कराना है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं. यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला है.” चुनावी बॉण्ड योजना से संबंधित शिकायत के बाद बेंगलुरु की एक अदालत के निर्देश पर सीतारमण और अन्य के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया गया. इस योजना को शीर्ष अदालत पहले ही निरस्त कर चुकी है.
एक विशेष अदालत के आदेश के आधार पर केंद्रीय मंत्री सीतारमण, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 384 (जबरन वसूली के लिए सजा), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 34 (साझा मंशा से कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कृत्य) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.
भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बी वाई विजयेंद्र, पार्टी नेता नलिन कुमार कटील को भी प्राथमिकी में नामजद किया गया है.
जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श आर अय्यर ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने चुनावी बॉण्ड की आड़ में जबरन वसूली की और 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा उठाया. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सीतारमण ने ईडी अधिकारियों की गुप्त सहायता और समर्थन के माध्यम से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दूसरों के फायदे के लिए हजारों करोड़ रुपये की जबरन वसूली की.
इसमें कहा गया है, ”चुनावी बॉण्ड की आड़ में जबरन वसूली का काम विभिन्न स्तरों पर भाजपा के पदाधिकारियों की मिलीभगत से चलाया जा रहा था.” उच्चतम न्यायालय ने फरवरी में चुनावी बॉण्ड योजना को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इससे सूचना के अधिकार और संविधान के तहत वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है.



