जयपुर. राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री बदले जाने की सुगबुगाहट और उसके बाद के घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के अनेक विधायकों व मंत्रियों ने पार्टी आलाकमान में निष्ठा जताई है. हालांकि उन्होंने कहा है कि राज्य में किसी भी बदलाव से पहले उनकी बात सुनी जाए. विधानसभा में मुख्य सचेतक, मंत्री महेश जोशी ने कहा कि गहलोत समर्थक विधायकों की मांग है कि दो साल पहले के संकट के समय सरकार के साथ खड़े रहे वधिायकों में से ही किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाए.
उन्होंने कहा, ‘‘पहली बात यह कहना गलत है कि हम आलाकमान के प्रतिनिधियों (पर्यवेक्षकों) से नहीं मलिे. अंतर इतना है कि 85-90 लोग इकट्ठा होते हैं. वे अपनी बात कहते हैं और वे हमें कहते हैं कि आप जाकर हमारी बात पहुंचा दीजिए.’’ जोशी ने कहा, ‘‘हमने जाकर पर्यवेक्षकों से कहा कि विधायकों की यह मर्जी है कि जिन लोगों ने सरकार को कमजोर करने, गिराने की कोशिश की, जिन्होंने पहले अनुशासनहीनता की, जिन्होंने पहले बगावत की उनमें से किसी को छोड़कर पार्टी आलाकमान जिस किसी को भी चाहे मुख्यमंत्री बनाए. यह हमारी मांग थी.’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने कभी नहीं कहा कि इसे प्रस्ताव में लिखा जाए. शायद हम समझा नहीं पाए या वे समझ नहीं पाए. लेकिन हमने कभी प्रस्ताव में संशोधन की बात नहीं की. हमारी निष्ठा असंिदग्ध है. हम पार्टी व आलाकाकमान के प्रति पूरी तरह से निष्ठावान हैं. जो आलाकमान का आदेश होगा उसे अंतिम रूप से हम भी स्वीकार करेंगे लेकिन उससे पहले हम चाहते हैं कि आलाकमान तक हमारी बात पहुंचे.’’
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक रविवार रात मुख्यमंत्री निवास पर होनी थी लेकिन गहलोत के वफादार अनेक विधायक इसमें नहीं आए. इन विधायकों ने संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के बंगले पर बैठक की और फिर वहां से विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से मलिने गए और उन्हें अपने इस्तीफे सौंप दिए. कितने वधिायकों ने इस्तीफे दएि या उन पर कार्रवाई के बारे में विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से अभी तक कुछ नहीं कहा गया है.
वहीं, मुख्यमंत्री गहलोत के वफादार कद्दावर मंत्री, संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के घर रवविार रात हुई बैठक का एक वीडियो वायरल हुआ. इसमें धारीवाल यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि अगर अशोक गहलोत को बदला गया तो कांग्रेस को नुकसान होगा.
धारीवाल ने कहा कि आलाकमान में बैठा हुआ कोई आदमी यह बता दे कि अशोक गहलोत के पास कौन से दो पद हैं, जो उनसे इस्तीफा मांग रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अभी उनके पास केवल मुख्यमंत्री का पद है और जब दूसरा पद मिलेगा तब (इस्तीफे की) कोई बात उठेगी. उन्होंने विधायकों से कहा कि वे संभल जाएं तो राजस्थान बचेगा, वरना राजस्थान भी हाथ से निकल जाएगा. धारीवाल वीडियो में यह भी कहते दिखे कि, ‘‘विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने पहले दिन ही मना कर दिया था कि उनका कोई लेना-देना नहीं है इस (मुख्यमंत्री) पद से.. मैं जहां पर हूं वहां प्रसन्न हूं. न तो वो उम्मीदवार थे और न उनको उम्मीदवार बनाया गया. लेकिन जानबूझकर एक मीडिया में खबर छपवाकर यह विवाद उत्पन्न किया गया.’’ वीडियो में धारीवाल यह कहते भी दिखाई दिए कि जैसलमेर-जयपुर में कांग्रेस सरकार गिराने की भाजपा की कोशिश को विफल करने के लिए एकसाथ डेरा डालने वाले 102 विधायकों में से किसी को भी मुख्यमंत्री बनाया जाए, तो कोई आपत्ति नहीं है.
वहीं, पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र गुढा ने कांग्रेस विधायक दल से अलग बैठक करने वाले गहलोत के वफादार विधायकों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘‘पूरी जंिदगी कांग्रेस के नाम पर अनुशासन की दुहाई देने वाले लोग, जो संसदीय कार्यमंत्री (शांत िधारीवाल) हैं, जो मुख्य सचेतक (महेश जोशी) हैं, जो एक बार हमें विधायक दल की बैठक के लएि मुख्यमंत्री निवास बुलााते हैं… फिर दूसरे लोगों की दूसरी जगह बैठक बुलाते हैं …. यह घोर अनुशासनहीनता है.’’ गुढ़ा ने कहा कि कांग्रेस का टकिट नहीं होता तो ये लोग मंत्री या विधायक तो क्या सरपंच भी नहीं बन पाते.
कांग्रेस नेता सचिन पायलट के वफादारों का समूह राज्य के पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए है और मीडिया के सामने ज्यादा बोलने से परहेज कर रहा है. पायलट के वफादार खिलाड़ी लाल बैरवा ने हालांकि कहा, ‘‘हम आलाकमान के साथ हैं. जो भी फैसला होगा वह स्वीकार होगा. हमने कल भी यही कहा था.’’ वधिायक दिव्या मदेरणा ने कहा कि वह ‘व्यक्ति पूजा’ नहीं, सिर्फ ‘कांग्रेस की पूजा’ करती हैं. वहीं, इस राजनीतिक सरगर्मी के बीच अनेक विधायक सोमवार को धारीवाल के बंगले पर पहुंचे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष जोशी, मुख्यमंत्री के सलाहकार और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने पोलो ग्राउंड में पोलो मैच का लुत्फ उठाया.