धान खरीद में कथित अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ विधानसभा से किया बहिर्गमन

रायपुर. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सोमवार को छत्तीसगढ़ सरकार पर धान खरीद में बड़े पैमाने पर अव्यवस्था का आरोप लगाया और विधानसभा की दिन भर की कार्यवाही का बहिष्कार किया. प्रश्नकाल के बाद यह मुद्दा उठाते हुए, विपक्ष के नेता चरण दास महंत और कांग्रेस के अन्य विधायकों ने धान खरीद पर चर्चा कराने की मांग की एवं स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसमें दावा किया गया कि सरकार उचित व्यवस्था करने में विफल रही है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि किसानों को अपना धान बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने में परेशानी हो रही है और वन क्षेत्रों में भूमि के लिए वन अधिकार प्रमाण पत्र (एफआरसी) रखने वाले किसानों द्वारा उगाए गए धान को खरीदा नहीं जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह मामला गंभीर है और सीधे किसानों से जुड़ा है. उन्होंने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर विस्तृत चर्चा की मांग की. तब अध्यक्ष रमन ंिसह ने प्रस्ताव की स्वीकार्यता पर चर्चा की अनुमति दी.

चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीद का कार्य 15 नवंबर 2025 से प्रारंभ हुआ है जो 31 जनवरी 2026 तक चलेगा. उन्होंने कहा कि 2025-26 में प्रारंभ से ही जिस प्रकार के व्यापक कुप्रबंधनों और समस्याओं का सामना किसानों को करना पड़ा है, वैसा विगत 25 वर्षों में कभी भी नहीं हुआ. कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि राज्य में अबसे पहले यह व्यवस्था रही है कि जिन किसानों ने पिछले साल धान बेचा था उनका डेटा अगले साल के लिए आगे बढ़ा दिया जाता था तथा उन्हें इसके लिए सोसाइटी में जाने की जरूरत नहीं होती थी.

उन्होंने कहा कि इस साल किसान पंजीयन की कार्यवाही को इतना अधिक जटिल बना दिया गया है कि आज भी लगभग पांच प्रतिशत किसान पंजीयन से वंचित है और चार लाख से अधिक खसरों का पंजीयन लंबित है. कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि आॅनलाइन पंजीकरण और टोकन जारी करना अत्यधिक जटिल हो गया है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि महासमुंद में, मनबोध नाम के एक किसान ने कथित तौर पर टोकन नहीं मिलने के बाद अपना गला काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया.

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि अनावरी रिपोर्ट को आधार मानकर अधिकतर सोसाइटियों में प्रति एकड़ 12 ंिक्वटल से 15 ंिक्वटल ही धान खरीदा जा रहा है तथा वन अधिकार पत्र धारक किसानों के धान की खरीदी नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि एग्रीस्टेक पोर्टल 2025-26 तक अपडेट नहीं होने के कारण धान उत्पादक किसानों के रकबे में भिन्नता के कारण पूरा धान विक्रय नहीं हो पा रहा है.

बघेल ने दावा किया कि 14 दिसंबर तक, 160 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित खरीद लक्ष्य के मुकाबले, सिफऱ् 35 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी तथा कुल 27.36 लाख पंजीकृत किसानों में से, अब तक सिफऱ् 6.95 लाख किसान ही अपनी उपज बेच पाए थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों से धान खरीदने को तैयार नहीं दिख रही है.

इन आरोपों का जवाब देते हुए राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि पूरे राज्य में 2,739 खरीद केंद्रों के ज़रिए धान की खरीद सुचारू रूप से की जा रही है और धान की अवैध ढुलाई को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
दयालदास बघेल ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए किसानों का पंजीयन ‘इंटीग्रेटेड फार्मर पोर्टल’ और ‘एग्रीस्टैक पोर्टल’ के ज़रिए किया जा रहा है तथा अब तक 27.40 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, जबकि पिछले साल यह संख्या 25.49 लाख थी, जो लगभग 7.5 प्रतिशत ज्यादा है. मंत्री ने कहा कि वन अधिकार प्रमाण पत्र धारकों, गांव के कोटवारों और कुछ अन्य श्रेणियों को एग्रीस्टैक पंजीयन से छूट दी गई है और पंजीयन प्रक्रिया अब भी जारी है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने मौजूदा सीज़न के लिए “तुहर टोकन” ऐप के ज़रिए 24 घंटे टोकन सुविधा शुरू की है. अब तक 17.24 लाख टोकन जारी किए गए हैं, जिससे 87 लाख टन धान की खरीद हो सकी है, और किसान 20 दिन पहले तक टोकन ले सकते हैं.’’ मंत्री ने यह भी कहा कि 11 दिसंबर तक समर्थन मूल्य के तहत धान खरीद के बदले किसानों को 7,771 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.

मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष रमन ंिसह ने स्थगन प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि मंत्री का बयान गलत था और कहा कि विपक्ष जवाब से संतुष्ट नहीं है. बाद में कांग्रेस सदस्यों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया और सदन से बाहर चले गए.

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