वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, लद्दाख को न्यायालय का नोटिस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 06 Oct 2025 07:39 PM
वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, लद्दाख को न्यायालय का नोटिस
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिये जाने को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की एक याचिका पर केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से जवाब मांगा है. याचिका में वांगचुक की तत्काल रिहाई का अनुरोध किया गया है.

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने, हालांकि सोनम वांगचुक को हिरासत में लिये जाने के कारणों के बारे में उनकी पत्नी को जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में आदेश देने से इनकार कर दिया और मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर तक स्थगित कर दी. पीठ ने कहा, ”फिलहाल के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं.” वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था. इससे दो दिन पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा देने एवं इसे छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में इस केंद्र शासित प्रदेश में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे. वांगचुक राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं.

वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय से यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि हिरासत में लिये जाने का कारण उन्हें (अंगमो को) बताए जाने चाहिए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जिन कारणों से हिरासत में लिया गया है, उसके बारे में बंदी (वांगचुक) को सूचित कर दिया गया है. मेहता ने कहा कि पत्नी को हिरासत के कारण बताए जाने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है.

सिब्बल ने हिरासत का कारण बताए जाने के लिए एक अंतरिम आदेश देने पर जोर देते हुए कहा कि बिना एक प्रति के हिरासत आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती. इस पर न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, ”इस समय हम कुछ नहीं कहेंगे.” हालांकि, पीठ ने सॉलिसिटर जनरल की इस दलील पर गौर किया कि वह हिरासत के आधार की जानकारी देने की व्यवहार्यता की पड़ताल करेंगे. मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता यह कहकर मामले को ”ब­ढ़ा च­ढ़ा कर” पेश करने और एक ”भावनात्मक मुद्दा” खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं कि वांगचुक को चिकित्सा सहायता और उनकी पत्नी से मिलने से वंचित रखा गया. शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को जेल नियमों के तहत वांगचुक की चिकित्सा आवश्यकताएं पूरी करने का निर्देश दिया.

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए वांगचुक की पत्नी ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने और लद्दाख प्रशासन को ”सोनम वांगचुक को तुरंत इस अदालत में पेश करने” के निर्देश देने का अनुरोध किया. वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और वकील सर्वम ऋतम खरे के माध्यम से दायर अपनी याचिका में अंगमो ने वांगचुक के खिलाफ रासुका लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाया है. इस कानून के तहत आरोपी को बिना मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है.

याचिका में हिरासत में लिए गए व्यक्ति से तुरंत मिलने की अनुमति देने और निवारक हिरासत आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया गया है. याचिका में गृह मंत्रालय, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, लेह के उपायुक्त और जोधपुर जेल अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है. साथ ही, ”याचिकाकर्ता को उनके पति से टेलीफोन पर बातचीत करने और व्यक्तिगत रूप से तुरंत मिलने की अनुमति” के निर्देश का भी अनुरोध किया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि वांगचुक की हिरासत ”अवैध, मनमानी और असंवैधानिक” है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

याचिका के अनुसार, ”वांगचुक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित नवप्रवर्तक, पर्यावरणविद् और समाज सुधारक रहे हैं. उन्होंने हमेशा लद्दाख की पारिस्थितिकी और लोकतांत्रिक चिंताओं को उजागर करने के लिए गांधीवादी एवं शांतिपूर्ण तरीकों का समर्थन किया है.” वांगचुक को 26 सितंबर को लेह के उपायुक्त ने रासुका की धारा 3(2) के तहत उस वक्त हिरासत में लिया था, जब वह छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की लद्दाख की मांग को लेकर लंबे समय तक किए गए अनशन के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे.
याचिका में कहा गया है कि उन्हें दवाइयां, निजी सामान या उनके परिवार और वकील से मिलने की सुविधा दिए बिना तुरंत जोधपुर केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित कर दिया गया.

याचिका में कहा गया है कि वांगचुक या उनके परिवार को आज तक हिरासत में रखने का कोई कारण नहीं बताया गया है. उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि उन्हें लेह में एक तरह से नजरबंद रखा गया है, जबकि वांगचुक द्वारा स्थापित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (एचआईएएल) के छात्रों और कर्मचारियों को उत्पीड़न, धमकी और जांच का सामना करना पड़ रहा है.

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