न्यायालय ने वायु प्रदूषण पर दिल्ली सरकार की खिंचाई की ; कहा: सम-विषम योजना पर निर्देश नहीं देंगे

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में ‘सम-विषम’ कार योजना लागू करने का निर्णय दिल्ली सरकार को लेना है और अदालत पर यह बोझ डालने को लेकर शहर की सरकार की खिंचाई की. शीर्ष न्यायालय में दिन की कार्यवाही के बाद, पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सम-विषम कार योजना के क्रियान्वयन को टाल दिया है क्योंकि बारिश के चलते वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

न्यायालय दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बदतर होती वायु गुणवत्ता से संबंधित विषय की सुनवाई कर रहा है. राय ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार दिवाली के बाद वायु गुणवत्ता की स्थिति की समीक्षा करेगी और वायु गुणवत्ता में अचानक गिरावट होने की स्थिति में सम-विषम योजना पर फैसला किया जा सकता है. इससे पहले, राय ने कहा था कि उच्चतम न्यायालय द्वारा इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा करने और आदेश जारी करने के बाद इस योजना को शहर में लागू किया जाएगा.

शुक्रवार को न्यायालय में सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सम-विषम योजना से न्यायालय का कोई लेना-देना नहीं है और इसने कभी नहीं कहा कि पड़ोसी राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाली टैक्सियों पर भी इसे लागू किया जाना चाहिए. दिल्ली सरकार ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि यह दिवाली के अगले दिन, 13 नवंबर से 20 नवंबर तक सम-विषम योजना लागू करेगी, जब वायु प्रदूषण के चरम पर रहने की संभावना है.

शीर्ष न्यायालय ने सात नवंबर को विषय की सुनवाई के दौरान योजना के प्रभाव पर सवाल उठाया था, जिसके बाद राय ने कहा था कि शुक्रवार को इसपर अदालत के सुनवाई करने और आदेश जारी किये जाने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. शीर्ष न्यायालय वायु प्रदूषण पर पर्यावरणविद एम सी मेहता द्वारा 1985 में दायर एक याचिका पर विचार कर रहा है. प्रदूषण से जुड़े कई मुद्दे मेहता की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठे हैं.

शुक्रवार को, न्यायालय ने कहा कि इसने पिछली सुनवाई में सम-विषम का मुद्दा उठाया था, जिससे पहले एक न्यायमित्र के रूप में अदालत की सहायता कर रहे एक अधिवक्ता ने कहा था कि सम-विषम योजना ने वायु प्रदूषण घटाने में मदद नहीं की. दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली टैक्सी को दिल्ली में प्रवेश करने देने की जरूरत है, अन्यथा आवागमन एक बड़ी समस्या बन जाएगी. दिल्ली में काम करने वाले लाखों लोग उत्तर प्रदेश के नोएडा और हरियाणा के गुरुग्राम जैसे शहरों में रहते हैं.

न्यायमूर्ति कौल ने कहा, ”मैं आपसे सहमत हूं. हमने कभी यह नहीं कहा. काम नहीं करने और अदालत पर बोझ डालने की कोशिश ना करें. यही हो रहा है.” पीठ ने कहा, ”…न्याय मित्र ने कहा है कि इस सम-विषम योजना से फायदा नहीं हो रहा. इससे मदद नहीं मिली है. लेकिन आपने अब कहा है कि हम सम-विषम लागू करेंगे और टैक्सियों पर भी सम-विषम लागू करेंगे. क्या हमने आपसे टैक्सियों पर सम-विषम लागू करने को कहा है? हमने आपसे इसे लागू करने नहीं कहा है.”

वकील ने दलील दी कि सम-विषम योजना प्रदूषण घटाने में ज्यादा कारगर नहीं रही है, लेकिन यदि थोड़ा भी प्रभावशाली है तो यह मायने रखती है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण के बड़े कारण, जैसा कि अध्ययनों में दावा किया गया है, सड़कों पर अत्यधिक वाहनों का होना है और सम-विषम से इन्हें घटाने में मदद मिलेगी.

पीठ ने वकील से कहा, ”आपको जो करना है, आप करें. हम यहां आपको यह कहने के लिए नहीं बैठे हैं कि आपको क्या करना है.” न्यायालय ने कहा, ”आपको कल फैसला लेना होगा, आप कहेंगे कि हमने आपको (सम विषम योजना) जारी रखने को कहा है, (अथवा) जारी नहीं रखने को कहा है और परिणामस्वरूप, प्रदूषण है इसलिए उच्चतम न्यायालय ने आदेश जारी किया है.” दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि राज्य पूरी गंभीरता से स्थिति के समाधान के लिए तत्पर है और स्थिति सचमुच में खराब है.

न्यायमूर्ति कौल ने कहा, ” हल्के फुल्के ढंग से कहा जाए तो आबादी के पास प्रार्थना करने के सिवाय करने को रह ही क्या जाता है.” उन्होंने कहा कि कभी-कभी बारिश होगी और उससे मदद मिलेगी. वह दिल्ली और एनसीआर में बीच बीच में हुई हल्की बारिश का हवाला दे रहे थे, जिससे आज वायु प्रदूषण में कमी आ गई है. दिल्ली सरकार ने 2016 में पहली बार ‘सम-विषम’ योजना लागू की थी, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में एक-एक दिन के अंतराल पर सम-विषम पंजीयन नंबर वाली कार के परिचालन की अनुमति दी जाती है.

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