न्यायालय का कोलकाता बलात्कार-हत्या मामले की सुनवाई पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित करने से इनकार

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के मुकदमे को पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश के पास सबूतों पर गौर करने के बाद जरूरी महसूस होने पर एक और जांच का आदेश देने के लिए पर्याप्त शक्तियां हैं.

शीर्ष अदालत ने कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बलात्कार और हत्या के मामले के संबंध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल छठी वस्तु स्थिति रिपोर्ट पर भी गौर किया, लेकिन यह कहते हुए कोई टिप्पणी करने से परहेज किया कि जांच जारी है.

न्यायालय ने कहा कि कोलकाता की अदालत ने मुख्य आरोपी संजय रॉय के खिलाफ चार नवंबर को आरोप तय कर दिए हैं और मामले में रोजाना सुनवाई 11 नवंबर से शुरू होगी. सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा पर प्रोटोकॉल बनाने के लिए गठित राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) ने शीर्ष अदालत में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. शीर्ष अदालत ने एनटीएफ की रिपोर्ट सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा करने का निर्देश दिया और सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की.

शीर्ष अदालत ने 15 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल सरकार से राज्य में नागरिक स्वयंसेवकों की भर्ती के बारे में सवाल किया था और उनकी भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित विवरण मांगा था. उच्चतम न्यायालय ने 30 सितंबर को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी लगाने और शौचालयों के अलावा अलग विश्राम कक्षों के निर्माण में राज्य सरकार की ”धीमी” प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया था और राज्य को 15 अक्टूबर तक काम को पूरा करने का निर्देश दिया था.

शीर्ष अदालत ने 17 सितंबर को मामले में सीबीआई की वस्तु स्थिति रिपोर्ट के निष्कर्षों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए विस्तृत विवरण देने से इनकार कर दिया तथा कहा कि किसी भी तरह का खुलासा जांच को खतरे में डाल सकता है. इससे पहले नौ सितंबर को शीर्ष अदालत ने जूनियर डॉक्टर के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज चालान के उसके समक्ष रखे गए रिकॉर्ड से गायब होने पर चिंता व्यक्त की थी और पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.

उच्चतम न्यायालय ने 22 अगस्त को डॉक्टर की अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करने में देरी को लेकर कोलकाता पुलिस की खिंचाई की थी और इसे ”अत्यंत व्यथित करने वाला” बताया था. अदालत ने घटनाक्रम और प्रक्रियागत औपचारिकताओं को लेकर भी नाराजगी जताई थी.

शीर्ष अदालत ने डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने को लेकर 10 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यबल का गठन किया था. इस घटना को ”भयावह” करार देते हुए, शीर्ष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में कथित देरी और भीड़ द्वारा अस्पताल में तोड़फोड़ किए जाने को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की थी.

इस घटना में डॉक्टर की हत्या कर दी गई थी और उसके शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे, जिसके बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे. वारदात के अगले दिन कोलकाता पुलिस ने इस मामले में एक नागरिक स्वयंसेवक को गिरफ्तार किया था. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को मामले की जांच कोलकाता पुलिस से सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया, जिसने 14 अगस्त को अपनी जांच शुरू की.

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