न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में याचिका पर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार से जवाब मांगा

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और राज्य सरकार से उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई मंजूरी वापस लेने के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब मांगा.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक बसंगौड़ा आर पाटिल (यतनाल) द्वारा दायर याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने मंजूरी वापस लेने के खिलाफ उनकी याचिका खारिज करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के 29 अगस्त के आदेश को चुनौती दी है.

सुनवाई के दौरान शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सीबीआई, जिसे उच्च न्यायालय के आदेश से सबसे अधिक व्यथित होना चाहिए था, अपील में शीर्ष अदालत के समक्ष नहीं आई है. उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह याचिका एक निजी व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय में दायर की गई है. भाजपा विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि फैसले में याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया है.

पीठ ने मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना सिंघवी को याचिका पर प्रारंभिक आपत्तियां दर्ज कराने की स्वतंत्रता दी. उच्च न्यायालय ने 29 अगस्त को सीबीआई द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से मना कर दिया था. इसमें शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले की जांच के लिए कर्नाटक की कांग्रेस नीत सरकार द्वारा दी गई मंजूरी वापस लेने के फैसले को चुनौती दी गई थी. उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के 26 दिसंबर, 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें 74.93 करोड़ रुपये के डीए मामले को जांच के लिए लोकायुक्त को भेजा गया था.

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