पूनिया के निलंबन के खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी से जवाब मांगा

नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहलवान बजरंग पूनिया की अपने निलंबन को चुनौती देने से संबंधित याचिका पर बुधवार को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) से जवाब मांगा. पूनिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने जब अल्बानिया में आगामी सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का हवाला देते हुए अंतरिम राहत देने का अनुरोध किया, तो अदालत ने कहा कि इसके लिए कोई औपचारिक आवेदन दायर नहीं किया गया है. न्यायमूर्ति संजीव नरुला ने पूनिया की याचिका पर एजेंसी को नोटिस जारी किया.

पूनिया सात महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के लिए भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के तत्कालीन प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पिछले साल जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे रहने वाले पहलवानों में से एक थे. एजेंसी के वकील ने कहा कि एक अनुशासनात्मक समिति का गठन किया गया है और वह इस मुद्दे को देख रही है. उन्होंने कहा कि अंतिम सुनवाई “होने वाली है”.

नाडा ने 21 जून को पूनिया को दूसरी बार निलंबित करने के बाद औपचारिक “आरोप नोटिस” जारी किया था, जिसके कारण वह प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य हो गए थे. इससे तीन सप्ताह पहले नाडा ने यह कहते हुए उनका पिछला निलंबन रद्द कर दिया था कि उसने पहलवान को आरोपों के बारे में नोटिस नहीं दिया था. एजेंसी ने सबसे पहले पूनिया को 10 मार्च को सोनीपत में आयोजित चयन परीक्षण के दौरान डोप जांच के लिए अपने मूत्र का नमूना देने से इनकार करने पर 23 अप्रैल को निलंबित कर दिया था. कुश्ती की वैश्विक संचालन संस्था, यूनाइटेड रेसलिंग वर्ल्ड (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने भी पूनिया को निलंबित कर दिया था.

पहलवान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने कहा, “यह किसी को परेशान करने का अनूठा मामला है…विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होने वाला है. मुझे भाग लेना है. मुझे अभ्यास करना है. वे मेरा करियर खत्म कर रहे हैं.” हालांकि अदालत ने जांच के लिए नमूने देने से इनकार करने को लेकर पूनिया से सवाल किया और पूछा, “अगर आप जांच नहीं कराएंगे तो वे आपको खेलने की अनुमति कैसे देंगे.” पूनिया के वकील ने जोर देकर कहा कि उन्होंने डोप टेस्ट कराने से “इनकार नहीं किया है” बल्कि अधिकारियों से केवल उस तरीके के बारे में जवाब मांगा है जिस तरह से पहले परीक्षण आयोजित होते थे.

नाडा के फैसले को रद्द करने का अनुरोध करते हुए दत्ता ने कहा, “प्रावधान कहता है कि अगर मेरे पास परीक्षण नहीं कराने का कोई कारण है, तो उन्हें इस पर गौर करना होगा. अनंतिम निलंबन का कोई प्रावधान नहीं है. अनंतिम निलंबन को रद्द करें.” वकील ने कहा, “मैंने मना नहीं किया है. मैंने मना नहीं किया. पहली बात तो यह कि जो व्यक्ति आया था, वह पुरानी किट लेकर आया था. उन्होंने यह बात स्वीकार कर ली. उस व्यक्ति को निलंबित कर दिया गया है. मैंने कहा कि कृपया मुझे इसका उत्तर दीजिए कि क्या हुआ है. दूसरी बार में जो लोग आये, वे इसके लिए अधिकृत ही नहीं थे.” हालांकि, अदालत ने कहा कि यह इसके बाद जांच कराने का कोई आधार नहीं हो सकता.

अदालत ने कहा, ”यह कोई आधार नहीं हो सकता कि यह घटना घट गई और अब आगे जांच के लिए मैं अपने नमूने नहीं दूंगा.” पूनिया के वकील ने कहा कि वह बुधवार को ही जांच कराने को तैयार हैं. दत्ता ने कहा, ”वे आज ही नमूने ले लें.” नाडा के वकील ने कहा कि “इस तरह नमूने नहीं लिये जा सकते” क्योंकि यह परीक्षण योजना के अनुसार किया जाता है. अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि पूनिया अनुशासनात्मक समिति के समक्ष अपनी शिकायतें रख सकते हैं. अदालत ने मामले की सुनवाई अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी.

नाडा के वकील ने कहा कि कोई भी खिलाड़ी डोप टेस्ट से इनकार नहीं कर सकता और पूनिया को “निशाना” नहीं बनाया जा रहा है.
वकील ने कहा, “एक अनुशासनात्मक समिति मौजूद है. हम कभी नहीं चाहेंगे कि हमारा कोई भी ओलंपियन खिलाड़ी, जो कल देश के लिए पदक लाएगा, उसे परेशान किया जाए.”

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