साइबर धोखाधड़ी: डॉ. रेड्डीज ईमेल हैक करने वालों ने डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज को 2.16 करोड़ रुपये का चूना लगाया

बेंगलुरु: साइबर धोखाधड़ी करने वालों ने बेंगलुरु स्थित ‘ग्रुप फार्मास्युटिकल्स’ और ‘डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, हैदराबाद’ के बीच आधिकारिक ईमेल संचार को कथित रूप से हैक करके 2.16 करोड़ रुपये अपने खाते में हस्तांतरित कर लिए। बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

बेंगलुरु शहर के साइबर अपराध पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ग्रुप फार्मास्युटिकल्स के एक वरिष्ठ अधिकारी महेश बाबू के. ने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कंपनी ने प्राथमिकी में कहा कि कुछ सामान की आपूर्ति करने के लिए उसे डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज से 2.16 करोड़ रुपये मिलने थे।

प्राथमिकी में कहा गया है कि तीन नवंबर को कुछ हैकर ने दोनों कंपनियों के बीच ईमेल संचार तक कथित तौर पर अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली और डॉ रेड्डीज की वित्त एवं लेखा टीम को फर्जी ईमेल भेजे जिनमें उन्होंने स्वयं को ‘ग्रुप फार्मास्युटिकल्स’ के अधिकारी बताकर अपने बैंक खाते के विवरण प्रदान किए।

इसमें कहा गया, ‘‘इसके परिणामस्वरूप डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज ने चार नवंबर को 2.16 करोड़ रुपये धोखाधड़ी वाले बैंक खाते में भेज दिए।’’शिकायतकर्ता ने पुलिस से धोखाधड़ी वाले खाते को तुरंत ‘फ्रीज’ करने और गबन की गई राशि की वसूली करने का अनुरोध किया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर पांच नवंबर को अज्ञात साइबर धोखेबाजों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4) (धोखाधड़ी) एवं 319(2) (छद्मवेश द्वारा धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रारंभिक जांच का हवाला देते हुए बताया कि धोखाधड़ी वाला खाता गुजरात के वडोदरा में पाया गया। उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को साइबर अपराधियों ने तुरंत कई उप-खातों में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि जिस प्राथमिक खाते में धोखाधड़ी की राशि स्थानांतरित की गई थी, उसे ‘फ्रीज’ कर दिया गया है और वे अन्य खातों में भेजी गई धनराशि को बैंकों की मदद से प्राप्त करने के लिए कदम उठा रहे हैं। मामले की जांच जारी है।

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