दिल्ली की अदालत ने ‘आप’ नेता संजय सिंह को 10 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेजा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 05 Oct 2023 08:24 PM
दिल्ली की अदालत ने ‘आप’ नेता संजय सिंह को 10 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेजा
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह को दिल्ली आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किये जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को पांच दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया.
विशेष न्यायाधीश एम. के. नागपाल ने सिंह को 10 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया, ताकि संघीय जांच एजेंसी उनसे पूछताछ कर सके. आप के राज्यसभा सदस्य को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर अदालत में पेश किया जाएगा.

अदालत कक्ष में लाये जाने के दौरान सिंह ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का “अन्यायपूर्ण कृत्य” है. प्रधानमंत्री की पार्टी “आगामी लोकसभा चुनाव हारने जा रही है”. सिंह को प्रवर्तन निदेशालय ने 2021-22 दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार किया था, जो राष्ट्रीय राजधानी की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के लिए एक बड़ा झटका था.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह मोदीजी का अन्याय है. वह (मोदी) चुनाव हार जाएंगे, वह (मोदी) चुनाव हार रहे हैं.” बाद में, जब अदालत ने उनसे पूछा कि क्या वह कुछ कहना चाहते हैं, तो सिंह ने दावा किया कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है. आप नेता ने मामले में अब सरकारी गवाह बन गए आरोपी कारोबारी दिनेश अरोड़ा से दो करोड़ रुपये मिलने के ईडी के दावे को खारिज करते हुए कहा, “सर, अमित अरोड़ा ने दसियों बयान दिये, दिनेश अरोड़ा ने कई बयान दिये, लेकिन उन्हें मेरा नाम याद नहीं रहा. मैं इतना भी अनजान नहीं हूं कि वे मेरा नाम भूल गये. अब उन्हें अचानक याद आया…कोई अलग कानून नहीं है. मुझे एक बार भी समन नहीं किया गया. मेरे लिए अलग कानून क्यों?”

सुनवाई के दौरान ईडी ने सिंह की हिरासत की मांग करते हुए कहा कि कई लोगों से पूछताछ और उनका आमना-सामना कराया जाना बाकी है. एजेंसी ने कहा कि वह सिंह के फोन से निकाले गए डेटा को लेकर भी उनसे पूछताछ करना चाहती है. ईडी ने आरोप लगाया कि सिंह को दो किस्तों में तीन करोड़ रुपये मिले.

ईडी ने कहा, “पैसा उनके आवास पर पहुंचाया गया. दिनेश अरोड़ा ने उनसे (पैसे पहुंचने के बारे) में पूछा, तो उन्होंने (सिंह ने) इसकी पुष्टि की… जांच में पता चला है कि दो करोड़ नकद दिया गया था. कुल तीन करोड़ रुपये दिए गए.” जब एजेंसी ने कहा कि वह सिंह का सामना उनके मोबाइल फोन से निकाले गए डिजिटल सबूतों से कराना चाहती है, तो अदालत ने उसके वकील से कहा कि ऐसे उन्हें हिरासत में लिये बिना भी किया जा सकता है.

न्यायाधीश ने कहा, “आप फोन से उनका सामना क्यों करना चाहते हैं? आप वैसे भी डेटा निकाल सकते हैं.” सिंह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने उनकी हिरासत की मांग करने वाली ईडी की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी का गवाह दिनेश अरोड़ा भरोसेमंद नहीं है.

सिंह के वकील ने कहा, “वह पहले आरोपी था, फिर गवाह बन गया. उसका रुख बदल रहा है. वह अभियुक्त है, सरकारी गवाह बन गया, बयान देता है; (लेकिन) बयान ईडी के अनुकूल नहीं है, (इसलिए) ईडी ने उसे गिरफ्तार कर लिया और वह ईडी मामले में सरकारी गवाह बन गया. वह बयान बदलता है और ईडी ने उसके बयान के आधार पर मुझे गिरफ्तार कर लिया.” उन्होंने ईडी पर सिंह को गिरफ्तार कर अपमानित करने का आरोप लगाया.

माथुर ने कहा, “अलग-अलग एजेंडे हैं. पिछले डेढ़ साल से डीए (दिनेश अरोड़ा) उनके हाथ में है. बयान पहले दिया गया था. अब इसे क्यों लाया जा रहा है. एक बार जब आपके पास (अरोड़ा का) बयान आ गया, तो आपने मुझे स्पष्टीकरण के लिए नहीं बुलाया. आप मुझे गिरफ्तार करके अपमानित करना चाहते हैं.”

केंद्र संजय सिंह को ‘चुप’ कराने की कोशिश कर रहा है : आप

आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को केंद्र पर उसके सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर उन्हें चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके पास सिंह के खिलाफ कोई भी सबूत हो तो उसे सार्वजनिक करें. सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार किया गया था.

यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ‘आप’ की वरिष्ठ नेता आतिशी ने दावा किया कि ईडी और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के 500 से अधिक अधिकारियों ने पिछले 15 महीनों में ‘आप’ नेताओं से जुड़े विभिन्न स्थानों पर छापे मारे, लेकिन उनके खिलाफ ”एक भी सबूत नहीं मिला”.

‘आप’ नेता ने कहा, ”उन्होंने मनीष सिसोदिया के आवास, कार्यालयों और कई अन्य स्थानों पर छापे मारे लेकिन उन्हें एक पैसे के भी भ्रष्टाचार का साक्ष्य नहीं मिला और अब संजय सिंह को निशाना बनाया गया है.” उन्होंने कहा, ”ईडी अधिकारियों ने संजय सिंह के आवास के चप्पे-चप्पे पर छापेमारी की लेकिन कुछ नहीं मिला. उन्होंने सिंह को गिरफ्तार कर लिया क्योंकि वह लगातार केंद्र के भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते थे.”

आतिशी ने कहा कि अगर उनके नेता के खिलाफ कोई सबूत है तो केंद्र को इसे सार्वजनिक करना चाहिए. उन्होंने दावा किया, ”मैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देना चाहती हूं कि अगर उन्हें संजय सिंह के खिलाफ कोई सबूत मिला है, तो उन्हें इसे सार्वजनिक करना चाहिए या उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए. वे अपने अधिकारियों को ऐसी किसी भी जगह भेज सकते हैं जहां संजय सिंह गए थे और मैं गारंटी दे सकती हूं कि उन्हें उनके खिलाफ कुछ भी नहीं मिलेगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र संजय सिंह को गिरफ्तार करके उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रहा है.

आतिशी ने कहा, ”हम सभी जानते हैं कि जब भी कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगा तो उसे चुप कराने की कोशिश की जाएगी. चूंकि वे उन्हें (सिंह को) चुप नहीं करा सके, इसलिए उन्होंने हमारे नेता को गिरफ्तार कर लिया. भाजपा को पता होना चाहिए कि ‘आप’ उनकी गिरफ्तारी की धमकियों से डरने वाली नहीं है.” ‘आप’ के राज्यसभा सदस्य, पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया के बाद अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति से संबंधित मामलों में गिरफ्तार होने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के दूसरे ‘हाई प्रोफाइल’ नेता बन गए हैं.
सिंह (51) की गिरफ्तारी से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान बढ. गई है.

‘आप’ के एक अन्य नेता गोपाल राय ने प्रेस वार्ता में कहा, “हम संजय सिंह के आवास पर गए थे और उनके परिवार ने हमें बताया कि ईडी को उनके खिलाफ कुछ भी नहीं मिला, फिर भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. शाम तक ईडी इस जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताती रही, लेकिन अचानक उच्च अधिकारियों से उन्हें गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए.” राय ने भी आरोप लगाया कि भाजपा सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का “दुरुपयोग” कर रही है.

उन्होंने कहा, ” देश में बढ.ती महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी के खिलाफ बोलने की हिम्मत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केंद्र ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है. अगर केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं को भी गिरफ्तार कर ले तब भी हम नहीं झुकेंगे. हम देश, संविधान और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते रहे हैं और उठाते रहेंगे.” दिल्ली के तत्कालीन मंत्री सत्येन्द्र जैन को ईडी ने 30 मई 2022 को धन शोधन के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था.

दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री राय ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी ने सिंह को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार किया है. ‘आप’ नेता और विधायक दिलीप पांडे ने ईडी और सीबीआई को आम चुनाव से पहले भाजपा द्वारा नियुक्त “प्रचारक” बताया. पांडे ने कहा, ” पूरा देश देख रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपने दो स्टार प्रचारक– ईडी और सीबीआई उतार दिए हैं. जहां आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार के निरंकुश शासन के खिलाफ आवाज उठा रही है, वहीं देश भर में अलग-अलग जगहों पर ईडी द्वारा विपक्षी नेताओं पर 40 छापे मारे गए हैं.”

उन्होंने आरोप लगाया, ” पिछले चार दिनों के दौरान, केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने से इनकार करने वाले मीडिया और पत्रकारों पर हमले हुए हैं. तृकां की एक सांसद को केंद्रीय मंत्री के कार्यालय से बेरहमी से घसीटा गया और अगले दिन संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया. यह अघोषित आपातकाल की स्थिति है.” वह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा का हवाला दे रहे थे जिन्हें महिला पुलिस कांस्टेबल ने कृषि भवन से उठाकर बाहर कर दिया था, क्योंकि मंत्री ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था. ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भविष्य में और अधिक विपक्षी नेताओं को “निशाना बनाया जाएगा और गिरफ्तार किया जाएगा.”

दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में ‘आप’ को आरोपी न बनाए जाने पर केवल कानूनी सवाल पूछे: न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से केवल यह ‘कानूनी सवाल’ पूछ रहा है कि दिल्ली आबकारी नीति में कथित लाभार्थी होने के बावजूद एक राजनीतिक दल ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया है. शीर्ष अदालत ने बुधवार को ईडी से यह बताने को कहा था कि कथित घोटाले से संबंधित धनशोधन मामले में आप को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस. वी. एन. भट्टी की पीठ ने उस वक्त यह बात कही, जब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि अदालत के सवाल ने अखबारों और टीवी चैनल में सुर्खियां बटोरीं कि ‘आप’ को आरोपी बनाया जाएगा.

न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, “देखिए! अदालत में, हम उचित जवाब पाने के लिए सवाल पूछते हैं. अखबारों में जो लिखा जाता है या टीवी पर दिखाया जाता है, हम उससे प्रभावित नहीं होते हैं. इसका हम पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है.” उन्होंने आगे कहा कि अदालत यह स्पष्ट कर रही है कि उसने इस मुद्दे पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है.

न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ”हमने अदालत के समक्ष दलीलों के आधार पर प्रश्न पूछे. हमने प्रश्न किसी को फंसाने के लिए नहीं पूछा. यह पूरी तरह से एक कानूनी प्रश्न था, जो इस तथ्य से उत्पन्न हुआ कि यदि ‘ए’ अपराध की आय का लाभार्थी है, तो उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया गया, जबकि ‘बी’ और ‘सी’ को आरोपी बनाया गया है.” सिंघवी ने कहा कि समस्या यह है कि सुबह से ही न्यूज चैनल चला रहे हैं कि आम आदमी पार्टी को धनशोधन मामले में आरोपी बनाया जाएगा.

ईडी की पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कहा कि उनसे कुछ मीडियार्किमयों ने इस बारे में सवाल पूछा था और उन्होंने बयान दिया, ”अगर सबूत हैं, तो हम किसी को भी नहीं बख्शेंगे.” पीठ ने सिंघवी और राजू से कहा कि वे मुख्य मामले से न हटें और मुद्दे को वहीं छोड़ दें. न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ”आइए मुख्य मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करें.” उन्होंने राजू से मामले में बहस जारी रखने को कहा. शीर्ष अदालत इस मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

‘आप’ नेताओं के खिलाफ मामले ‘झूठे’ हैं, केंद्रीय एजेंसियां अपना समय बर्बाद कर रही हैं: केजरीवाल

आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामले “झूठे” हैं और दावा किया कि इन मामलों की जांच करना केंद्र और उसकी एजेंसियों के समय की बर्बादी है.

आबकारी नीति मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर शीर्ष अदालत की टिप्पणियों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा, ” जिस तरह से अदालत ने सवाल पूछे उससे लगा कि उन्होंने (एजेंसियों ने) एक तरह से हमारे खिलाफ गलत मामला दर्ज किया है.” शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कथित लाभार्थी होने के बावजूद आम आदमी पार्टी को दिल्ली आबकारी नीति मामले में आरोपी नहीं बनाये जाने को लेकर वह प्रवर्तन निदेशालय से सिर्फ एक “कानूनी सवाल” पूछ रही है.

केजरीवाल ने कहा कि एजेंसियों ने इतने सारे मामले दर्ज किए लेकिन उनकी जांच के बाद कुछ नहीं निकला. केजरीवाल ने एक कार्यक्रम के इतर यहां कहा, “सभी मामले झूठे हैं. वे (एजेंसियां) जांच करती रहती हैं लेकिन जांच से कुछ नहीं निकलता. यह समय की बर्बादी है. जिस तरह से उच्चतम न्यायालय आज (मनीष सिसोदिया मामले के संबंध में) सवाल पूछ रहा था, उससे पता चलता है कि यह एक झूठा मामला था.” उन्होंने कहा कि फर्जी मामलों की जांच से सरकार और उसकी एजेंसियों समेत सभी का समय बर्बाद होता है.
मुख्यमंत्री ने कहा, “सभी को देश की प्रगति के लिए काम करना चाहिए. किसी को भी फर्जी मामलों में फंसाने से देश की प्रगति में मदद नहीं मिलेगी.”

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