धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली की अदालत ने अभिनेता धर्मेंद्र को किया तलब

नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने गरम धरम ढाबा फ्रेंचाइजी से संबंधित धोखाधड़ी के एक मामले में फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र और दो अन्य को तलब किया है. शिकायतकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी. वकील डी. डी. पांडे ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट यशदीप चहल ने दिल्ली के व्यवसायी सुशील कुमार की शिकायत पर 89 वर्षीय अभिनेता के खिलाफ यह आदेश पारित किया. सुशील कुमार ने आरोप लगाया था कि उन्हें फ्रेंचाइजी में निवेश का प्रलोभन दिया गया था.

न्यायाधीश ने पांच दिसंबर को पारित आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया संकेत देते हैं कि आरोपी व्यक्तियों ने अपनी साझा मंशा के तहत शिकायतकर्ता को निवेश के लिए प्रेरित किया. अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से धोखाधड़ी के अपराध का खुलासा होता है.

न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया अभिनेता और सह आरोपी दीपक भारद्वाज व उमंग तिवारी के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला प्रतीत होता है. न्यायाधीश ने आरोपियों को 20 फरवरी 2025 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया.
न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज गरम धरम ढाबा से संबंधित हैं और आशय पत्र पर उक्त रेस्तरां का ‘लोगो’ भी लगा हुआ है.

न्यायाधीश ने कहा, ”यह बिल्कुल स्पष्ट है कि पक्षकारों के बीच लेनदेन गरम धरम ढाबा से संबंधित है और आरोपी संख्या एक (धर्म सिंह देओल) की ओर से आरोपी संख्या दो (भारद्वाज) और तीन (तिवारी) द्वारा किया जा रहा था. रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया इंगित करते हैं कि आरोपी व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता को अपने साझा इरादे के तहत आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और धोखाधड़ी के अपराध से जुड़ी चीजों का विधिवत खुलासा किया गया है.” अदालत ने भुगतान के बाद परियोजना के बारे में पूछताछ करने पर शिकायतकर्ता को कथित रूप से आपराधिक धमकी देने के मामले में भारद्वाज और तिवारी को तलब किया.

अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पक्षों के बीच लेन-देन गरम धरम ढाबा से संबंधित है और आरोपी धरम सिंह देओल (धर्मेंद्र) की ओर से सह-आरोपी द्वारा यह लेन-देन किया जा रहा था. शिकायत के अनुसार, अप्रैल 2018 में सह-आरोपी ने धरम सिंह देओल (धर्मेंद्र) की ओर से उनसे संपर्क किया था और उत्तर प्रदेश में एनएच-24/एनएच-9 पर गरम धरम ढाबा की फ्रेंचाइजी खोलने का प्रस्ताव दिया था. शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने सितंबर 2018 में 17.70 लाख रुपये की राशि का चेक सौंपा. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद आरोपी ने उन्हें जवाब देना बंद कर दिया.

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