
नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने बलात्कार और आपराधिक धमकी का आरोप लगाने वाली एक महिला की शिकायत पर बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को तलब किया. अदालत ने कथित अपराध का संज्ञान लिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री को 20 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया.
न्यायाधीश ने कहा, ”इस अदालत ने (प्राथमिकी) रद्द करने की रिपोर्ट, शिकायतकर्ता द्वारा दायर विरोध याचिका, जांच अधिकारी द्वारा विरोध याचिका पर दाखिल जवाब तथा रिकॉर्ड पर रखी गई अन्य सामग्री पर गौर करने के बाद यह पाया है कि शिकायतकर्ता ने पुलिस, अदालत, मजिस्ट्रेट के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत एक समान बयान दिए हैं.” शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि हुसैन ने उसे नशीला पदार्थ दिया और अप्रैल 2018 में राष्ट्रीय राजधानी के एक फार्महाउस में उससे बलात्कार किया. पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट दाखिल कर प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया था.
न्यायाधीश ने 10 अक्टूबर को एक आदेश में पुलिस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा, ”रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल करते समय जांच अधिकारी द्वारा उठाए गए मुद्दे…ऐसे मामले हैं जिन पर सुनवाई के दौरान निर्णय लिया जा सकता है.” न्यायाधीश ने कहा, ”इसके अलावा इस अदालत का मानना है कि शिकायतकर्ता के बयान और उसकी विश्वसनीयता का परीक्षण केवल मुकदमे के दौरान ही किया जा सकता है जब आरोपी द्वारा उससे जिरह की जाती है.”
न्यायाधीश ने कहा, ”इसलिए यह अदालत रद्द करने संबंधी रिपोर्ट के साथ रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री के साथ शिकायतकर्ता के बयानों के आधार पर अपराधों का संज्ञान लेती है, जिसमें उसने आरोपी सैयद शाहनवाज हुसैन द्वारा बलात्कार करने और धमकी देने का आरोप लगाया है.”
न्यायाधीश ने कथित अपराधों का संज्ञान लिया जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत दंडनीय हैं. न्यायाधीश ने कहा, ”इसलिए, आरोपी सैयद शाहनवाज हुसैन को सुनवाई की अगली तारीख के लिए संबंधित थाना प्रभारी के माध्यम से तलब करने का निर्देश दिया जाता है.” उच्चतम न्यायालय ने जनवरी में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच शुरू करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली हुसैन की याचिका खारिज कर दी थी. शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सभी उपाय हुसैन के लिए खुले हैं.
उच्च न्यायालय ने पिछले साल 17 अगस्त को निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली हुसैन की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें दिल्ली पुलिस को उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था और कहा था कि 2018 के आदेश में कोई विसंगति नहीं थी.
वर्ष 2018 में, दिल्ली की एक महिला ने कथित बलात्कार के लिए हुसैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध करते हुए निचली अदालत का रुख किया था, भाजपा नेता ने इस आरोप से इनकार किया था. मजिस्ट्रेट अदालत ने सात जुलाई, 2018 को हुसैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था और कहा था कि शिकायत में संज्ञेय अपराध का मामला बनता है. इस आदेश को भाजपा नेता ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी, जिसने उनकी याचिका खारिज कर दी थी.



