
नई दिल्ली: गौरव गोगोई ने कहा कि कानून उस समय भी विफल था। आज जिस मंशा से सरकार ये ला रही है, आज भी यह फेल होगा। 2024 में कानून लाने के बावजूद 2026 में भी पेपर लीक हुआ। अफसोस की बात है कि उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। तब उन्होंने कहा था “कहां हुआ पेपर लीक, नहीं हुआ पेपर लीक।’ इस बार भी उनका यही रवैया था। 21 बच्चों ने आत्महत्या कर दी। कल इस्तीफे के बाद प्रधान जब संसद में आए तो आपने उनको ऐसे माला पहनाई जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़के आए हों।
पेपर लीक संशोधन विधेयक पर गौरव गोगोई का हमला
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने असम में आई बाढ़ और उसमें 70 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग भी उठाई।पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बोलते हुए गोगोई ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है और यह विधेयक केवल दिखावा करने के लिए लाया गया है। गोगोई ने कहा कि सरकार का यह कदम सिर्फ एक आंखों में धूल झोंकने जैसा प्रयास है। इस विधेयक से परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार नहीं होगा और सरकार को इस मुद्दे पर ठोस तथा प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के नीट पेपर लीक मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए 46 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया 11 महीने तक फरार रहा और गिरफ्तारी के बाद उसे भी जमानत मिल गई। इसके अलावा अमित कुमार बरुआ और अमित कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों को भी जमानत मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कई आरोपियों के नाम गिनाए।
गौरव गोगोई ने कहा कि जिस उद्देश्य से पहले यह कानून लाया गया था, उसमें वह सफल नहीं हो सका और जिस मंशा के साथ अब संशोधन लाया जा रहा है, उसमें भी सफलता की संभावना नहीं दिखती। उन्होंने कहा “यह कानून आपकी विफलता का स्मारक है।”
पर लीक मामलों में पांच महीने के भीतर फैसला- डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान इस संशोधन विधेयक के जरिए कर रही है। पूरी जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की समयसीमा तय की गई है, जबकि इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा। घटना होने से लेकर अंतिम निर्णय आने तक पूरे मामले के निपटारे में पांच महीने से अधिक समय नहीं लगेगा। यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही, ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में डबल बेंच से नीचे नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार एक महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है और उसकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक पेश करने के साथ ही कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठित और राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख सिफारिशों में से 35 को पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह ईमानदार है और यह संशोधन भी उसी दिशा में किया गया एक गंभीर प्रयास है। उनका कहना था कि इन प्रस्तावों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए और यदि कोई विरोध करता है, तो उस पर देश की जनता सवाल उठाएगी।
जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस को घेरा, बोले- पहले भी लीक होते रहे पेपर
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक वर्ष 2024 में लाए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम में संशोधन है। उन्होंने कहा कि यह कानून भी मौजूदा सरकार ही लेकर आई थी और स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला कानून था। पहले लाया गया कानून और अब प्रस्तुत किया गया संशोधन, दोनों ही छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प की भी पुनर्पुष्टि है कि भारत के बच्चों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से यह संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होने वाला कानून है।



