छत्तीसगढ़: आत्मसमर्पण करने वाले आठ माओवादियों ने 10वीं कक्षा की ओपन स्कूल परीक्षा पास की

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Thu, 01 Oct 2026 04:00 PM
छत्तीसगढ़: आत्मसमर्पण करने वाले आठ माओवादियों ने 10वीं कक्षा की ओपन स्कूल परीक्षा पास की
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रायपुर: कभी हाथों में राइफल लेकर लड़ने वाली पूर्व माओवादी गीता नरोटे ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हीं हाथों में कलम थामी और 10वीं कक्षा की राज्य ओपन स्कूल परीक्षा पास कर ली। गीता अब आगे की पढ़ाई कर नर्स बनना चाहती हैं।
प्रतिबंधित संगठन की मेडिकल टीम में काम करने के कारण ‘डॉक्टर चंपा’ के नाम से जानी जाने वाली गीता ने माओवादियों द्वारा अपने पिता की हत्या के बाद छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। गीता (36) चार बहनों में सबसे बड़ी थी और इस कारण उन्हें मां और छोटी बहनों की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ”मैं बहुत खुश हूं कि मुझे फिर से पढ़ने का मौका मिला। मैं हमेशा से पढ़ना चाहती थी। अब मैं आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं और नर्स बनना चाहती हूं।” गीता आत्मसमर्पण करने वाले बस्तर संभाग के उन आठ नक्सलियों में शामिल हैं, जिन्होंने इस साल अगस्त में 10वीं कक्षा की ओपन स्कूल परीक्षा पास की। परिणाम पिछले महीने घोषित किए गए। अन्य सफल उम्मीदवारों में यादगिरी कोंडघाटला उर्फ भास्कर, संतोष आंचला उर्फ सन्नू, रामधर कश्यप, मडकम डुल्ला और नवरू पोयम शामिल हैं, जिन्होंने जगदलपुर से परीक्षा दी। बीजापुर से अर्जुन पायम उर्फ वासु और कांकेर से रामजी गावड़े ने भी परीक्षा पास की।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के गुरेकासा गांव की रहने वाली गीता माओवादियों की डिवीजनल कमेटी की सदस्य थी और वरिष्ठ नक्सली रूपेश के नेतृत्व वाले 210 माओवादियों में शामिल थीं। रूपेश ने पिछले साल अक्टूबर में जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। गीता के अनुसार, स्कूल छोड़ने के एक साल के भीतर उन्हें माओवादी समर्थक होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और दो साल जेल में रहने के बाद 2004 में दोबारा गिरफ्तारी के डर से वह आंदोलन में शामिल हो गईं। संगठन में उन्होंने दूरदराज के इलाकों में लोगों का इलाज और अन्य मदद की।

गीता ने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद अधिकारियों की मदद से उन्होंने पढ़ाई शुरू की। उन्हें समर्पण नीति के तहत 50 हजार रुपये मिले, जिनमें से कुछ राशि किताबें खरीदने में खर्च की। उन्होंने बताया कि संगठन में शिक्षक रहे पूर्व माओवादी सेतु उर्फ श्याम ने भी पढ़ाई में मदद की। परीक्षा पास करने वाले संतोष आंचला उर्फ सन्नू (31) एरिया कमेटी सदस्य थे। उन्होंने दूसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ी और 2008 में चेतना नाट्य मंच (सीएनएम) से प्रभावित होकर माओवादी आंदोलन में शामिल हुए। बाद में उन्होंने संगठन में युवा कैडरों को गणित और ंिहदी पढ़ाई। अब वह पढ़ाई जारी रखने के साथ व्यवसाय और खेती करना चाहते हैं।

कोंडागांव के रामधर कश्यप (34) ने भी दूसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ी थी। बोधघाट बांध परियोजना से गांवों के डूबने की बात सुनकर वह आंदोलन में शामिल हुए और इस साल मार्च में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि संगठन में रहते हुए पढ़ना-लिखना सीखा और परीक्षा पास कर खुश हैं। अधिकारी ने बताया कि गीता, सन्नू और कश्यप जगदलपुर के पुलिस सुविधा वाले ‘त्रिवेणी परिसर’ में रह रहे हैं।
बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने कहा कि समर्पण और पुनर्वास नीति के तहत उन्हें शिक्षा समेत जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। शिक्षा उन्हें बाहरी दुनिया से जुड़ने और भविष्य में रोजगार पाने में मदद करेगी।

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