
नयी दिल्ली/चंडीगढ़. उच्चतम न्यायालय ने हालिया चंडीगढ़ महापौर चुनाव कराने वाले निर्वाचन अधिकारी को सोमवार को फटकार लगाते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि उन्होंने मतपत्रों को विरूपित किया, जिसके लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उनका कृत्य ‘लोकतंत्र की हत्या’ व ‘माखौल’ है.
इस चुनाव में गड़बड़ी से ‘स्तब्ध’ प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि यह इस प्रकार से लोकतंत्र की हत्या नहीं करने देगी और शीर्ष अदालत चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से संतुष्ट नहीं होने पर नये सिरे से चुनाव कराने का आदेश देगी.
न्यायालय ने पूछा कि निर्वाचन अधिकारी एक अधिकारी हैं या भगोड़ा. शीर्ष अदालत ने चंडीगढ़ महापौर चुनाव मामले में 19 फरवरी को अगली सुनवाई के दौरान उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश देने के अलावा मतपत्रों और चुनाव कार्यवाही के वीडियो को संरक्षित करने का भी आदेश दिया.
न्यायालय ने यह आदेश महापौर का चुनाव हारने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद कुलदीप कुमार की उस याचिका पर गौर करने के बाद दिया, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस-आप गठबंधन के पार्षदों के आठ मत पत्रों पर निशान लगाते हुए उन्हें अमान्य करार दिया. भाजपा ने 30 जनवरी को चंडीगढ़ महापौर चुनाव में जीत हासिल की और सभी तीन पद बरकरार रखे, जिसपर कांग्रेस-आप गठबंधन ने निर्वाचन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था.
महापौर पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा के मनोज सोनकर ने आप के कुलदीप कुमार को हराया. सोनकर को 16, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कुमार को 12 वोट मिले थे. वहीं, आठ वोट को अवैध घोषित कर दिया गया था. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने चुनावी प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग देखने के बाद कहा, ”यह स्पष्ट है कि उन्होंने (निर्वाचन अधिकारी) मतपत्रों को विरूपित कर दिया. इस व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. देखिये, वह कैमरे की ओर क्यों देख रहे हैं. श्रीमान सॉलिसिटर (जनरल), यह लोकतंत्र का माखौल है और लोकतंत्र की हत्या है, हम स्तब्ध हैं. क्या यह एक निर्वाचन अधिकारी का आचरण है.”
चंडीगढ़ के अधिकारियों की ओर से न्यायालय में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा, ”न्यायालय के पास तस्वीर का केवल एक पहलू है.चुनिंदा रूप से कही गई किसी बात के आधार पर कोई राय न बनाएं.” पीठ में, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं.
पीठ ने कहा, ”…यह व्यक्ति मतपत्र को विरूपित कर देता है और कैमरे की ओर देखता है. कृपया अपने चुनाव अधिकारी को बताएं कि उच्चतम न्यायालय उन पर नजर रख रहा है. हम इस तरह लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे. सबसे बड़ी स्थिरकारी शक्ति चुनाव प्रक्रिया की शुचिता है और यहां क्या हुआ.” पीठ ने निर्देश दिया कि महापौर चुनाव से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड, रिकॉर्ड के वर्तमान संरक्षक एवं चंडीगढ़ के उपायुक्त द्वारा सोमवार शाम पांच बजे तक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के संरक्षण में दे दिया जाए.
इनमें मतपत्र, संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और निर्वाचन अधिकारी के पास उपलब्ध अन्य सभी सामग्री शामिल हैं.
प्रधान न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी में कहा, ”अगली तारीख पर वीडियो को समग्रता में पेश करें…हम चाहते हैं कि हमारा अंत:करण संतुष्ट हो अन्यथा नए सिरे से चुनाव कराया जाए. हम निर्वाचन अधिकारी को नये सिरे से चुनाव कराने का निर्देश देंगे. वह कैमरे की ओर क्यों देख रहे हैंर . उन्हें अपना कर्तव्य निभाना था. वह अधिकारी है या भगोड़ा . उन्होंने चुपके से मतपत्र को विरूपित कर दिया.” आप और कांग्रेस ने शीर्ष अदालत की टिप्पणियों की सराहना करते हुए कहा कि यह भाजपा के चेहरे पर एक ‘करारा तमाचा’ है.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी से पता चलता है कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में किस तरह ”लोकतंत्र की हत्या”की गई.
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भाजपा जनता की आवाज दबाने के लिए लोकतंत्र को कुचल रही है, यह अब देश की जनता के सामने है. जनता ही इसका उचित जवाब देगी.” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन बंसल ने भी शीर्ष अदालत की टिप्पणियों की सराहना की और कहा कि यह सच्चाई की जीत है.
कांग्रेस के पंजाब प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में गड़बड़ी को उच्चतम न्यायालय द्वारा लोकतंत्र का माखौल करार दिये जाने ने चुनावों में धांधली के भाजपा के खिलाफ आरोपों को और भी सही साबित कर दिया है.” वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों के कारण ही लोगों की ”उम्मीदें न्यायपालिका पर टिकी हैं.” पीटीआई की वीडियो सेवा से बात करते हुए पाठक ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला ”काफी उत्साहजनक” है.
शीर्ष अदालत ने यह भी आदेश दिया कि 7 फरवरी की चंडीगढ़ नगर निकाय की निर्धारित बैठक अगले आदेश तक स्थगित रहेगी.
इसने याचिका की अगली सुनवाई 19 फरवरी के लिए तय करते हुए कहा, ”निर्वाचन अधिकारी अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए अगली तारीख पर इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहेंगे.” शीर्ष अदालत ने इसपर भी नाराजगी जताई कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया. आप के एक पार्षद ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसमें चंडीगढ़ महापौर चुनाव नये सिरे से कराने के पार्टी के अनुरोध पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था.



