
चंडीगढ़: अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में सजायाफ्ता डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ंिसह सोमवार को रोहतक की सुनारिया जेल से 40 दिन की पैरोल पर बाहर आ गया। ंिसह को अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में 2017 में 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। दोषी ठहराए जाने के बाद यह उसकी 15वीं पैरोल है।
डेरा के प्रवक्ता एवं अधिवक्ता जितेंद्र खुराना ने बताया कि 40 दिन की इस अवधि के दौरान ंिसह सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में ही रहेगा।
डेरा प्रमुख और तीन अन्य लोगों को 16 साल से अधिक समय पहले एक पत्रकार की हत्या के मामले में 2019 में दोषी ठहराया गया था।
ंिसह इससे पहले अगस्त 2025 में 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आया था। अप्रैल 2025 में उसे 21 दिन की फरलो और पांच फरवरी को हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले जनवरी 2025 में 30 दिन की पैरोल दी गई थी।
इसी तरह, पांच अक्टूबर 2024 को हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन एक अक्टूबर को वह 20 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आया था। अगस्त 2024 में उसे 21 दिन की फरलो दी गई थी। 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक दो सप्ताह पहले सात फरवरी से तीन सप्ताह की फरलो मिली थी।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति जैसे सिख संगठनों ने ंिसह को राहत दिए जाने की आलोचना की है। मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने संप्रदाय के पूर्व प्रबंधक रणजीत ंिसह की 2002 में हुई हत्या के मामले में ‘‘दोषयुक्त और कमजोर’’ जांच का हवाला देते हुए ंिसह और चार अन्य को बरी कर दिया था।
उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के उस आदेश को पलट दिया था, जिसमें ंिसह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सीबीआई अदालत ने ंिसह को सह-आरोपियों के साथ आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराया था। पिछले 14 मौकों में से कई बार जेल से बाहर आने पर ंिसह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित अपने डेरा आश्रम में रहा। सिरसा मुख्यालय वाले डेरा सच्चा सौदा के हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य राज्यों में कई अनुयायी हैं। हरियाणा में डेरा के अनुयायियों की संख्या कई जिलों में काफी है, जिनमें सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार शामिल हैं।



