केरल सरकार और राज्यपाल के बीच मतभेद केवल एक ‘समझौता’: विपक्ष के नेता सतीशन

कोच्चि. केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तथाकथित “टकराव” केवल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक ”समझौता” है, ताकि उच्च शिक्षा क्षेत्र में संकट जैसे अधिक गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके.

विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार के निलंबन के मुद्दे पर राज्य सरकार और केरल विश्वविद्यालय के कुलपति के बीच कथित सुलह का स्वागत करते हुए उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि विपक्ष ने ही सबसे पहले “छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए सुलह” की मांग की थी.
सत्तारूढ़ माकपा की छात्र शाखा, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने शुक्रवार को उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु के साथ चर्चा के बाद कुलपति मोहनन कुन्नुमल के खिलाफ अपना प्रदर्शन स्थगित कर दिया था.

कांग्रेस नेता सतीशन ने बताया कि विपक्ष ने कहा था कि किसी समारोह के लिए सीनेट हॉल को किराए पर देना जैसे मामूली मुद्दों से विश्वविद्यालयों के कामकाज में बाधा नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य में छात्र कॉलेज और विश्वविद्यालय छोड़ रहे हैं और यह क्षेत्र “गहरे संकट” में है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए एसएफआई कार्यकर्ताओं को राज्यपाल और कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए कहा गया था.

सतीशन ने आरोप लगाया कि पिछले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के कार्यकाल के दौरान, जब भी सरकार को संकट का सामना करना पड़ता था, तो वह (आरिफ मोहम्मद खान) भी महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सरकार के खिलाफ कुछ मुद्दे उठाते थे.
उन्होंने दावा किया कि राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र ”वेंटिलेटर सपोर्ट” पर है और उच्च शिक्षा क्षेत्र खस्ताहाल है.

केरल विश्वविद्यालय में यह मुद्दा 25 जून को राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर के एक समारोह के लिए सीनेट हॉल को धार्मिक संगठन को किराए पर दिए जाने से शुरू हुआ, जहां मंच पर ‘भारत माता’ की तस्वीर प्रर्दिशत की गई थी. विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार ने शुरुआत में समारोह के लिए अनुमति दी थी, लेकिन बाद में उसे रद्द कर दिया. हालांकि, राज्यपाल आदेश की अवहेलना करते हुए कार्यक्रम में शामिल हुए.

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