आप से गठबंधन के सवाल पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में मतभेद, सभी सात सीटों पर तैयारी करेगी पार्टी

नयी दिल्ली. लोकसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की दिल्ली इकाई के नेताओं के बीच मतभेद बुधवार को खुलकर सामने आ गया. हालांकि, सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं को सभी सात सीटों पर तैयारी करने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की बैठक के बाद पार्टी नेता अलका लांबा ने बयान दिया कि कांग्रेस सभी सात लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उनके इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जब कांग्रेस गठबंधन नहीं करना चाहती तो फिर मुंबई में 31 अगस्त और एक सितंबर को होने वाली विपक्षी गठबंधन की बैठक में आप के शामिल होने का कोई मतलब नहीं है. प्रियंका कक्कड़ ने यह भी कहा कि मुंबई की बैठक में शामिल होने का फैसला आप का शीर्ष नेतृत्व करेगा.

आप की तीखी प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया ने अलका के बयान से दूरी बना ली और कहा कि यह पार्टी की अधिकृत राय नहीं है. बाबरिया ने यह भी कहा कि बैठक में गठबंधन को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ और इस पर कोई भी फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि खबरों के आधार पर प्रतिक्रिया देना अपरिपक्वता है.

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दल हैं. कांग्रेस ने दिल्ली में सेवाओं से संबंधित विधेयक के मुद्दे पर पिछले दिनों संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों में आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था, जबकि संदीप दीक्षित और अजय माकन जैसे कई नेताओं की राय इस मुद्दे पर अलग थी. खरगे और राहुल ने कांग्रेस की दिल्ली इकाई के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. सूत्रों के मुताबिक इसमें दिल्ली के नेताओं को राष्ट्रीय राजधानी की सभी सात सीटों पर तैयारी करने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए निर्देशित किया गया है.

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने आम आदमी पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव में गठबंधन का फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया, हालांकि पार्टी की राज्य इकाई के ज्यादातर नेताओं की राय गठबंधन के खिलाफ है. सूत्रों ने यह भी बताया कि खरगे और राहुल ने एकजुट होकर आगे बढ़ने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया.

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ कांग्रेस अलाकमान की बैठक में संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, पार्टी के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार, वरिष्ठ नेता अजय माकन, जयप्रकाश अग्रवाल और कई अन्य नेता मौजूद थे.

बैठक के बाद खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”लोकसभा चुनाव के मद्देनज.र, आज दिल्ली कांग्रेस के नेताओं के साथ मंत्रणा हुई. दिल्ली प्रदेश का नवसंचार हमारी प्राथमिकता है, जिसमें सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सहभागिता ज.रूरी है. हमने दिल्ली को समृद्ध और ख.ुशहाल बनाया था, आगे भी दिल्ली के लोगों के लिए हमारा संघर्ष जारी है.”

बाबरिया ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक में गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई, लेकिन इस बारे में कांग्रेस नेतृत्व जो भी फैसला करेगा वह सबको स्वीकार्य होगा. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता केंद्र में नरेन्द्र मोदी सरकार और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार, दोनों ही की ‘जन विरोधी’ नीतियों का विरोध करते रहेंगे.

बैठक में शामिल रहे एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं की राय यही है कि आम आदमी पार्टी ने राजधानी में कांग्रेस का जनाधार छीना है और ऐसे में पार्टी को उस जनाधार को फिर से हासिल करने के लिए प्रयास करना चाहिए. हमारी तैयारी सभी सात लोकसभा सीटों पर होगी. गठबंधन को लेकर कांग्रेस नेतृत्व जो भी फैसला करेगा, वो सभी लोग मानेंगे.” पिछले लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सात सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था और भाजपा ने सभी पर कब्जा किया था. त्रिकोणीय मुकाबले में मत प्रतिशत के लिहाज से भाजपा के बाद कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी और सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी.

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