दुर्लभ तस्वीरों, कलाकृतियों की खोज ने उपेक्षित कमरे को ‘अलादीन की गुफा’ में बदला

कोलकाता. कोलकाता में एक सचिवालय भवन के गलियारों की तरह भूलभुलैया में एक स्टोर-रूम में छिपा हुआ 19वीं सदी की तस्वीरों, रेखाचित्रों, स्मृति चिह्नों और दस्तावेजों का एक दुर्लभ खजाना मिला है, जिनकी खोज ने उपेक्षित कमरे को ‘अलादीन की गुफा’ में बदल दिया है.

ब्रिटिश साम्राज्य के दूसरे शहर की सड़कों पर थ्री-डेकर, भाप से चलने वाली ट्राम और एक पोंटून पुल की श्वेत-श्याम तस्वीरें, बंगाल प्रेसीडेंसी से प्रतिष्ठित आईसीएस परीक्षा के 1880 के टॉपर पॉल ग्रेगरी मेलिटस को जारी एक प्रमाण पत्र, होलवेल स्मारक की हाथी दांत की एक प्रतिकृति और स्पेनिश फ्लू संक्रमण के प्रकोप के दौरान एक भारतीय डॉक्टर द्वारा 1919 सार्वजनिक स्वच्छता पर लिखी गई पुस्तक इस खजाने में शामिल हैं जिनकी बंगाल के महाप्रशासक और आधिकारिक ट्रस्टी द्वारा अब अच्छी देखभाल की जा रही है.

वर्ष 1849 में ब्रिटिश युग के एक कानून द्वारा एक कार्यालय बनाया गया जो किसी भी ऐसे नागरिक की संपत्ति की देखभाल करता है जो बिना किसी उत्तराधिकारी या रिश्तेदारों के मर जाता है. जिन लोगों की संपत्तियां प्रशासक के प्रभार में आती थीं, उनमें से अधिकांश ब्रितानी थीं जो यहां काम करने या व्यापार करने के दौरान मर गए और उनकी संपत्ति का दावा करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया.
कानून 1902 और 1913 में परिवर्तनों के साथ आज भी जारी है, और इसके जरिए एक विशाल भंडार स्थापित हुआ है जो कि पुरातात्त्विक और इतिहासकारों दोनों के लिए उल्लेखनीय महत्व का एक संग्रह साबित हो सकता है जो 19 वीं और 20 वीं सदी के सामाजिक जीवन के बारे में अपनी समझ बढ़ाना चाहते हैं.

इस अनोखे खजाने को संरक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे वर्तमान महाप्रशासक बिप्लब रॉय ने पीटीआई-भाषा से कहा, “एक बार जब हमें ये वस्तुएं स्टोर रूम में मिल गईं तो हमारी अगली कार्रवाई धूल हटाने और सफाई करने की थी. उन्होंने कहा, “हमने तब कैटलॉंिगग और दस्तावेजÞीकरण शुरू किया … बहाली व्यवस्थित रूप से की जा रही है और इतनी बड़ी संख्या में ऐसी तस्वीरों, पत्रों और दस्तावेजों की मौजूदगी शानदार है.” रॉय और उनकी टीम द्वारा किया गया काम काफी बड़ा है. सीपिया-रंग की हजÞारों तस्वीरों, जो 19वीं सदी से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत तक की हैं, साथ ही चमड़े की जिल्दों और ट्रंक में रखे गए कई टन वजनी दस्तावेजों और कलाकृतियों की बहाली का काम किया जा रहा है.

रॉय ने कहा कि लगभग 1,000 तस्वीरें पहले ही बहाल कर दी गई हैं और अब वे विभाग के सुरक्षित संरक्षण में हैं. उन्होंने 1919 में स्पैनिश फ्लू के प्रकोप के दौरान प्रकाशित डॉक्टर जहर लाल दास की एक पुस्तक – हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ की ओर इशारा किया – जिसके बारे में उन्होंने कहा कि ये कोविड संक्रमण से निपटने के लिए सुराग हो सकते हैं.

दास ने मास्क पहनने का सुझाव दिया था और मास्क तैयार करने के तरीके सूचीबद्ध किए थे तथा बताया था कि कुछ स्थितियों में मास्क क्यों पहना जाना चाहिए और वह “यहां के पहले डॉक्टर थे जिन्होंने इस बारे में बात की थी”. रॉय ने कहा, “हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास महामारी के मुद्दे पर उनका लेखन है.” उनकी टीम स्पैनिश फ्Þलू और अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के फोटोग्राफिक साक्ष्य खोजने की कोशिश कर रही है.

खजाने में 19वीं सदी में हुगली नदी के घाटों, छोटे जहाजों, न्यू मार्केट और ग्रेट ईस्टर्न होटल के साथ-साथ कई ब्रिटिश सेना अधिकारियों के निजी एल्बम की तस्वीरें हैं. उन्नीसवीं शताब्दी के आग्नेयास्त्रों के साथ-साथ गोला-बारूद भी कमरे में छिपा कर रखा हुआ पाया गया है.

रॉय ने कहा, “हम इन सभी वस्तुओं को पूरी तरह से बहाल करने के बाद अपने भवन में एक संग्रहालय स्थापित करना चाहते हैं. हम डिजिटल टच स्क्रीन भी पेश करना चाहते हैं जहां कोई आगंतुक स्क्रीन छूकर छवियों को देख सके.” उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा अनुमति दी जाती है, तो बहाल किए गए फोटो और दस्तावेजों की प्रतियां उनके विभाग द्वारा बाजार में बिक्री के लिए रखी जा सकती हैं और यह राज्य के लिए राजस्व की एक नयी धारा हो सकती है.

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