अर्थव्यवस्था में दूसरी तिमाही में आ रही तेजी, पर मुद्रास्फीति चिंता का कारण

आरबीआई ने बिना दावे वाली राशि का पता लगाने के लिये 'उद्ग्म' पोर्टल शुरू किया

मुंबई. देश की अर्थव्यवस्था में दूसरी तिमाही में तेजी आ रही है. हालांकि, महंगाई लगातार केंद्रीय बैंक के संतोषजनक स्तर छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है. रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बुलेटिन में यह कहा गया है. मुख्य रूप से टमाटर समेत सब्जियों और अन्य खाने का सामान महंगा होने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में उछलकर 7.44 प्रतिशत पहुंच गयी, जो इससे पिछले महीने में 4.87 प्रतिशत थी.

बुलेटिन में लिखा गया है, ”जहां मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति में नरमी है, वहीं खुदरा महंगाई दर दूसरी तिमाही में औसतन छह प्रतिशत से ऊपर रहने की आशंका है.” मुख्य मुद्रास्फीति में अत्यधिक उतार-चढ.ाव वाली खाद्य और ऊर्जा कीमतों को शामिल नहीं किया जाता.
केंद्रीय बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ. के साथ चार प्रतिशत (दो से छह प्रतिशत के बीच) पर रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है.

लेख में यह भी कहा गया है कि औद्योगिक उत्पादन और व्यापार में नरमी से पहली तिमाही के मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक पुनरुद्धार धीमा हो रहा है. इसमें लिखा गया है, ”वैश्विक माहौल में दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था 2023-24 की दूसरी तिमाही में गति पकड़ रही है.” निर्यात के कारण जो गिरावट है, उसकी भरपाई निजी खपत और स्थिर निवेश जैसे घरेलू कारक कर रहे हैं.

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले सप्ताह पेश द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष 2023-24 के लिये आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा है. इसका कारण यह है कि विदेशों में मांग कमजोर होने के बावजूद घरेलू मांग के कारण आर्थिक गतिविधियां जारी हैं.

हालांकि, हाल में खाने के सामान के दाम चढ.ने से मुद्रास्फीति के अनुमान को 0.3 प्रतिशत बढ.ाकर 5.4 प्रतिशत कर दिया गया है.
लेख के अनुसार, अबतक (14 अगस्त तक) खाद्य वस्तुओं की कीमतों के जो आंकड़े हैं, वे बताते हैं कि अनाज और दाल के दाम में अगस्त में लगातार तेजी रही है.

खाद्य तेल के दाम में जुलाई-अगस्त में गिरावट आई. वहीं टमाटर के दाम में अगस्त में अबतक औसतन तेजी रही है. हालांकि, ताजा आंकड़े बताते हैं कि कीमतों में कुछ नरमी आ रही है. प्याज और आलू के दाम में भी तेजी देखी जा रही है. आरबीआई बुलेटिन में प्रकाशित इस लेख को केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देबव्रत पात्रा की अगुवाई वाली टीम ने लिखा है. रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि लेख में जो विचार दिये गये हैं, वह लेखकों के हैं और वह आरबीआई के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

आरबीआई ने बिना दावे वाली राशि का पता लगाने के लिये ‘उद्ग्म’ पोर्टल शुरू किया

भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को केंद्रीकृत वेब पोर्टल उद्ग्म पेश किया. इस पहल का मकसद लोगों को बिना दावे वाली राशि के बारे में पता लगाने और उसका दावा करने में मदद करना है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पोर्टल उद्ग्म (बिना दावा वाली जमाराशि – सूचना तक पहुंच का प्रवेश द्वार) पेश किया. इसे केंद्रीय बैंक ने तैयार किया है ताकि लोगों एक ही स्थान पर कई बैंकों में अपनी बिना दावे वाली जमाराशियों की खोज करने में आसानी हो और वे उस पर अपना दावा कर सके.

पोर्टल पर वर्तमान में सात बैंकों… भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, धनलक्ष्मी बैंक, साउथ इंडियन बैंक, डीबीएस बैंक इंडिया और सिटी बैंक… में बिना दावे वाली जमाराशि के बारे में जानकारी उपलब्ध है. रिजर्व बैंक ने छह अप्रैल, 2023 को द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में बिना दावे वाली जमा राशि का पता लगाने के लिये एक केंद्रीकृत वेब पोर्टल बनाने की घोषणा की थी.

केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा कि वह बिना दावे वाली जमाओं की संख्या में बढ.ती प्रवृत्ति को देखते हुए इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये समय-समय पर जन जागरूकता अभियान चला रहा है. वेब पोर्टल शुरू होने से लोगों को अपने बिना दावे वाले जमा खातों की पहचान करने में मदद मिलेगी और वे या तो जमा राशि का दावा कर सकेंगे या अपने जमा खातों को अपने संबंधित बैंकों में चालू कर सकेंगे.

रिजर्व बैंक सूचना प्रौद्योगिकी प्राइवेट लिमिटेड (आरईबीआईटी), भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी और संबद्ध सेवाएं (आईएफटीएएस) और इसमें भाग लेने वाले बैंकों ने पोर्टल विकसित करने में सहयोग किया है. बयान के अनुसार, वर्तमान में उपयोगकर्ता पोर्टल पर उपलब्ध सात बैंकों के संबंध में अपनी बिना दावे वाली जमा राशि का विवरण प्राप्त कर सकेंगे. पोर्टल पर अन्य बैंकों के लिये ऐसी राशि का पता लगाने की सुविधा चरणबद्ध तरीके से 15 अक्टूबर, 2023 तक उपलब्ध कराई जाएगी.

उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने फरवरी, 2023 तक लगभग 35,000 करोड़ रुपये की बिना दावे वाली जमा राशि आरबीआई को हस्तांतरित की थी. ये वे जमा खाते थे, जो 10 साल या उससे अधिक समय से संचालित नहीं थे. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) 8,086 करोड़ रुपये के साथ बिना दावे वाली जमा राशि के मामले में शीर्ष पर है. इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक (5,340 करोड़ रुपये), केनरा बैंक (4,558 करोड़ रुपये) और बैंक ऑफ बड़ौदा (3,904 करोड़ रुपये) का स्थान है.

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