नयी दिल्ली/बेलगावी. कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले दोनों विधेयक संविधान एवं संघवाद के खिलाफ हैं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”यह संविधान विरोधी विधेयक है. यह हमारे राष्ट्र के संघवाद के खिलाफ है. हम इसका विरोध कर रहे हैं.” कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधेयक को पेश किए जाने के समय ही मत विभाजन से पता चला कि भाजपा के पास संवैधानिक संशोधन पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं है.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”हम (कांग्रेस) अकेले नहीं हैं जिन्होंने इस विधेयक का विरोध किया है. अधिकतर विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया है. विरोध के आधार कई हैं. विधेयक संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन है.” थरूर ने सवाल किया कि ऐसा क्यों होना चाहिए केंद्र सरकार गिरे तो राज्य सरकारें भी गिरें?ह्व कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने दावा किया कि सरकार इन विधेयकों को लेकर अपने मकसद में विफल रही है क्योंकि उसके पास संविधान संशोधन के लिए जरूरी संख्या नहीं है.
सरकार ने देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले विधेयक और उसी से जुड़ा दूसरा विधेयक भी विपक्षी दलों के भारी विरोध के बीच मंगलवार को निचले सदन में पेश किया. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ और उससे जुड़े ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को निचले सदन में पुर:स्थापित करने के लिए रखा, जिनका विपक्षी दलों ने पुरजोर विरोध किया.
सदन में मत विभाजन के बाद विधेयक को पुर:स्थापित कर दिया गया. विधेयक को पेश किए जाने के पक्ष में 269 वोट, जबकि विरोध में 198 वोट पड़े. इसके बाद मेघवाल ने ध्वनिमत से मिली सदन की सहमति के उपरांत ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को भी पेश किया.
भाजपा की ‘एक राष्ट एक चुनाव’ के पीछे की मंशा ‘ एक राष्ट्र कोई चुनाव नहीं’ : वेणुगोपाल
कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था संबंधी दो विधेयकों को लोकसभा में पेश किये जाने को लेकर मंगलवार को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के पीछे की स्पष्ट मंशा ‘एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं’ है.
उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को ‘अव्यावहारिक’ करार दिया और संसद में संबंधित विधेयकों के पारित होने पर संदेह व्यक्त किया.
वेणुगोपाल ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”एक राष्ट्र, एक चुनाव का अभिप्राय और स्पष्ट मंशा – एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं है. भाजपा का मुख्य एजेंडा एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं है. वे बिल्कुल भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं चाहते हैं. पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को धीरे-धीरे नष्ट करने के लिए, वे एक राष्ट्र एक चुनाव का यह नया विचार ला रहे हैं.” कांग्रेस महासचिव ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”कर्नाटक की अपनी विशेषता है. केरल की अपनी विशेषता है, इसी तरह मणिपुर और जम्मू कश्मीर की भी अपनी-अपनी विशेषता है. विविधता में एकता इस देश की खूबसूरती है. ये लोग (भाजपा) लोकतंत्र, विविधता में विश्वास नहीं करते हैं.”
पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था करने वाले विधेयक मंगलवार को तीखी बहस के बाद लोकसभा में पेश किए गए.
विपक्षी दलों ने मसौदा कानूनों – एक संविधान संशोधन विधेयक और एक साधारण विधेयक – को संघीय ढांचे पर हमला बताया. हालांकि, सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया. विपक्ष द्वारा मत विभाजन की मांग के बाद ये विधेयक प्रस्तुत किये गये.