
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने सोमवार को अपने पर्यवेक्षकों से निष्पक्ष, स्वतंत्र और प्रलोभन मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने का आह्वान किया और साथ ही इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय एवं राज्य बलों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल हो ताकि उनकी तैनाती किसी खास पार्टी को फायदा नहीं पहुंचाए.
लोकसभा चुनावों और कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले 2,100 से अधिक सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने पर्यवेक्षकों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सभी को समान अवसर देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव डराने-धमकाने और प्रलोभन से मुक्त होने चाहिए. कुमार ने उन्हें याद दिलाया कि पर्यवेक्षक के रूप में वे आयोग का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनसे पेशेवर रूप से आचरण करने और उम्मीदवारों सहित सभी हितधारकों के लिए सुलभ होने की उम्मीद की जाती है.
निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि पर्यवेक्षकों को मैदान पर अपने आचरण में सख्त लेकिन विनम्र रहने का निर्देश दिया गया.
पर्यवेक्षकों को पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान आवंटित संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं के भीतर शारीरिक रूप से सीमित रहने के लिए भी कहा गया है. इसमें कहा गया है कि उनके वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग लगाने का प्रस्ताव दिया गया है.
बयान के मुताबिक उनसे कहा गया है कि वे अपने फोन और ई-मेल पर हमेशा उपलब्ध रहें और उम्मीदवारों, दलों, मतदाताओं और मतदान र्किमयों की फोन कॉल का जवाब दें. इसमें कहा गया है, ”इस संबंध में किसी भी शिकायत को आयोग द्वारा गंभीरता से लिया जाएगा.” बयान में कहा गया है कि पर्यवेक्षकों को पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपने सहज स्थिति से बाहर आने की जरूरत है.
दिनभर के ब्रीफिंग सत्र के दौरान, अधिकारियों को वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त, उप चुनाव आयुक्तों और अन्य लोगों द्वारा चुनाव प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के बारे में व्यापक और गहन जानकारी दी गई. पर्यवेक्षकों को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है. ये पर्यवेक्षक पुलिस, सामान्य और व्यय पर्यवेक्षक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) और अन्य संबद्ध सेवाओं से लिए जाते हैं.
पर्यवेक्षकों को चुनाव की घोषणा से पहले मतदान वाले क्षेत्रों में तैनात किया जाता है. ये पर्यवेक्षक राज्यों में चुनावी प्रक्रिया की निगहबानी करते हैं और अधिकारियों की आंख और कान के रूप में काम करते हैं. आगामी चुनावों के लिए लगभग 900 सामान्य पर्यवेक्षक, 450 पुलिस पर्यवेक्षक और 800 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए जा रहे हैं.



