नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने और पार्टी का चुनाव चिह्न ‘तीर-कमान’ आवंटित करने संबंधी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की याचिका की सुनवाई पर आगे बढ़ने के लिए मंगलवार को निर्वाचन आयोग को अनुमति दे दी. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने उद्धव ठाकरे नीत खेमे की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने ‘मूल’ शिवसेना होने के शिंदे खेमे के दावे पर फैसला करने से निर्वाचन आयोग को रोकने का अनुरोध किया था.
पीठ में न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे.
संविधान पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं कि निर्वाचन आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी.’’ ठाकरे खेमे की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव चिह्न आदेश तभी लागू किया जा सकता है, जब दावा करने वाला उसी राजनीतिक दल से हो, लेकिन दावा एक विरोधी खेमा का हो.
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा कहना है कि शिंदे पार्टी में अब नहीं हैं और सदस्यता त्याग दी गई है. ऐसे में, निर्वाचन आयोग उनकी सुनवाई कैसे करेगा?’’ सिब्बल ने इस साल जून में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करने वाले शिंदे और शिवसेना के कुछ अन्य विधायकों के खिलाफ आयोग्यता नोटिस जारी किये जाने का हवाला देते हुए यह कहा. निर्वाचन आयोग की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरंिवद दतार ने कहा कि आयोग यह फैसला करने के लिए स्वतंत्र है कि किस खेमे में अधिक विधायक हैं.
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत ंिसह कोश्यारी की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि आयोग सिर्फ यह फैसला कर रहा है कि कौन सा खेमा ‘मूल’ शिवसेना है और इसलिए उसे शिंदे की याचिका पर आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए. शिंदे खेमे के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता एन. के. कौल ने दलील दी कि चुनाव चिह्न विधायक की संपत्ति नहीं है और यह किस खेमे से संबद्ध है, उस पर निर्वाचन आयोग को फैसला करना है. पीठ शिवसेना के शिंदे खेमे की बगावत के कारण महाराष्ट्र में पैदा हुए राजनीतिक संकट से जुड़े लंबित मामलों पर सुनवाई कर रही है. शिंदे नीत खेमे की बगावत के चलते राज्य में महा विकास आघाड़ी की सरकार गिर गई थी.