
नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े एक मामले में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के सांसद अब्दुल रशीद शेख को ह्लहिरासत मेंह्व संसद के मौजूदा सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है. अदालत ने राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (एनआईए) की इस आशंका को खारिज कर दिया कि उनके भागने का खतरा है.
न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने महानिदेशक (कारागार) को निर्देश दिया कि 26 मार्च से चार अप्रैल के बीच लोकसभा सत्र के दिनों में रशीद को सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी जेल से संसद तक ले जाएंगे. पीठ ने कहा कि बारामूला के सांसद को संसद सुरक्षा के र्किमयों या मार्शलों की हिरासत में सौंप दिया जाएगा, जो उन्हें कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति देंगे और वह वहां अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं. पीठ ने 25 मार्च के आदेश में कहा कि जेल से बाहर रहने के दौरान रशीद को मोबाइल फोन या लैंडलाइन का इस्तेमाल करने या मीडिया से बातचीत करने की इजाजत नहीं होगी.
रशीद का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और विख्यात ओबेरॉय ने किया. पीठ ने रशीद को निर्देश दिया कि वे संसद परिसर को छोड़कर जेल से बाहर किसी से भी बातचीत नहीं करेंगे. पीठ ने रशीद से आने-जाने की यात्रा और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च वहन करने के लिए कहा.
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला को हराने वाले रशीद 2017 के आतंकवादी वित्त-पोषण मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमे का सामना कर रहे हैं. उन्होंने 10 मार्च के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए चार अप्रैल तक अभिरक्षा पैरोल या अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था.
रशीद दिल्ली की तिहाड़ जेल में वर्ष 2019 से बंद है. पिछले साल सितंबर में उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए एक महीने की अंतरिम जमानत दी गई थी. एनआईए की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि रशीद का नाम व्यवसायी और सह-आरोपी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान सामने आया था. अक्टूबर 2019 में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद एक विशेष एनआईए अदालत ने मार्च 2022 में रशीद और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), और 124 ए (देशद्रोह) और यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्यों और आतंकवाद के वित्तपोषण से संबंधित अपराधों के तहत आरोप तय किए.



