बिलासपुर: लालबत्ती पर यात्री ट्रेन को नियंत्रित करने में विफलता के कारण हुई दुर्घटना

नयी दिल्ली. छत्तीसग­ढ़ में एक यात्री ट्रेन और खड़ी हुई मालगाड़ी की टक्कर से संबंधित मामले की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रेन चालक दल लालबत्ती पर ट्रेन को नियंत्रित करने में विफल रहा. रेलवे विशेषज्ञों ने यह जांच की है. स्थानीय मेनलाइन इले्ट्रिरक मल्टिपल यूनिट (एमईएमयू) यात्री ट्रेन ने मंगलवार को छत्तीसग­ढ़ के बिलासपुर जिले में एक खड़ी हुई मालगाड़ी को टक्कर मार दी थी, जिसमें लोको पायलट समेत 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए.

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है, “ट्रेन संख्या 68733 (एमईएमयू लोकल) का चालक दल खतरे के सिग्नल संख्या एजे-5 पर ट्रेन को नियंत्रित करने में विफल रहा और वह ट्रेन संख्या एन/एमडीआईटी (मालगाड़ी) के पिछले ब्रेक वैन (अंतिम डिब्बे) से टकरा गई.” रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेन संख्या 68733 के चालक दल ने खतरे के सिग्नल से पहले सही समय और स्थान पर ट्रेन को नियंत्रित नहीं किया और ‘एसपीएडी’ (सिग्नल पास्ड एट डेंजर) का उल्लंघन किया – यानी लाल सिग्नल को पार कर दिया.
जांच रिपोर्ट पांच विशेषज्ञों ने तैयार की, हालांकि केवल तीन ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं. सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के प्रतिनिधि ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, आठ कोच (छह यात्री कोच और दोनों छोर पर दो मोटर कोच) वाली एमईएमयू ट्रेन ने अपराह्न तीन बजकर 48 मिनट पर गेवरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो से बिलासपुर की ओर ‘अप’ लाइन पर प्रस्थान किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ट्रेन लाल बत्ती को पार कर अगली लाल बत्ती पर खड़ी 59 वैगन वाली मालगाड़ी के पिछले ब्रेक वैन से 3 बजकर 50 मिनट पर टकरा गई.

टक्कर इतनी भीषण थी कि मालगाड़ी का ब्रेक वैन पूरी तरह पलट गया और यात्री ट्रेन का आधा मोटर कोच (लोकोमोटिव) ब्रेक वैन के अगले वैगन पर च­ढ़ गया. रिपोर्ट के अनुसार, लोको पायलट और सहायक लोको पायलट मोटर कोच में घायल अवस्था में मिले. बाद में लोको पायलट की मौत हो गई, जबकि सहायक लोको पायलट को अन्य यात्रियों के साथ तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया.
अधिकारियों ने बताया कि हादसा ‘अप’ लाइन पर हुआ और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए बीच की लाइन पर टावर कार चलाकर राहत कार्य किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है, “बीच की लाइन को शाम चार बजकर 30 मिनट पर ट्रेन परिचालन के लिए फिट घोषित किया गया और चौथी लाइन 4 बजकर 50 मिनट पर चालू की गई. राहत कार्य टावर कार के कर्मचारियों ने शाम 4 बजकर 7 मिनट पर शुरू किया..” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सहायक लोको पायलट के अस्पताल में भर्ती होने के कारण उसकी ‘श्वास विश्लेषण जांच’ नहीं की जा सकी.
रिपोर्ट में गेवरा स्टेशन मास्टर का बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने कहा कि एमईएमयू ट्रेन के प्रस्थान के बाद उन्हें गार्ड से वीएचएफ संचार के माध्यम से संदेश मिला कि टक्कर हो गई है और एम्बुलेंस भेजी जाए. एक अधिकारी ने बताया, “रेलवे सुरक्षा आयुक्त अब इस दुर्घटना के कारणों की जांच करेंगे और विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे.”

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